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सावधान! नेपाल बॉर्डर पर बढ़ी भारी हलचल, PM बालेन शाह के एक फैसले ने बढ़ाई भारत की टेंशन

nepal customs duty 2026: नेपाल एक बार फिर भारत विरोधी राह पर अग्रसर नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के कुछ फैसलों पर नेपाल के भीतर विरोध की आग सुलग उठी है। विपक्ष की त्योरियां चढ़ गई हैं। सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है। भारत-नेपाल बॉर्डर पर हलचल के बीच तनावपूर्ण शांति पसर रही है। नेपाल बॉर्डर पर सख्ती एकाएक बढ़ चुकी है। इसके इतर अमेरिका ने नेपाल में दिलचस्पी दिखानी आरंभ कर दी है। ऐसे में भारत की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

गरीब और अमीर के बच्चे पढ़ेंगे एक साथ

पीएम बालेन शाह शपथ ग्रहण के बाद से एक्शन मोड में हैं। वह नए-नए प्रयोग कर देश की दशा एवं दिशा को बदलने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। नेपाल में पब्लिक स्कूलों और कोचिंग सेंटरों पर प्रतिबंध लग चुका है। समान शिक्षा प्रणाली लागू कर दी गई है। मसलन गरीब हो या अमीर सभी के बच्चे एक छत के नीचे शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।

शिक्षा माफिया पर नकेल कसने के लिए कोचिंग सेंटर की परंपरा बंद हो चुकी है। इसी क्रम में बालेन सरकार के एक नए फैसले पर विवाद गहरा रहा है। यह फैसला भारत के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने से जुड़ा है। नेपाल बॉर्डर के सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिक आमतौर पर भारत से सस्ता सामान खरीदकर ले जाते थे। सरकार ने अब सौ रुपए से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी निर्धारित कर दी है। यानी भारत से यदि सौ रुपए से ज्यादा का सामान खरीद कर ले जाया जाता है तो आमजन को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा।

सरकार की यह पॉलिसी गरीब एवं मध्यम आय वर्ग को रास नहीं आ रही है। हालांकि नेपाल के व्यापारियों ने सरकार के कदम का स्वागत किया है। इस मुद्दे पर एक्सपर्ट की राय अलग है। विशेषज्ञों ने सरकार को आड़े हाथों ले लिया है।

खतरे में ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता

विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल-भारत की खुली सीमा, जिसे वर्षों से ‘रोटी-बेटी संबंध’ ने जिंदा रखा था और दोनों देश रोजमर्रा की जिंदगी में गुंथे हुए हैं, उन दोनों देशों की सीमा आज सत्ता में बैठे व्यक्तियों की नजर में एक ‘खतरा’ बन गई है। ‘जब कोई देश अपने ही नागरिकों को खतरा समझने लगता है तो उसे समझ आ जाता है कि समस्या सीमा पर नहीं बल्कि शासन-प्रशासन में ही है।

बालेन शाह सबसे कम उम्र के पीएम बने हैं। इसके पहले उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था। वह राजनीति के पुराने या माहिर खिलाड़ी नहीं हैं। पीएम पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी का आदेश देकर देशभर में हलचल पैदा कर दी थी। नेपाल बेशक दुनिया के मानचित्र में बेहद छोटा स्थान रखता है, मगर रणनीतिक रूप से वह काफी अहम माना जाता है।

नेपाल में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए चीन और भारत में अक्सर होड़ देखने को मिलती है। इस दरम्यान अमेरिका द्वारा वहां दिलचस्पी दिखाना चर्चाओं में है। यूएस के एक दिग्गज ने हाल ही में काठमांडू का आधिकारिक दौरा किया था।

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इस दिग्गज ने चीन की आलोचना की थी। कहा गया था कि आसपास के छोटे देशों को बीजिंग कर्ज के मकड़जाल में फंसा रहा है। यह घोर निंदनीय है। निश्चित रूप से बालेन शाह के समक्ष चुनौतियां कम नहीं हैं। उन्हें आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों से पार पाने को ऊर्जा खपानी पड़ सकती है। भारत व चीन जैसे देशों से मुंह फेर लेने से नेपाल का भला संभव नहीं है।

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