4 लाख के पार जाएगी चांदी की कीमत, भारत में बढ़ती कीमतों के पीछे की वजह जानें
silver price increase: बीते कई महीनों से भारत और दुनिया भर में सोने-चांदी की कीमतों में निरंतर उछाल देखा जा रहा है। जहां सोने की बढ़ती कीमतों का असर तो पहले से ही दिखाई दे रहा था वहीं अब चांदी भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। खासकर भारत में चांदी की बढ़ती कीमतों ने एक नया सवाल खड़ा किया है: क्या यह महंगी धातु भविष्य में और अधिक महंगी हो जाएगी?
चांदी की आपूर्ति अब धीरे-धीरे हो रही है कम
हालांकि सोने की कीमतों में बदलाव को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है मगर भारत में चांदी के बाजार में एक और गंभीर मामला उभरकर सामने आया है। भारत में चांदी की आपूर्ति अब धीरे-धीरे कम होती जा रही है जिससे इसकी कीमतों में निरंतर वृद्धि हो रही है। सीए नितिन कौशिक ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इस पर अपने विचार व्यक्त किए थे। उनका कहना है कि चांदी की बढ़ती कीमतें सिर्फ सरकारी नीतियों या कारखानों के प्रभाव से नहीं बल्कि जनता की बदलती आदतों और मांग के कारण हो रही हैं।
चांदी की बढ़ती कीमतों के पीछे क्या कारण हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों में उछाल के कई कारण हैं। सबसे पहला कारण है भारत में सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग। जैसे-जैसे सौर पैनल की मांग बढ़ी है चांदी का उपयोग औद्योगिक उत्पादों में बढ़ गया है। इसके अलावा भारतीय बाजार में चांदी की मांग पारंपरिक गहनों से बढ़कर अब ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक जरूरतों तक फैल चुकी है।
सोलर पैनल में होती है चांदी भारी खपत
भारत में सोलर पैनल निर्माण के लिए चांदी की भारी खपत हो रही है। 2025 में भारत ने पांच हजार टन से अधिक चांदी का आयात किया जो वैश्विक उत्पादन का लगभग पांचवां हिस्सा है। यह न केवल खरीद-बिक्री का मामला है बल्कि एक वैश्विक आपूर्ति संकट का भी संकेत देता है।
भारत ने 2030 तक सैकड़ों गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इससे चांदी की मांग और अधिक बढ़ सकती है क्योंकि सौर पैनल बनाने में चांदी एक अहम भूमिका निभाती है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले वर्षों में चांदी की कीमतों में और अधिक वृद्धि हो सकती है।
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चांदी की बढ़ती कीमतों के साथ अब यह सिर्फ एक निवेश का विकल्प नहीं रहा बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। इसलिए चांदी का बाजार अब केवल गहनों और शादी-ब्याह तक सीमित नहीं है बल्कि यह औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण तत्व बन चुका है।
क्या कीमतें और बढ़ सकती हैं
चांदी की कीमतों के बढ़ने से भारत में कई आम लोग अब सोने के बजाय चांदी में निवेश करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चांदी की कीमतें दो से तीन गुना तक बढ़ सकती हैं। चांदी की बढ़ती कीमतों के साथ भारत अब केवल मुनाफा नहीं बल्कि अपनी ऊर्जा जरूरतों और सुरक्षा को पक्का करने की ओर बढ़ रहा है।
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यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि चांदी का बाजार अब एक नई दिशा में बढ़ रहा है। जहां पहले यह मुख्य रूप से एक निवेश या आभूषण का हिस्सा हुआ करता था वहीं अब यह औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी अहम भूमिका निभाने लगा है। इस बदलाव का असर न सिर्फ बाजार पर पड़ेगा बल्कि यह आम आदमी की जेब पर भी असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी चार लाख के पार जा सकती है।

