कुंडा विधानसभा 2027: अखिलेश यादव ने कर दिया खेल, तो क्या ज्योत्सना सिंह राजा भईया को कर पाएंगी फेल
kunda politics 2026: कुंडा की सियासत में राजा भैया सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि लोगों के लिए भरोसे और ताकत का नाम है। कई दशकों से उनका दबदबा ऐसा रहा कि चुनाव में उनका मुकाबला करना किसी दल के भी प्रत्याशी के लिए आसान नहीं होता। वे अपने इलाके के लोगों के बीच हमेशा जुड़े रहते हैं और उनकी समस्याओं को समझते हैं। चाहने वाले उन्हें ईमानदार और साहसी मानते हैं। सरकारें बदलती रही मगर कुंडा में राजा भैया की सियासी पकड़ कभी कमजोर नहीं हुई।
यही कारण है कि जब भी कुंडा की सियासत की बात होती है तो सबसे पहले राजा भैया का नाम ही याद आता है। मगर इस बार फिर यूपी की सियासत में कुंडा का नाम चर्चा के केंद्र में है।
इस बार वजह है समाजवादी पार्टी की नई शेरनी जो सीधे तौर पर राजा भैया के मजबूत दबदबे को चुनौती देने की कोशिश कर रही हैं। कौन है वह सपा की नई शेरनी जो आगे चलकर राजा भैया के अभेद किले में सेंधमारी कर सकती हैं? सब कुछ आपको बताएंगे इस खबर में।
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यूपी के विधानसभा चुनाव में अब महज लगभग एक से डेढ़ साल का समय बचा है। ऐसे में सभी कुनबे अभी से विधानसभा सीटों पर मजबूत दावेदारों के नाम पर मंथन करना शुरू कर चुके हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी आए दिन अलग-अलग जिलों के पदाधिकारी और विधायकों के साथ माहौल समझने के लिए बैठकें ले रहे हैं। इस बीच सूत्रों के मुताबिक मिली जानकारी के अनुसार प्रतापगढ़ में राजा भैया के सामने समाजवादी पार्टी इस बार कुंडा से युवा महिला चेहरा ज्योतना सिंह को टिकट दे सकती है। कुंडा की राजनीति में अब हलचल बढ़ने लगी है। पार्टी के भीतर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।
सूत्रों की मानें तो अखिलेश की पार्टी इस बार ऐसी चाल चलने जा रही है जो महिला और युवा मतदाताओं के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। इसी रणनीति की तैयारी में ज्योतना सिंह को सामने लाने की बात हो रही है।
सपा सांसद प्रिया सरोज की करीबी हैं ज्योतना सिंह
ज्योत्सना सिंह जिन्हें पार्टी की शेरनी कहा जाता है सिर्फ अपनी राजनीतिक काबिलियत के लिए ही नहीं बल्कि सपा सांसद प्रिया सरोज के साथ उनके घनिष्ठ और पारिवारिक रिश्तों के चलते भी अहम मानी जा रही हैं। दोनों परिवार लंबे समय से समाजवादी पार्टी की मजबूती का हिस्सा रहे हैं और यही आधार माना जा रहा है कि संगठनात्मक समर्थन के जरिए कुंडा के राजा भैया के किले में सेंधमारी हो सकती है।
प्रतापगढ़ की ज्योत्सना सिंह क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। शिक्षा और सामाजिक सरोकार से शुरू हुआ उनका सफर अब राजनीतिक भूमिका तक पहुंच चुका है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और कोचिंग राजस्थान के एलएन कोटा से पूरी की और बाद में एमटी यूनिवर्सिटी लखनऊ से पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई की। सियासत में उनकी सक्रियता 2022 से प्रतापगढ़ में नजर आ रही है।
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हालांकि समाजवादी पार्टी से उनका जुड़ाव 2016 से है। पारिवारिक रूप से भी उनका राजनीतिक संबंध गहरा है। उनके पिता राजकुमार सिंह प्रतापगढ़ की सदर सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख रहे हैं और सपा उम्मीदवार के रूप में नगर पालिका चुनाव भी लड़े हैं। उनकी माता भी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं और वर्तमान में समाजवादी पार्टी महिला सभा प्रतापगढ़ की जिला अध्यक्ष हैं।
सिंह खासकर महिला और युवा मतदाताओं के बीच पहचान बना रही हैं। सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव इन दिनों पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। जिसमें जमीनी हालात, संगठन की स्थिति और संभावित प्रत्याशियों पर चर्चा होती है। मंगलवार को हुई बैठक में भी कुंडा सीट पर बात हुई जहां इशारों में ज्योत्सना सिंह के नाम पर सहमति जताई गई है। वहीं अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई।
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आपको बता दें कि ये पहला मौका नहीं है जब सपा प्रमुख ने संकेतात्मक संदेश दिए हो। इससे पहले मेहनौन सीट की एक युवा महिला कार्यकर्ता को मतदाता सूची में नाम जोड़वाने की सलाह दी गई थी। यदि सपा औपचारिक रूप से जोशना सिंह को कुंडा से उतारती है तो यह मुकाबला काफी रोमांचक साबित हो सकता है। युवा और महिला चेहरे के माध्यम से राजा भैया के किले में सेंध लगाने की ये सपा की रणनीति राजनीतिक प्रयोग के तौर पर देखी जा रही है।
यदि समाजवादी पार्टी औपचारिक रूप से ज्योत्सना सिंह को कुंडा से उतारती है तो ये मुकाबला राजा भैया के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक टेस्ट साबित हो सकता है। युवा और महिला चेहरे के जरिए सपा का ये रणनीतिक कदम ना सिर्फ कुंडा की सियासत में नया रंग भर सकता है बल्कि भविष्य के चुनावी समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकता है। सभी की नजरें अब अगले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।

