चारों तरफ से घेरने की साजिश, भारत के खिलाफ पाकिस्तान नया गेमप्लान
ind pak conflict 2025: भारत के विरुद्ध पाकिस्तान क्या कोई बड़ी रणनीति बना रहा है? भारत से हर बार जंग में मार खाने वाला पाकिस्तान अब अपने नए रणनीतिक गठबंधनों में तेजी से बदलाव भी ला रहा है। जहां एक तरफ कई सालों के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के बीच रिश्ते ठीक हुए हैं तो वहीं पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने में जुटे हुए हैं। मुनीर ने अमेरिका को अरब सागर में पहुंच देने के लिए गहरे पानी वाले पासनी बंदरगाह की पेशकश कर दी है।
तुर्की को कराची में दी जमीन (2025 India Pakistan crisis)
बड़ी बात तो यह है कि ये बंदरगाह चीन निर्मित ग्वादर से 100 कि.मी. की दूरी पर है। अमेरिका के साथ ही पाकिस्तान ने तुर्की से भी नजदीकी (Turkey-Pakistan partnership) काफी बढ़ाई है। इसने तुर्की को कराची में एक नए औद्योगिक केंद्र के लिए 1000 एकड़ जमीन देने की पेशकश कर दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका को पासनी में बंदरगाह बनाने और इसे संचालित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। यह विचार पिछले महीने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद आया है जिसे वाशिंगटन के सामने रखा गया है।
खास क्यों है पासनी बंदरगाह (ind pak conflict 2025)
हालांकि आधिकारिक तौर पर इस बंदरगाह पर कोई अमेरिकी सैन्य संपत्ति नहीं होगी मगर रणनीतिक रूप से पासनी इतना महत्वपूर्ण है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार पासनी बंदरगाह इतना खास क्यों है?
तो आपको बता दें पासने की भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है।
यह ईरान के चाबभार और पाकिस्तान के ग्वादर के बीच स्थित है। चाबार बंदरगाह को भारत ने विकसित किया है तो ग्वादर चीन का महत्वपूर्ण रणनीतिक निवेश है। यह अमेरिका को अरब सागर में दो प्रतिद्वंदी शक्तियों के बीच एक अनोखी स्थिति में रखता है।
इसके साथ-साथ पाकिस्तान ने कथित तौर पर अमेरिका को ड्रोन की सीमित पहुंच की पेशकश की है। यह 2000 के दशक की शुरुआत की याद दिलाता है। जब अफगानिस्तान में अभियानों के लिए पाकिस्तान के शमसी एयरबेस से अमेरिकी ड्रोन ऑपरेट होते थे।
ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान में भड़के गुस्से के चलते साल 2011 में यह ऑपरेशन बंद हो गए थे। अमेरिका के लिए यह प्रस्ताव आकर्षक है। पासनी में उपस्थिति उसे अफगानिस्तान और ईरान पर नजर रखने में भी मदद करेगी।
pak के इस नए गठजोड़ में अमेरिका के साथ-साथ तुर्की भी शामिल है। इसी साल अप्रैल में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुर्की के राष्ट्रपति तैयब एदगान को कराची औद्योगिक पार्क में 1000 एकड़ मुफ्त जमीन की पेशकश की थी। ऐसे में तुर्की से बढ़ती नजदीकी भारत के लिए चिंता की बात है।
इससे ind और pak के बीच conflict बढ़ा सकता है। खासतौर पर जब अंकारा ने इस साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था।
भारत की चिंता क्यों बढ़ी (ind pak diplomatic conflict 2025)
पाकिस्तान के बदलते गठबंधन ने हिंदुस्तान (ind) की चिंता क्यों बढ़ा दी है? ये एक बड़ा सवाल है। तो आपको बता दें भारत के चाबहार टर्मिनल से मात्र 300 कि.मी. दूर स्थित पास बंदरगाह पश्चिमी तट पर सामृद्ध संतुलन को बदलने का खतरा पैदा भी करता है।
अगर वाशिंगटन को यहां परिचालन मिलता है तो यह निगरानी का एक त्रिकोण पूरा कर देगा जिसके बीच भारत फंस सकता भी है। यही 2025 या आने वाले सालों में ind और pak में conflict का कारण बन सकता है। अमेरिका Pak के बीच संभावित ड्रोन सहयोग सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी बढ़ाता है। भारत की पश्चिमी सीमा के पास बढ़ी हुई निगरानी क्षमता इस्लामाबाद को खुफ़िया जानकारी दिला सकती है। इसके साथ ही कराची में तुर्की की बढ़ती आर्थिक भूमिका दोनों की साझेदारी को मजबूत करती है जो अक्सर भारत के विरुद्ध रही है।
मगर पाकिस्तान जिस तरीके से अपनी नई रणनीति बना रहा है और पाकिस्तान जिस तरीके से अमेरिका के साथ-साथ तुर्की से नजदीकी बढ़ा रहा है, वह भारत के लिए एक खतरा भी पैदा कर सकती है।
सऊदी से पाक की डिफेंस डील
सऊदी अरब और पाकिस्तान ने हाल ही में एक बड़ी डिफेंस डील की है। जिसके तहत पाकिस्तान और सऊदी डिफेंस पार्टनर हुए और एक पर हमला दूसरे पर अटैक माना जाएगा। दोनों एक दूसरे की हिफाजत करेंगे। इस समझौते से सऊदी को परमाणु प्रोटेक्शन मिल गया था,
क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिम देशों के बीच एकमात्र परमाणु ताकत है। अब तेल की दौलत से मालामाल सऊदी ने पाकिस्तान को रिटर्न गिफ्ट दिया है। सऊदी की एक एआई कंपनी ने पाकिस्तान में निवेश करने की बात कही है। इस इन्वेस्टमेंट में 30 लाख लोगों को एआई टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाएगा।
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इस डिफेंस डील के बाद अब पाकिस्तान को सऊदी अरब से बड़ा तोहफा मिला है। सऊदी की कंपनी गो एआई हब ने पाकिस्तान में इन्वेस्ट करने का ऐलान कर दिया। यह कंपनी पाकिस्तानियों को एआई के बारे में बताएगी। उन्हें ट्रेंड करेगी और जॉब प्रोवाइड कराएगी।
इस प्लान के तहत कंपनी पहले फेज में कम से कम 500 पाकिस्तानियों को ट्रेंड करने जा रही है। शुरुआत में 1000 पाकिस्तानियों को नौकरी देने की भी तैयारी है। मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि पाकिस्तान ने एआई सेक्टर में 30 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य रखा है। कहा जा रहा है कि अब सऊदी की कंपनी गो एआई हब पाकिस्तान को आने वाले वक्त में इसके लिए सपोर्ट करेगी।
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दरअसल पाकिस्तान ने जब से सऊदी के साथ डिफेंस डील की तब से उसका मकसद सऊदी को पाकिस्तान में पैसा लगाने के लिए राजी करने का रहा है। पाकिस्तान हेल्थ, कम्युनिकेशन और दूसरे सेक्टर में रियाद से डील की चाहत रख रहा है।
हाल ही में सऊदी ने पाकिस्तान के हेल्थ सेक्टर में इन्वेस्ट करने की बात कही थी। मगर गो एआई हब ने पहले ही निवेश करने की घोषणा कर दी। सऊदी की इस एi कंपनी का हेड ऑफिस रियाद में है और यह बहुत से प्रोजेक्ट में एडवांस एआई टेक्नोलॉजी प्रोवाइड कराती है।
गौरतलब है कि सऊदी और पाकिस्तान में सितंबर महीने में डिफेंस डील हुई है। कहा जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में इजरायल की आक्रामकता से निपटने के लिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ यह डील की। सऊदी और पाकिस्तान दोनों ही इजरायल को फिलहाल मान्यता नहीं देते हैं। क़तर पर इजरायल ने जब हमास नेताओं को निशाना बनाकर हमला किया तब सऊदी के कान खड़े हुए।
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आरोप लगता है कि इजरायल अपने ग्रेटर इजरायल के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहा है। उसके रास्ते में सऊदी समेत कई अरब देश आते हैं। ऐसे में उससे बढ़ते खतरे को देखते हुए सऊदी ने पाकिस्तान से यह डील कर ली। कुछ मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट बताते हैं कि सऊदी ने यह डील इजरायल की वजह से नहीं बल्कि यमन में हूतियों को कंट्रोल करने के लिए की है क्योंकि अंसारुल्लाह सऊदी के दुश्मन माने जाते हैं।
सऊदी ने पाकिस्तान में किया बड़ा निवेश (saudi pak friendship)
बहरहाल सऊदी ने पाकिस्तान में अपना पहला बड़ा निवेश कर दिया है। गाजा पर इजरायल के हमले को अब पूरे दो साल बीत चुके हैं और इन दो सालों ने न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। 7 अक्टूबर साल 2023 वो दिन जब अमास ने इजरायल पर एक अप्रत्याशित हमला कर दिया।
उस हमले में करीब 1200 लोग मारे गए और 250 से ज्यादा को बंधक बना लिया गया। मगर जो उसके बाद हुआ वो इतिहास के सबसे लंबे और सबसे खूनखराबे वाले युद्धों में से एक बन गया।
अब 2 साल बाद इजराइल ने पहली बार अपने युद्ध के वास्तविक नुकसान का संकेत दिया है। रजर और गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध में इजराइल को मानवीय और सैन्य दोनों स्तरों पर भारी क्षति उठानी पड़ी। 1000 से ज्यादा सैनिक मारे गए, हजारों घायल हुए और अरबों डॉलर का रक्षा बजट खर्च हो चुका है। हालांकि इजरायल की आधिकारिक रिपोर्ट्स अभी भी सीमित जानकारी देती हैं। कई विश्लेषकों का कहना है कि यह आंकड़े राजनीतिक रूप से संपादित हो सकते हैं। यानी असली कीमत शायद उससे भी कहीं ज्यादा जितनी दिखाई जा रही है।

