महंगाई से लेकर व्यापार समझौते तक, मोदी सरकार के लिए दो दिनों में एक के बाद एक 4 खुशखबरियां आईं
decline inflation rate: प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लिए बीते दो दिन किसी उत्सव से कम नहीं रहे। चार अहम मोर्चों पर एक के बाद एक आईं अच्छी खबरें सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण बनकर उभरीं। जहां एक ओर खुदरा और थोक महंगाई दर में अप्रत्याशित गिरावट ने आम नागरिक को राहत की सांस दी, वहीं दूसरी ओर भारत-अमेरिका के लंबे समय से रुके हुए व्यापार समझौते में हलचल ने वैश्विक मंच पर भारत की सक्रियता को रेखांकित किया । इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से आई सराहना ने भारत को दुनिया की आर्थिक धुरी के रूप में स्थापित कर दिया। तो आइए, जानते हैं इन चार सुनहरी खबरों के पीछे की कहानी-
पहली खुशखबरी: खुदरा महंगाई में सुकूनदायक गिरावट
सप्ताह के आखिरी कार्यदिवस पर आई यह खबर देश के करोड़ों घरों के लिए किसी ठंडी हवा के झोंके की तरह रही। सरकार द्वारा जारी सितंबर महीने के खुदरा महंगाई दर के आंकड़े आम जनता के चेहरे पर मुस्कान ले आए ।
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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक घटकर 1.54 प्रतिशत पर आ गया ये न केवल एक आंकड़ा है बल्कि वह अहसास है जब सब्ज़ी के थैले का वजन तो वही रहता है, लेकिन जेब पर बोझ थोड़ा कम लगता है। जून 2017 के बाद यह सबसे निचला स्तर है और इसका सीधा लाभ रसोई की ज़रूरतों को मिल रहा है।
खास बात यह रही कि यह गिरावट (decline inflation rate) मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों के सस्ते होने से आई है चावल की बोरियों से लेकर दूध की थैलियों तक, छोटे दुकानदार से लेकर मध्यमवर्गीय परिवार तक, हर किसी को इस राहत का असर महसूस हुआ है ।
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पिछले महीने अगस्त में यह दर 2.07% थी तुलना करें तो यह गिरावट (Decreasing inflation) ना केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि एक सामाजिक सुकून का संकेत भी है।
दूसरी खुशखबरी: थोक महंगाई दर में भी गिरावट
महंगाई के मोर्चे पर राहत की यह बयार थमी नहीं। खुदरा के बाद थोक महंगाई दर ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया ।
सरकार ने मंगलवार को जब थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को 0.13 प्रतिशत पर बताया, तो यह संकेत था कि आर्थिक चक्र में स्थिरता लौट रही है। अगस्त में यह 0.52 प्रतिशत था। इस गिरावट (decline inflation rate) के पीछे खाद्य उत्पादों, विनिर्माण सामग्रियों और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई नरमी है।
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इसका मतलब यह है कि फैक्ट्रियों से निकले सामान, निर्माण कार्यों में लगे उत्पाद और रोज़मर्रा की ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा अब पहले से सस्ता हो रहा है जिसका फायदा धीरे-धीरे उपभोक्ता तक भी पहुँचता है। यह सिर्फ आंकड़ों की भाषा नहीं बल्कि देश की आर्थिक धड़कनों का संकेत है ।
तीसरी खुशखबरी: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब आगे बढ़ता दिख रहा है
सोमवार को आई यह खबर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को लेकर आश्वस्त करने वाली रही। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुका व्यापार समझौता, जो वर्षों से कई पेचों में उलझा था, अब नई दिशा की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।
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पिछले दिनों अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली आना और अब भारतीय टीम का अमेरिका दौरा इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच की जमी हुई बातचीत की बर्फ अब पिघलने लगी है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिरोध को सुलझाने के प्रयास गंभीरता से हो रहे हैं। यह समझौता सिर्फ कारोबारी रिश्तों को नहीं बल्कि रणनीतिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और निवेश के रास्तों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा। ये वो पल है जब कूटनीति और व्यापार एक साथ भारत के लिए द्वार खोलते हैं।
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चौथी खुशखबरी: आईएमएफ ने कहा- भारत अब वैश्विक विकास का इंजन है
इस श्रृंखला की सबसे गौरवपूर्ण खबर अंतरराष्ट्रीय मान्यता से जुड़ी है । अंतर राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने भारत की अर्थव्यवस्था को ‘वैश्विक विकास का इंजन’ कहा ये शब्द नहीं बल्कि भारत की बदलती तस्वीर का वैश्विक प्रमाण हैं ।
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आईएमएफ-विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले दिया गया यह बयान सिर्फ एक कूटनीतिक प्रशंसा नहीं है बल्कि यह उस भरोसे की मुहर है जो भारत ने बीते वर्षों में अपने साहसिक और दूरदर्शी आर्थिक निर्णयों के जरिए अर्जित की है।
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उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारत की नीतियों पर शक कर रहे थे, वे अब गलत साबित हो चुके हैं ये वाक्य भारत की आर्थिक यात्रा की प्रामाणिकता और प्राइम मिनिस्टर मोदी के नेतृत्व की दृढ़ता को पुष्ट करता है।
IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले दिया गया ये बयान सिर्फ तारीफ नहीं बल्कि उस भरोसे की पुष्टि है जो भारत ने वैश्विक मंच पर कमाया है। जो लोग भारत की नीतियों पर सवाल उठाते थे, अब उन्हें भी पीछे हटना पड़ा है।
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इन चार राहत भरी खबरों ने एक साथ ये साबित कर दिया है कि भारत की आर्थिक नीति केवल कागज़ों तक सीमित नहीं बल्कि ज़मीन पर असर दिखा रही है। आम नागरिक की थाली से लेकर वैश्विक मंचों तक, भारत की छवि मज़बूत हुई है।
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देश के प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सरकार न केवल संकटों से निपटने में सक्षम रही है बल्कि उन्होंने अवसरों को भी देश की ताक़त में बदला है। ये दो दिन, देश के लिए भरोसे, उम्मीद और उन्नति के प्रतीक बन गए हैं। इन उपलब्धियों ने देश को एक बार फिर यह यकीन दिलाया कि जब नीति, नीयत और नेतृत्व साथ चलते हैं, तो बदलाव ज़रूर आता है।

