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योगी या अखिलेश, शामली-कैराना की जनता ने बताया 2027 में क्या है सबसे बड़ा मुद्दा

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक केंद्र शामली और कैराना में सियासी तपिश अभी से महसूस की जा रही है। बाजार की चौपालों से लेकर चाय की थड़ियों तक जनता के बीच आगामी चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ग्राउंड जीरो पर व्यापारियों, युवाओं और आम नागरिकों ने विकास, सामाजिक सौहार्द और बुनियादी सुविधाओं को लेकर खुलकर अपने विचार साझा किए।

भाईचारा, शिक्षा और सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इलाका हमेशा से आपसी मिठास और भाईचारे के लिए जाना जाता है। लोगों का स्पष्ट मानना है कि सत्ता में कोई भी दल या नेता आए—चाहे योगी हों या अखिलेश—हिंदू-मुस्लिम सौहार्द पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। नागरिकों का कहना है कि कानून व्यवस्था का पालन सख्ती से हो, लेकिन किसी भी सूरत में धार्मिक स्थलों को लेकर ऐसा माहौल न बने जिससे टकराव की स्थिति पैदा हो। जनता को सुरक्षित माहौल के साथ-साथ बेहतर शिक्षा और सस्ती चिकित्सा सुविधाएं चाहिए।

सड़कों और नौकरियों पर युवाओं का गुस्सा

क्षेत्र के युवाओं में बेरोजगारी को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय युवा वसंत के अनुसार, पिछले कई वर्षों से फार्मेसी सहित विभिन्न विभागों में सरकारी भर्तियां नहीं निकली हैं, जिससे पढ़े-लिखे नौजवान दर-दर भटक रहे हैं। युवाओं का आरोप है कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य और सड़कों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। महंगाई के इस दौर में यदि युवाओं के पास रोजगार नहीं होगा, तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा। युवाओं का कहना है कि 2027 में वही पार्टी उनका भरोसा जीत पाएगी जो ठोस रोजगार नीति लेकर आएगी।

व्यापारियों का दर्द: न पेंशन, न सुरक्षा बीमा

व्यापारियों की ओर से संजय राजा और संदीप शर्मा जैसे दुकानदारों ने सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखीं। उनका कहना है कि 12-12 घंटे कड़ी मेहनत करने के बावजूद छोटे व्यापारियों के लिए कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है। 60 साल की उम्र के बाद व्यापारियों के लिए पेंशन योजना, दुकान और माल के लिए दुर्घटना बीमा सुरक्षा बेहद जरूरी है। व्यापारियों के अनुसार, जब तक सरकार छोटे कारोबारियों के भविष्य को सुरक्षित नहीं करेगी, तब तक जमीनी व्यापार को गति मिलना कठिन है।

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महंगाई और हर 5 साल पर सत्ता परिवर्तन की मांग

बाजार में खरीदारी और आम जिंदगी पर महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। गैस, तेल, चीनी जैसी रोजमर्रा की चीजों के दामों में उछाल से आम आदमी का बजट बिगड़ चुका है। कई स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि लोकतंत्र में हर पांच साल पर सत्ता परिवर्तन होना चाहिए, ताकि सरकारों में जवाबदेही बनी रहे और जनता के काम रुकें नहीं। फिलहाल शामली और कैराना की जनता नेताओं के वादों और जमीनी हकीकत को तौल रही है, जिसका असली फैसला 2027 के जनादेश में दिखेगा।

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