अखिलेश यादव की नाक टेढ़ी कैसे हुई, क्यों नहीं करवाया इलाजा; खुद किया खुलासा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘टीपू’ के नाम से मशहूर अखिलेश अपनी हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते हैं। मगर क्या आपने कभी गौर किया है कि अखिलेश यादव की नाक थोड़ी टेढ़ी क्यों है? सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की कहानियां तैरती रहती हैं। कोई इसे खेल की चोट बताता है, तो कोई इसे अनुवांशिक यानी जेनेटिक मानता है। हाल ही में उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से सुर्खियों में है जिसमें उन्होंने खुद इस ‘राज’ से पर्दा उठाया है।
जब डॉक्टर ने पूछा- ‘शादी हो गई क्या?’
ये किस्सा उस समय का है जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे उनकी नाक की बनावट पर सवाल हुआ, तो उन्होंने बेहद दिलचस्प जवाब दिया। अखिलेश ने बताया कि उन्हें फुटबॉल खेलने का जबरदस्त जुनून रहा है। इसी खेल के दौरान एक बार उन्हें गंभीर चोट लगी और उनकी नाक टूट गई।
जब उनके पिता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव उन्हें मशहूर डॉक्टर कक्कड़ के पास ले गए तो डॉक्टर ने नाक की जांच करने के बाद एक ऐसा सवाल पूछा जिसे सुनकर सब दंग रह गए। डॉक्टर ने पूछा कि क्या तुम्हारी शादी हो गई है? अखिलेश ने जवाब दिया कि हां हो गई है। इस पर डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा कि फिर तो अब इसे ठीक कराने की कोई जरूरत ही नहीं है।
क्या विरासत में मिली है टेढ़ी नाक
सपा प्रमुख ने यह बात एक ठहाके के साथ सुनाई थी। हालांकि, राजनीतिक जानकार और उनकी पुरानी तस्वीरों पर नजर रखने वाले लोग इसे सिर्फ एक मजाकिया अंदाज मानते हैं। असलियत की परतें टटोलें तो पता चलता है कि अखिलेश की यह नाक शायद उन्हें विरासत में मिली है। अगर आप मुलायम सिंह यादव या शिवपाल सिंह यादव की पुरानी तस्वीरें देखेंगे, तो पाएंगे कि उनके परिवार में नाक की यह बनावट जेनेटिक है।
अखिलेश की शादी के वक्त की तस्वीरें भी यही गवाही देती हैं कि उनकी नाक तब भी वैसी ही थी जैसी आज है। दरअसल, उस समय उन्होंने यह बयान उन लोगों पर तंज कसने के लिए दिया था जो उनकी नाक को लेकर तरह-तरह की मनगढ़ंत कहानियां बनाते थे।
सियासी मैदान में अखिलेश की नई तैयारी
आज भले ही उनकी नाक का यह पुराना किस्सा वायरल हो रहा हो, मगर अखिलेश यादव का पूरा ध्यान इस वक्त उत्तर प्रदेश की सत्ता के ‘नथुने’ पकड़ने पर है। 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले ने जिस तरह से कमाल दिखाया, अखिलेश उसी रणनीति को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए धार दे रहे हैं ।
माघ मेले में मुलायम सिंह की प्रतिमा पर गहराया विवाद, आवंटन रद्द करने की धमकी
आने वाले पंचायत चुनाव और फिर विधानसभा की जंग के लिए समाजवादी पार्टी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को लामबंद कर रही है। एक तरफ जहां उनके पुराने वीडियो चर्चा बटोर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अखिलेश खुद को एक गंभीर और परिपक्व नेता के रूप में पेश करते हुए सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं ।

