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4 दशक से नहीं खुला सपा का खाता, अब इस सीट पर अखिलेश की नजर; जानें पूरा गेमप्लान

उत्तर प्रदेश के सियासी संग्राम में कुछ सीटें ऐसी होती हैं जहां राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंकने के बाद भी जीत का स्वाद नहीं चख पाते। फतेहपुर जिले की बिंदकी विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के लिए ऐसा ही एक अनसुलझा राजनीतिक चक्रव्यूह बनी हुई है।

सूबे में तीन बार सरकार बनाने के बावजूद सपा आज तक इस सीट पर अपना खाता नहीं खोल सकी है। कांग्रेस, जनता दल, लोकदल, बसपा, भाजपा और अपना दल (एस) जैसे दलों को बारी-बारी से मौका देने वाली बिंदकी की जनता ने हर बार सपा को सत्ता से दूर रखा। अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव ने इस ‘अनलकी’ सीट को फतह करने के लिए जमीनी स्तर पर चक्रव्यूह रचना शुरू कर दिया है।

आजादी के बाद से अब तक का सियासी इतिहास: हर दल को मिला मौका, पर सपा रही दूर

बिंदकी विधानसभा का राजनीतिक इतिहास बेहद विविधता भरा और दिलचस्प रहा है। 1960 और 70 के दशक में यह क्षेत्र पूरी तरह कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करता था, जहां जगन्नाथ सिंह और रमाकांत द्विवेदी जैसे कद्दावर चेहरे जीत दर्ज करते रहे। इसके बाद जनता दल और लोकदल के दौर ने यहां अपनी जमीन तैयार की। 1993 के बाद से मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सिमट गया। बीजेपी के अमरजीत सिंह ने यहां से दो बार परचम लहराया, तो वहीं बसपा के सुखदेव प्रसाद वर्मा ने 2007 और 2012 में लगातार दो बार ऐतिहासिक जीत हासिल की। 2017 की मोदी लहर में बीजेपी के करण सिंह पटेल ने सपा के रामेश्वर दयाल को रिकॉर्ड 56,000 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी।

2022 का नजदीकी मुकाबला और सपा के लिए उम्मीद की किरण

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बिंदकी सीट पर समीकरण पूरी तरह बदलते दिखे। भाजपा गठबंधन के तहत यह सीट अपना दल (सोनेलाल) के खाते में गई और जय कुमार सिंह जैकी विधायक चुने गए। हालांकि, सपा प्रत्याशी रामेश्वर दयाल उर्फ दयालु उमर ने उन्हें बेहद कड़ी टक्कर दी। जय कुमार सिंह जैकी केवल 3,797 वोटों के मामूली अंतर से ही जीत दर्ज कर सके। सपा के लिए यह करीबी हार एक बड़ा सकारात्मक संकेत बनकर उभरी, क्योंकि पहली बार पार्टी यहां जीत की दहलीज तक पहुंची थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में फतेहपुर संसदीय सीट पर सपा के कब्जे ने बिंदकी क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर नए राजनीतिक आत्मविश्वास का संचार किया।

अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला और सांसद नरेश उत्तम पटेल की सक्रियता

2027 के चुनाव को साधने के लिए अखिलेश यादव ने इस क्षेत्र में ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को धार देना शुरू कर दिया है। इस रणनीति की कमान फतेहपुर से सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल के हाथों में है, जो खुद बिंदकी तहसील से गहरा जुड़ाव रखते हैं। सांसद नरेश उत्तम पटेल ने बिंदकी में अपना जनसंपर्क कार्यालय स्थापित कर कार्यकर्ताओं के साथ नियमित बैठकों का सिलसिला तेज कर दिया है। सपा का पूरा जोर बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट करने, स्थानीय मजबूत चेहरों को आगे बढ़ाने और जातीय गोलबंदी को अपने पक्ष में मोड़ने पर है, ताकि जीत के बेहद करीब पहुंचकर फिसलने वाली साइकिल इस बार विधानसभा की चौखट पार कर सके।

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अपना दल (एस) के गढ़ में 2027 की घेराबंदी: क्या टूटेगा चार दशक पुराना तिलिस्म?

मौजूदा समय में यह सीट एनडीए गठबंधन के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के पास है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय या आमने-सामने का रहने के पूरे आसार हैं। 2022 में मिले भारी वोट शेयर और लोकसभा चुनाव के बदले मिजाज के दम पर सपा इस बार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती। बिंदकी अब महज एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि पूरे फतेहपुर जिले के राजनीतिक झुकाव का थर्मामीटर बन चुकी है। 1993 से 2017 के स्वर्णिम काल में भी जिस सीट पर सपा का विधायक नहीं बन सका, क्या वहां अखिलेश यादव की नई रणनीति काम आएगी या बिंदकी की जनता एक बार फिर इतिहास दोहराएगी, इस पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी हैं।

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