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फोन-लैपटॉप चलाने वालों को हो रहा ‘नोमोफोबिया’, जानिए ये खतरनाक बीमारी कैसे निगल रही है युवाओं का सुकून!

आज के समय में पढ़ाई और काम दोनों ही मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर निर्भर हो चुके हैं। लेकिन लगातार स्क्रीन पर समय बिताने की यह आदत धीरे-धीरे शरीर के लिए परेशानी का कारण बन रही है। खासकर युवा, ऑफिस कर्मचारी और स्टूडेंट्स इसके सबसे ज्यादा प्रभावित समूह बनते जा रहे हैं। सुविधा देने वाली तकनीक अब स्वास्थ्य पर दबाव भी डाल रही है।

शरीर पर पड़ने वाले असर

लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से शरीर के कई हिस्सों पर असर दिखने लगा है। सबसे आम समस्याओं में गर्दन दर्द, पीठ दर्द, आंखों में जलन, सिरदर्द और नींद की कमी शामिल हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव भी बढ़ता जा रहा है।

गर्दन को लगातार झुकाकर मोबाइल इस्तेमाल करने से “टेक्स्ट नेक” की समस्या सामने आ रही है। गलत तरीके से लैपटॉप पर काम करने से झुकी हुई पीठ और गर्दन की दिक्कतें बढ़ रही हैं। लंबे समय तक बैठने से कमर और कूल्हों की मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं।

लगातार दोहराए जाने वाले काम से होने वाली समस्याएं

बार-बार टाइपिंग करने से कलाई में दर्द और कार्पल टनल सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। माउस का ज्यादा इस्तेमाल करने से हाथ और कोहनी में परेशानी हो सकती है जिसे माउस आर्म या टेनिस एल्बो कहा जाता है।

लगातार स्क्रॉल करने की आदत से अंगूठे में दर्द की समस्या भी देखी जाती है जिसे गेमर थंब कहा जाता है। लंबे समय तक बिना उठे बैठे रहने से शरीर में सुस्ती और कमजोरी भी महसूस होने लगती है।

मानसिक और नींद से जुड़ी परेशानियाँ

स्क्रीन का ज्यादा उपयोग सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है। देर रात तक मोबाइल देखने से नींद खराब होती है। इसे स्लीप डिसऑर्डर से जोड़ा जाता है।

फोन से दूर होने पर बेचैनी महसूस होना भी एक समस्या बन रही है जिसे नोमोफोबिया कहा जाता है। इसके साथ ही लगातार तेज आवाज में इयरफोन इस्तेमाल करने से कानों में आवाज गूंजने जैसी परेशानी भी हो सकती है।

बचाव के आसान तरीके

इन समस्याओं से पूरी तरह बचना मुश्किल नहीं है। थोड़ी सावधानी से बड़ा फर्क लाया जा सकता है।

हर 30 से 40 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लेना जरूरी है। आंखों के लिए 20-20-20 नियम अपनाना फायदेमंद है जिसमें हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना होता है।

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सीधे बैठने की आदत डालें और शरीर की मुद्रा सही रखें। रोज हल्की एक्सरसाइज और योग को दिनचर्या में शामिल करें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

तकनीक को पूरी तरह छोड़ना समाधान नहीं है। जरूरत है इसके संतुलित उपयोग की। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके डिजिटल लाइफस्टाइल से होने वाली कई समस्याओं से बचा जा सकता है।

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