सावधान! मिडिल ईस्ट की जंग और आपकी जेब पर सीधा वार, 25 लाख भारतीय गरीबी के कगार पर
डायन महंगाई निरंतर बढ़ रही है। मेहनतकश वर्ग परेशान है। आमदनी से ज्यादा खर्चों ने जेब का गणित बिगाड़ रखा है। अब बारी गरीबी बढ़ने की है। गरीबी का आंकड़ा नीचे की बजाय ऊपर की ओर जाने को तैयार है। बेशक यह हमारा युद्ध नहीं है, मगर देर-सवेर खामियाजा हमें भी भुगतना पड़ेगा। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के बाद उपजे हालात ने भारत को बड़ी टेंशन दे रखी है।
मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के प्रयास बेशक जारी हैं, मगर अब तक जो कुछ हो चुका है, उसने भारत के समक्ष अनेक चुनौतियां पेश कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ताजा रिपोर्ट नई दिल्ली का ब्लड प्रेशर (बीपी) बढ़ाने के लिए पर्याप्त है। मिडिल ईस्ट युद्ध से भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर आधारित इस रिपोर्ट ने देश में गरीबी के नए आंकड़े की तरफ इशारा किया है।
25 लाख भारतीयों पर पड़ेगा बुरा असर
संभावना है कि निकट भविष्य में पच्चीस लाख भारतीय गरीबी की दलदल में फंस सकते हैं। छह साल पहले कोरोना महामारी ने दुनिया में दस्तक दी थी। कोरोना नाम का अदृश्य दुश्मन धीरे-धीरे भारत में भी प्रवेश कर गया था। माना जाता है कि कोरोना के प्रसार के पीछे चीन की लापरवाही ही। हालांकि ड्रेगन ने इस सच्चाई को कभी स्वीकार नहीं किया।
कोरोना के बाद अब ‘युद्ध’ बढ़ाएगा भारत में गरीबी का ग्राफ
कोरोना के कारण भारत में काम-धंधों पर प्रतिकूल असर पड़ा था। उस दौरान सख्त लॉकडाउन और पलायन का दंश नागरिकों को झेलना पड़ा था। खैर कोरोना से छुटकारा मिलने के बाद जनजीवन पटरी पर लौटा तो अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी तेज होती गई, मगर पिछले दिनों मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने एक बार फिर भारत की मुसीबत को बढ़ा दिया है। महंगाई के बाद गरीबी में वृद्धि होने की खबर निराश करती है।
मालभाड़ा शुल्क, युद्ध जोखिम बीमा, मार्ग परिवर्तन और देरी की वजह से आयातित तेल आदि की कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिससे आयात मूल्य में वृद्धि व निर्यात का नुकसान बढ़ा है। प्रतिकूल असर खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। खाद की आपूर्ति में बाधा का असर खरीफ की फसल पर पड़ने की आशंका है। नतीजन बढ़े दामों का प्रभाव आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है, जिसका रोजगार और आय के मामले में असर बड़ी आबादी पर नजर आ रहा है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो रही है। आर्थिक तंगी के कारण आम आदमी अब जरूरी खर्चों में कटौती कर रहा है।
मिडिल ईस्ट में आग, भारत में हाहाकार
आय के साधन सीमित होने से ऐसा करना पड़ रहा है। निम्न आय वर्ग के नागरिकों में इससे भरण-पोषण का संकट पैदा हो रहा है। यदि पश्चिम एशिया संकट का शीघ्र समाधान नहीं निकलता है तो महंगाई की मार असहनीय हो सकती है। यदि समय रहते सरकार की ओर से ठोस प्रयास किए जाते हैं तो महंगाई पर अंकुश लगाना संभव हो पाएगा।
मुल्क कंगाल, लेकिन ख्वाब ‘नोबेल’ वाले! पाकिस्तान की इस मांग पर हंस रही है पूरी दुनिया
मुख्य समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट पर मंडराए संकट के बादल अभी तक पूरी तरह दूर नहीं हो पाए हैं। इससे जरूरी ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति बाधित चल रही है। देश में गरीबी से निपटने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं, मगर इसके आशाजनक परिणाम नहीं मिल पा रहे। सरकार ने मुफ्त अनाज, मुफ्त स्वास्थ्य इलाज और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से गरीबों को राहत दी है। हालांकि बढ़ती आबादी इन उपायों की राह में अड़चन पैदा कर रही है। बिहार, झारखंड, उप्र, मप्र, मेघालय, असम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बहुआयामी गरीबी का प्रतिशत अभी भी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है।

