30 जुलाई से शुरू हो रही कावड़ यात्रा में बदल गए नियम, एक गलती और सीधे जाना पड़ेगा जेल
देश में आस्था का सबसे बड़ा उत्सव ‘कावड़ यात्रा’ आगामी 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए यह यात्रा जितनी पावन है, उतनी ही इस बार यह नियमों के कड़े दायरे में भी रहने वाली है। अगर आप भी इस साल पवित्र गंगाजल लाने की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए और नए दिशा-निर्देशों को अच्छी तरह जान लीजिए। इस बार नियमों की अनदेखी करने वालों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और उत्तराखंड सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि शिवभक्तों की आस्था का पूरा सम्मान हो, लेकिन सुरक्षा और कानून से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मेरठ ज़ोन बना सुरक्षा का महा-केंद्र, करोड़ों श्रद्धालुओं की निगरानी
हर साल सावन के महीने में करोड़ों कावड़िए गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार और अन्य धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। इसके बाद श्रद्धालु पैदल, मोटरसाइकिल, डाक कावड़ और बड़ी-बड़ी झांकियों के साथ अपने गंतव्यों की ओर बढ़ते हैं। इस पूरी यात्रा का सबसे बड़ा दबाव उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़ोन पर पड़ता है, जहां से होकर लाखों-करोड़ों शिवभक्त गुजरते हैं। यही वजह है कि इस बार मेरठ ज़ोन को सुरक्षा का मुख्य केंद्र बनाया गया है। पिछले वर्षों में डीजे बजाने, अत्यधिक ऊंची झांकियों, हथियारों के प्रदर्शन और ट्रैफिक अव्यवस्था को लेकर हुए विवादों से सबक लेते हुए प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी की गई आधिकारिक एडवाइजरी को यूपी पुलिस भी पूरी कड़ाई से धरातल पर उतारेगी।
त्रिशूल, भाले और धारदार हथियारों पर पूरी तरह पाबंदी
मेरठ ज़ोन के एडीजी भानु भास्कर ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि उत्तराखंड सरकार की गाइडलाइन यूपी में भी पूरी तरह प्रभावी रहेगी। यात्रा के दौरान किसी भी श्रद्धालु को त्रिशूल, भाले, तलवार या कोई भी नुकीला और धारदार हथियार साथ लेकर चलने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा, हुड़दंग मचाने वाले जुगाड़ वाहनों, तेज आवाज निकालने वाले रेट्रो साइलेंसर और नशे में यात्रा करने वाले लोगों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
कावड़ की ऊंचाई तय, 10 फीट से ऊंचे वाहनों को नो-एंट्री
रास्ते में आने वाले बिजली के तारों और किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रिकल एक्सीडेंट (current लगने के हादसों) से कावड़ियों को बचाने के लिए प्रशासन ने ऊंचाई की एक सख्त सीमा तय कर दी है। इसके तहत मानकों का निर्धारण कुछ इस प्रकार किया गया है:
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पैदल कावड़: अधिकतम 6 फीट ऊंची हो सकती है।
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झांकी और डाक कावड़: अधिकतम 10 फीट तक की अनुमति होगी।
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सख्त निर्देश: 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाली किसी भी कावड़ या झांकी को उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति कतई नहीं दी जाएगी।
ड्रोन और सीसीटीवी से होगी चप्पे-चप्पे की निगरानी, ट्रैफिक प्लान तैयार
योगी सरकार ने सुरक्षा और सुगम यातायात के लिए संवेदनशील मार्गों पर विशेष निगरानी व्यवस्था की है। पूरे यात्रा मार्ग को सीसीटीवी (CCTV) नेटवर्क और हाई-टेक ड्रोन कैमरों से कवर किया जा रहा है। भारी भीड़ को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ क्विक रिस्पांस टीम (QRT) भी तैनात रहेगी। आम जनता को कोई परेशानी न हो, इसके लिए मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत, गाजियाबाद और नोएडा जैसे पश्चिमी यूपी के जिलों में विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। इसके अलावा, ट्रेनों की छतों पर बैठकर यात्रा करने, बसों में लटककर सफर करने या सड़कों पर स्टंटबाजी करने वालों के खिलाफ रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस को तुरंत धरपकड़ के आदेश दिए गए हैं।
कावड़ यात्रियों के लिए जरूरी चेकलिस्ट: इन 6 बातों का रखें ध्यान
प्रशासन ने कावड़ लेकर चलने वाले सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुखद बनाने के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करें:
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अपना वैध पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी आदि) हमेशा अपने साथ रखें।
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प्रशासन द्वारा निर्धारित और तय किए गए रास्तों का ही पालन करें।
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किसी भी प्रकार के नशे और मादक पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूर रहें।
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यात्रा में किसी भी तरह का पारंपरिक या आधुनिक हथियार शामिल न करें।
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यातायात (ट्रैफिक) नियमों और गति सीमा का पूरी तरह सम्मान करें।
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ट्रेन, बस या अन्य वाहनों में खतरनाक तरीके से सफर करने से बचें।
करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सैकड़ों किलोमीटर लंबे मार्ग का प्रबंधन करना यूपी सरकार के लिए सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा है। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार उच्च स्तरीय बैठकें कर इन तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इतने कड़े निर्देशों और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस साल की कावड़ यात्रा कितनी शांतिपूर्ण और सफल रहती है।

