बंगाल बना ‘बदलापुर’; क्या 15 साल का हिसाब चुकता कर रही है जनता, जानिए पूरा मामला
पश्चिम बंगाल में अशांति का दौर न थमना चिंताजनक है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ मारपीट होने के बाद सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले की घटना से सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने भाजपा के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। केंद्र सरकार और भाजपा पर जुबानी हमले तेज हो गए हैं। ममता बनर्जी का पारा सातवें आसमान पर है।
राज्य में टीएमसी नेताओं और समर्थकों पर हमले की सिलसिलेवार घटनाओं को भाजपा का ‘बदलापुर’ माना जा रहा है। दरअसल पिछले पंद्रह साल तक टीएमसी की सत्ता के दरम्यान भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं को समय-समय पर टारगेट किया जाता रहा था। भगवा दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसके अलावा टीएमसी के बेलगाम समर्थकों ने जनता पर खूब जुल्म ढहाया था।
अब मौका मिलने पर नागरिकों का गुस्सा रह-रहकर फूट रहा है। भाजपा समर्थकों में सबसे ज्यादा आक्रोश ममता बनर्जी, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी और सयानी घोष जैसे नेताओं को लेकर देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले अभिषेक ने धमकी भरे लहजे में जिस प्रकार का भाषण दिया था, वह मतगणना के पश्चात सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इसके अलावा शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या ने भी जनाक्रोश की नई लहर को पैदा किया। बंगाल में फिलहाल भाजपा की सत्ता है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार का संचालन हो रहा है। नई सरकार ताबड़तोड़ फैसले लेने के साथ-साथ प्रभावी कार्रवाई भी कर रही है। राज्य में लंबे समय तक मानसिक एवं शारीरिक शोषण झेलने एवं दहशत के साए में जिंदगी जीने वाले नागरिकों में एकाएक हिम्मत आ चुकी है। पीड़ितों का गुबार जगह-जगह फूट रहा है। हालांकि इससे शांति एवं कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यदि भाजपा समर्थक भी टीएमसी कार्यकर्ताओं की भांति कानून को हाथ लेकर उपद्रव करते हैं तो इन दोनों दलों में क्या अंतर रह जाएगा?
अभिषेक बनर्जी को भीड़ ने घेरा
भाजपा को अनुशासित पार्टी माना जाता है। उग्र भीड़ द्वारा अभिषेक बनर्जी को घेरकर हमला करने संबंधित घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसी प्रकार टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के सिर पर पीछे से कोई वस्तु फेंक कर मारने का वीडियो भी सामने आया है। ममता बनर्जी ने बयान दिया है कि यदि अभिषेक को हेलमेट न पहनाया जाता तो उनकी जान भी जा सकती थी।
सत्ता से बाहर ममता और उनके भतीजे की पीड़ा को भलीभांति समझा जा सकता है, मगर जनता ऐसा क्यों करने को मजबूर है, इस बारे में भी टीएमसी प्रमुख को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके शासनकाल में यदि निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार नहीं होता तो आज यह नौबत नहीं आती। असम, तमिलनाडु व पुडुचेरी आदि राज्यों में भी बंगाल के साथ विधानसभा चुनाव कराए गए थे, मगर किसी अन्य राज्य में इस प्रकार की घटनाएं प्रकाश में नहीं आ रही हैं।
ममता बनर्जी के पैरों तले खिसकी जमीन! शुभेंदु अधिकारी का ऐसा खौफ, TMC नेता को दौड़ाकर पीटा
अभिषेक बनर्जी व कल्याण बनर्जी पर हमले के मामलों को कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। किसी को भी कानून तोड़ने का अधिकार नहीं मिला है। सत्ता में रहते समय सभी को यह ध्यान रखना चाहिए कि कर्मों का फल मिलता जरूर है। सीएम पद की शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के सभी नागरिकों से शांति एवं कानून व्यवस्था का सम्मान एवं पालन करने की अपील की थी।

