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सीधे सेटेलाइट से होगी जमीन की पैमाइश, यूपी सरकार ने लॉन्च किया डिजी रोवर GNSS सिस्टम

EELA INDIA

Lucknow. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में जमीन से जुड़े विवादों और पैमाइश (सीमांकन) की समस्याओं को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए ‘डिजी रोवर (GNSS) विशेष भूमि मापन अभियान’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर से इस राज्यव्यापी डिजिटल अभियान का शुभारंभ किया है।

क्या है डिजी रोवर (GNSS) तकनीक?

अब तक उत्तर प्रदेश में जमीन नापने के लिए पारंपरिक तरीके जैसे ‘जरीब’ (लोहे की चेन) या फीते का इस्तेमाल होता था, जिसमें मानवीय गलती (manual error) और पक्षपात की गुंजाइश रहती थी। लेकिन डिजी रोवर तकनीक के आने से इन सभी से गलतियों से बचा जा सकता है।

डिजी रोवर एक आधुनिक मशीन (छोटा रिसीवर) है, जिसे पोल पर लगाकर खेत या प्लॉट के कोनों पर रखा जाता है। यह GNSS (Global Navigation Satellite System) यानी जीपीएस और अन्य सैटेलाइट नेटवर्क से सीधे सिग्नल लेकर उस जगह के बिल्कुल सटीक भौगोलिक निर्देशांक (Exact Geographical Coordinates) दर्ज करता है। इससे जमीन की पैमाइश में 1 इंच की भी हेराफेरी या गलती की गुंजाइश नहीं बचती।

डिजी रोवर अभियान की खास बातें

यह अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है। 15 अगस्त तक प्रदेश में सभी तहसीलों और जिलों में यह अभियान शुरू कर दिया जाएगा। इससे करीब 75 हजार से अधिक लंबित भूमि पैमाइश और सीमांकन के मामलों का शीघ्र निपटारा किया जा सकेगा। राजस्व परिषद (Board of Revenue) की टीम, जिलाधिकारियों (DMs) और कमिश्नर्स के साथ मिलकर सीधे इसकी मॉनिटरिंग कर रही है।

आम जनता और किसानों को क्या फायदे होंगे?

पारदर्शिता और ईमानदारी: तकनीकी रूप से नापी होने के कारण लेखपाल या किसी अन्य स्तर पर जानबूझकर की जाने वाली गड़बड़ी पूरी तरह रुक जाएगी।

मुकदमों से आजादी: सटीक डिजिटल रिकॉर्ड होने से भविष्य में जमीनी सीमाओं को लेकर भाई-भाई या पड़ोसियों के बीच होने वाले झगड़े और कोर्ट-कचहरी के चक्कर बंद होंगे।

डिजिटल भू-अभिलेख: इस पैमाइश से मिलने वाले सटीक डेटा को यूपी के मौजूदा डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल (खतौनी/खसरा) के साथ जोड़ दिया जाएगा, जिससे भविष्य में कभी भी सही मैप देखा जा सकेगा।

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सीएम योगी ने साफ किया है कि बढ़ती आबादी और घटते प्लॉट साइज के कारण जमीनी विवाद कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनते हैं। इसलिए इस अभियान का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ हर पात्र नागरिक को समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए।

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