तमिलनाडु में ‘थलपति’ का तूफान! DMK और AIADMK के किले ध्वस्त, जानें विजय पर किस्मत कैसे मेहरबान
जोसेफ विजय चंद्रशेखर…। देश की राजनीति में यह नाम आजकल सुर्खियों में है। अभिनेता से नेता बने विजय को उनके प्रशंसक ‘थलपति’ के नाम से भी जानते हैं। रील लाइफ के बाद अब रियल लाइफ में वह अपनी काबिलियत दिखाने को काफी उत्साहित हैं। तमिलनाडु के भावी मुख्यमंत्री विजय थलपति पर फिलवक्त किस्मत खूब मेहरबान है।
थालापति पर किस्मत मेहरबान
सियासी दल टीवीके प्रमुख विजय की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन कर चुनौती का पहला पड़ाव पार किया। दूसरी चुनौती बहुमत साबित करने की है। यह दूसरा पड़ाव भी वह जल्द पार कर लेंगे। कुछ दिन की उठा-पटक और तनाव के बाद किस्मत एक बार फिर विजय के पक्ष में नजर आ रही है। तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सदस्य आते हैं। सत्ता की बागडोर संभालने के लिए बहुमत का आंकड़ा 118 का है। विस चुनाव में टीवीके को सबसे ज्यादा 108 सीटें मिली हैं।
चुनाव में लाजवाब प्रदर्शन कर इस पार्टी ने डीएमके और एआईडीएमके जैसे पुराने दलों की नींव हिला दी है। थलपति विजय सरकार बनाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए वह राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से दो बार मुलाकात कर चुके हैं। राज्यपाल ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों के हस्ताक्षर लाने को कहा है। इस बीच कांग्रेस ने डीएमके से गठबंधन तोड़कर थलपति विजय का समर्थन करने की घोषणा कर दी है। इसके बावजूद टीवीके बहुमत के आंकड़े से पांच अंक पीछे है।
विजय थलपति के लिए अच्छी खबर यह है कि सीपीआई, सीपीएम और वीसीके जैसे दलों ने भी उन्हें समर्थन देने का मन बना लिया है। इन तीनों दलों के पास कुल छह विधायक हैं। इस हिसाब से टीवीके गठबंधन में कुल 119 विधायक हो जाएंगे। तदुपरांत वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकेगी। उधर, टीवीके को समर्थन देने पर कांग्रेस को घर के भीतर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी के इस निर्णय का खुलकर विरोध किया है। बकौल अय्यर, इस तरह की ‘मौकापरस्ती की राजनीति’ उचित नहीं है। हम पूरी तरह से अधर में लटक चुके हैं, हमने विजय के साथ जाकर अनैतिकता तो की ही है, यह सुनिश्चित न करने की राजनीतिक मूर्खता भी की है कि उनके पास बहुमत हो। वहीं, तमिलनाडु में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। इस राज्य में कमल खिलाने में पार्टी नाकाम रही है।
खत्म हो सकती है विपक्षी दलों की सियासी दुकान
जानकारों का मानना है कि भविष्य में थलपति विजय यदि सीएम के तौर पर बेहतर काम करते हैं तो डीएमके और एआईएडीएमके जैसे दलों की सियासी दुकान बिल्कुल ठप हो सकती है। यह दोनों दल लंबे समय तक तमिलनाडु की राजनीति के सिकंदर रहे हैं। थलपति विजय की पर्सनल लाइफ भी बेहद रोचक है। उनके पिता क्रिश्चियन और मां हिंदू हैं। विजय की विचारधारा सभी धर्मों का सम्मान करने की है। वह मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं तो मस्जिद में पहुंचकर नमाज भी अता करते हैं। गिरजाघर में जाकर प्रार्थना करना भी उन्हें सुकून देता है।
तमिलनाडु की जनता को अब विजय थलपति की नई पारी का बेसब्री से इंतजार है। जनता को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में राज्य का विकास होगा। चुनाव प्रचार के दौरान एक घटना ने विजय थलपति को काफी डरा दिया था। संबंधित घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विरोधियों ने विजय की आलोचना की थी। दरअसल साइकिल चलाकर जब वह चुनाव प्रचार कर रहे थे तो किसी प्रशंसक ने उनके ऊपर अचानक फूलों की माला फेंक दी थी। माला को बम समझ कर विजय साइकिल छोड़ तुरंत अपनी गाड़ी में सवार हो गए थे।

