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UP में स्मार्ट मीटर का आतंक: अब लगेगी रोक, जानिए क्यों सरकार को वापस लेने पड़े अपने कदम

smart meter news: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना आम लोगों के लिए राहत से ज्यादा मुसीबत बनती नजर आ रही है। जिन घरों में पहले सामान्य बिल आता था, वहां अब बार-बार रिचार्ज और अचानक बिजली कटने की समस्या लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही है।

कई इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि मीटर में बैलेंस खत्म होते ही तुरंत बिजली बंद हो जाती है। इससे खासकर बुजुर्गों, बीमार लोगों और छोटे बच्चों वाले परिवारों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।

लोगों का कहना है कि हर कुछ दिनों में रिचार्ज कराना आसान नहीं है। कई उपभोक्ता बताते हैं कि घर में बिजली होने के बावजूद मीटर सिस्टम के कारण सप्लाई बाधित हो जाती है।

बढ़ते बिल ने बढ़ाई मुश्किलें

सबसे बड़ा मुद्दा तेजी से बढ़ते बिजली बिल का है। जहां पहले एक महीने का बिल करीब 800 से 1000 रुपये आता था, वहीं अब कई उपभोक्ताओं को 4000 से 5000 रुपये तक भुगतान करना पड़ रहा है।

एक उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने हाल ही में 2000 रुपये जमा किए थे, लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर से 4000 रुपये का बिल सामने आ गया। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। लोगों का कहना है कि छोटे घरों में सीमित बिजली उपयोग के बावजूद इतना ज्यादा बिल आना समझ से बाहर है।

शिकायत केंद्रों पर बढ़ी भीड़

बिजली विभाग के शिकायत केंद्रों पर भीड़ लगातार बढ़ रही है। लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन समाधान तुरंत नहीं मिल पा रहा। कई उपभोक्ता बताते हैं कि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी खपत कैसे मापी जा रही है। मीटर रीडिंग की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जनता के विरोध ने सरकार को झुकाया

लगातार प्रदर्शन और नाराजगी के बाद सरकार ने अपनी रणनीति बदली है। ऊर्जा मंत्री ने घोषणा की कि अब स्मार्ट मीटर में प्रीपेड सिस्टम को हटाकर पोस्टपेड व्यवस्था लागू की जाएगी। इसका मतलब है कि अब हर महीने की खपत के आधार पर बिल तैयार होगा और उपभोक्ताओं को बार-बार रिचार्ज नहीं करना पड़ेगा। साथ ही नए कनेक्शन पर प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं रहेगा।

नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था के तहत महीने भर की खपत का हिसाब बनेगा, बिल की सूचना SMS या WhatsApp के जरिए भेजी जाएगी, भुगतान के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। बकाया राशि को किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलेगी। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी हालत में एक महीने के भीतर बिजली कनेक्शन न काटा जाए।

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क्या सिर्फ बिलिंग बदलने से हल निकलेगा?

  • हालांकि सरकार ने राहत देने की कोशिश की है, लेकिन असली सवाल अभी भी बाकी है।
  • लोगों की मुख्य शिकायत सिर्फ बिलिंग सिस्टम नहीं बल्कि मीटर की कार्यप्रणाली को लेकर है।
  • तेजी से बढ़ती रीडिंग और गलत बिलिंग के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
  • जब तक इन तकनीकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक केवल सिस्टम बदलने से स्थिति पूरी तरह सुधरने की संभावना कम दिखाई देती है।

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