जानिए कौन हैं बी. सुदर्शन रेड्डी जिन्हें INDIA गठबंधन ने वाइस प्रेसिडेंट पद का बनाया उम्मीदवार
भारतीय राजनीति में आज एक और बड़ा मोड़ देखने को मिला, जब विपक्षी गठबंधन INDIA ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा कर दी। इस बार सियासी चर्चा में हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी (Sudershan Reddy) जिनका नाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष की ओर से घोषित किया है।
इस एलान के साथ विपक्ष ने संकेत दे दिया है कि आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव महज एक पद की लड़ाई नहीं बल्कि सिद्धांतों और संवैधानिक मूल्यों की जंग बनने वाली है।
क्या है इस फैसले का संदेश
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान में कहा कि रेड्डी हमेशा वंचितों और गरीबों की आवाज़ बने रहे हैं और उन्होंने अपने न्यायिक जीवन में संविधान की गरिमा बनाए रखी। इसीलिए उन्हें विपक्षी दलों की सर्वसम्मति से यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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खरगे ने यह भी साफ किया कि यह लड़ाई विचारधाराओं की है और पूरे INDIA गठबंधन ने एकमत से इस नाम का समर्थन किया है। ऐसे समय में जब देश में कई संवैधानिक संस्थाएं राजनीतिक बहस का केंद्र बनी हुई हैं, इस तरह का नाम सामने लाना अपने आप में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
बी. सुदर्शन रेड्डी (Sudershan Reddy) का रहा सादगी से भरा सफर
8 जुलाई 1946 को जन्मे बी. सुदर्शन रेड्डी का सफर किसी प्रेरणादायक कथा से कम नहीं। आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के एक छोटे से गांव अकुला मायलारम में एक किसान परिवार में जन्मे रेड्डी ने अपनी मेहनत के दम पर न केवल उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश का पद प्राप्त किया बल्कि अब देश के उप-राष्ट्रपति पद के लिए नामित हो चुके हैं।
रेड्डी ने BA और LLB की डिग्री प्राप्त करने के बाद सिविल और संवैधानिक मामलों में वकालत शुरू की। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध सीनियर वकील के. प्रताप रेड्डी के साथ कार्य किया। फिर 1988 में उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का गवर्नमेंट प्लीडर नियुक्त किया गया और बाद में केंद्र सरकार के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसल बने।
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1993 में वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बने और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के लीगल एडवाइज़र की भूमिका भी निभाई।
न्यायपालिका में योगदान
उनकी न्यायिक पारी 2 मई 1995 को शुरू हुई, जब उन्हें आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का जज बनाया गया। इसके बाद 5 दिसंबर 2005 को गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और फिर सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाली। 2011 में वे रिटायर हुए।
रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। मार्च 2013 में उन्हें गोवा का पहला लोकायुक्त नियुक्त किया गया। हालांकि कुछ महीनों बाद अक्टूबर 2013 में उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया।
चुनावी रण में नया अध्याय (Presidential Candidate)
विपक्ष की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब 17 अगस्त को एनडीए की ओर से तमिलनाडु के सी. पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। अब दोनों खेमों की रणनीतियाँ और विचारधाराएँ आमने-सामने हैं।
रेड्डी का नाम विपक्ष की ओर से सामने लाकर यह जताने की कोशिश की गई है कि संविधान, न्याय और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए विपक्ष एकजुट है। साथ ही यह भी स्पष्ट संकेत है कि वे सत्ता की राजनीति नहीं मूल्य आधारित नेतृत्व को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

