कहां है इंसानियत; पाक के खूनी खेल पर अफगानी क्रिकेटर का भावुक पोस्ट वायरल, 400 की मौत पर सहम गई दुनिया
pak afg war 2026: ‘अब अंतरराष्ट्रीय कानून कहां है, इंसानियत कहां है, दुनिया के बोलने से पहले और कितने मासूम नागरिकों की जानें जाएंगी।’ अफगानिस्तान के युवा क्रिकेटर रहमानुल्लाह गुरबाज की ‘एक्स’ पर यह पोस्ट मानवता के दुश्मन पाकिस्तान की असलियत को उजागर करने के लिए पर्याप्त है।
रमजान में कत्लेआम; पाकिस्तान ने बरसाए बम, 400 की मौत
पवित्र रमजान माह में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हवाई हमले कर चार सौ नागरिकों को मौत की नींद सुला दिया है। हमले में ढाई सौ से अधिक निर्दोष नागरिक गंभीर रूप से घायल हैं। यह हमला ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल पर किया गया। पाकिस्तान की कायराना हरकत पर गुरबाज के अलावा अफगानी क्रिकेटर राशिद खान, मोहम्मद नबी, गुलबादिन नाइब व नवीन उल आदि ने भी आक्रोश जाहिर किया है।
इस अप्रत्याशित घटना के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान में टकराव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। दोनों मुस्लिम मुल्क पिछले कुछ दिनों से जंग में उलझे पड़े हैं। अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार है। जबकि पाकिस्तान में सिर्फ नाम का लोकतंत्र है। वहां सरकार का रिमोट सेना के हाथों में है।
अफगानिस्तान में मासूमों को भून डाला
सैकड़ों बेकसूर नागरिकों की मौत से तालिबान को बड़ा झटका लगा है। उसने इस हमले का बदला लेने का ऐलान कर दिया है। मसलन मामला शांत होने की बजाए और गंभीर हो चुका है। चिंता की बात यह कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग रूक नहीं पाई है। दूसरी तरफ पाकिस्तान-अफगानिस्तान में टकराव निरंतर बढ़ रहा है।
ऐसे में समूची दुनिया की टेंशन में वृद्धि होना लाजमी बात है। अफगानिस्तान में हमले की भारत ने कड़ी आलोचना की है। नई दिल्ली के बयान से इस्लामाबाद को मिर्ची लगना तय है। पवित्र रमजान माह में दुनिया के विभिन्न मुस्लिम देशों में जबरदस्त तनाव एवं दहशत का आलम देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान व अफगानिस्तान के अलावा ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, फिलिस्तीन इत्यादि में अशांति का वातावरण कायम है। वैसे ड्रग रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल को निशाना बनाकर पाकिस्तान ने बहादुरी का नहीं बल्कि कायरतापूर्ण कार्य किया है। झगड़ा जब दो देशों के मध्य है तो उसमें आमजन को मौत के घाट उतारने का कोई औचित्य नहीं बनता।
तालिबान बेशक युद्ध की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं है, मगर वह आत्मविश्वास से लबरेज है। उसे पता है कि दुश्मन को कब और कैसे गहरे घाव दिए जाते हैं। पाकिस्तान के कृत्य की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है। जंग में फंसे दोनों मुल्क एक-दूसरे पर आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि दोनों मुल्क अपने-अपने फायदे के लिए आतंकी संगठनों को पाल-पोस रहे हैं।
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पाकिस्तान में जहां सेना के संरक्षण में आतंकियों की फैक्ट्रियों का संचालन होता है, वहीं अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा आतंकियों को भर्ती कर प्रशिक्षण दिया जाता है। दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य कारण डूरंड रेखा को लेकर विवाद, तालिबान द्वारा पनाह दिए जा रहे उग्रवादी समूह और सीमा पार से होने वाली सैन्य झड़पें हैं।
पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी अफगान धरती का इस्तेमाल हमलों के लिए कर रहा है। जबकि अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। दोनों मुल्कों में संघर्ष बढ़ना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। चूंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की माली हालत बेहद खराब है। वहां शिक्षा एवं रोजगार की समुचित व्यवस्था नहीं है। आमजन को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। ऐसी स्थिति में युद्ध और परेशानी ही बढ़ाएगा।

