2027 चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में मची रार! 120 vs 80 का वो आंकड़ा, जिसने उड़ाई नींद
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीटों के बंटवारे की चर्चा अब से शुरू हो गई है। इस बार की बातचीत का असर सीधे जनता और क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ेगा।
गठबंधन में सीटों की टक्कर
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस सपा से लगभग 120 सीटों की मांग कर सकती है। वहीं, समाजवादी पार्टी की कोशिश होगी कि कांग्रेस को 80 सीटों तक सीमित किया जाए। इस रणनीति का उद्देश्य स्पष्ट है दोनों पार्टियां 2027 में मिलकर चुनाव लड़ें और विपक्ष में अपनी स्थिति मजबूत करें।
सपा और कांग्रेस पहले भी 2017 में साथ चुनाव लड़ चुकी हैं। उस समय सपा ने कांग्रेस को 105 सीटें दी थीं। हालांकि कई सीटों पर दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारे थे।
पिछली चुनावी पारी का आंकलन
2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इस बार कांग्रेस को केवल दो सीटों पर सफलता मिली और कई क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर रही।
2017 के चुनाव में कांग्रेस ने जिन सात सीटों पर जीत हासिल की, उनमें नरेश सैनी ने बेहद से भाजपा के महावीर सिंह राणा को हराया। सहारनपुर में मसूद अख्तर ने बसपा के जगपाल सिंह को मात दी। हरचंदपुर की सीट पर राकेश सिंह ने भाजपा की कंचन लोधी को हराया।
रायबरेली में अदिति सिंह ने सपा के मोहम्मद शहबाज खान को पीछे छोड़ा। कानपुर कैंट में सोहेल अख्तर अंसारी ने भाजपा के राघवेंद्र मिश्रा को मात दी। रामपुर खास में आराधना मिश्रा मोना ने भाजपा के नागेश प्रताप सिंह को हराया। और तमकुही राज से अजय कुमार लल्लू ने भाजपा के जगदीश मिश्रा को पराजित किया।
जनता पर पड़ने वाला असर
विश्लेषक मानते हैं कि यह गठबंधन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की रणनीति बदल सकता है। अगर सीटों का बंटवारा और सहयोग सही ढंग से होता है तो दोनों पार्टियों के लिए चुनाव जीतने की संभावना बढ़ सकती है।
वहीं, जनता के लिए यह गठबंधन नए विकल्प और विकास-focused एजेंडा पेश कर सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार क्षेत्रीय समीकरण और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।
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बता दें कि 2027 के चुनाव तक दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन जारी रहेगा। जनता की नजर अब इस गठबंधन के उम्मीदवारों और उनके विकास वादों पर होगी।

