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‘साइकिल’ की सवारी करने को तैयार कांग्रेस, UP में BJP को घेरने के लिए विपक्ष का मास्टरस्ट्रोक

दिल्ली की सड़कों पर चुनावी धांधली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मोर्चा खोले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के भीतर उत्तर प्रदेश को लेकर सियासी बिसात बिछाई जा चुकी है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव एक तरफ संस्थाओं के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ अंदरखाने यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। गठबंधन की सियासत में सबसे पेचीदा माने जाने वाले सीट बंटवारे की गुत्थी को दोनों दलों ने समय से पहले सुलझाने का नया फॉर्मूला तैयार कर लिया है।

कुछ सीटों पर सपा की ‘साइकिल’ की सवारी करेंगे कांग्रेसी दावेदार

अंदरूनी सूत्रों और सियासी रिपोर्टों के मुताबिक, इस नए चुनावी फॉर्मूले में एक दिलचस्प रणनीतिक प्रयोग देखने को मिल सकता है। कांग्रेस के कई मजबूत व जिताऊ दावेदारों को सीधे समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह यानी ‘साइकिल’ पर मैदान में उतारा जा सकता है। ऐसा खासकर उन परंपरागत सीटों पर किया जाएगा जहां कांग्रेस का स्थानीय नेता तो कद्दावर है, लेकिन जमीन पर सपा का कैडर ज्यादा मजबूत स्थिति में है। इस रणनीति का मुख्य मकसद विपक्षी मतों के बिखराव को पूरी तरह रोकना और जीत की संभावनाओं को अधिकतम स्तर तक पहुंचाना है।

‘बड़ा भाई’ बनेगी सपा, 2017 और 2024 के अनुभवों से तय हुआ आधार

उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों पर होने वाले सियासी संग्राम में समाजवादी पार्टी ‘बड़े भाई’ और कांग्रेस ‘छोटे भाई’ की भूमिका में नजर आएगी। इतिहास पर नजर डालें तो साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल साथ आए थे, जहां सपा ने 298 और कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा की प्रचंड लहर के आगे यह प्रयोग विफल रहा। 2022 में सपा ने छोटे दलों के साथ तालमेल बिठाया, जिससे सीटें तो बढ़ीं मगर सत्ता हाथ नहीं आई।

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वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ जाने का राजनीतिक नुकसान अखिलेश यादव को झेलना पड़ा था। इसके विपरीत, 2024 के आम चुनाव में सपा-कांग्रेस की जुगलबंदी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और भाजपा को यूपी में तगड़ा झटका देकर विपक्षी खेमे का नायक बना दिया। इसी आत्मविश्वास को दोनों दल अब 2027 के विधानसभा रण में भुनाना चाहते हैं।

परंपरागत सीटों पर कोई समझौता नहीं, दिल्ली में जल्द होगी औपचारिक मुहर

सीट शेयरिंग के तय फॉर्मूले के मुताबिक, समाजवादी पार्टी अपनी उन परंपरागत सीटों पर कोई समझौता नहीं करेगी जहां उसने 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। सपा नेतृत्व ने इन मजबूत हलकों में अपने संभावित उम्मीदवारों को पहले ही संकेत देकर जमीनी स्तर पर चुनाव प्रचार तेज करने के निर्देश दे दिए हैं। वहीं, कांग्रेस को उन क्षेत्रों में प्राथमिकता दी जाएगी जहां उसका ऐतिहासिक प्रभाव रहा है और हालिया चुनावों में उसका वोट शेयर सुधरा है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच पहले दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और बहुत जल्द दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद आधिकारिक सीट संख्या की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।

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