महाराष्ट्र निकाय चुनाव क्यों अहम रहे और नतीजों ने क्या संदेश दिया, जानें कहां चूका विपक्ष
BMC Election 2026: महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में महायुति गठबंधन को पटकनी देने में महाविकास अघाड़ी गठबंधन असफल रहा। चुनाव नतीजों ने जहां महायुति को ‘फील गुड’ कराया, वहीं महाविकास आघाड़ी को जोर का झटका लगा है। 29 नगर निगमों पर वर्चस्व कायम करने की यह सियासी जंग काफी दिलचस्प रही। निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सबसे ताकतवर बनकर उभरना विपक्ष के लिए नई टेंशन है।
उम्मीदों पर पानी फिरा पानी
निकाय चुनाव में महायुति गठबंधन की तरफ से भाजपा, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) तथा महाविकास अघाड़ी गठबंधन से कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) व एनसीपी (शरद पवार) ने किस्मत आजमाई थी। महाराष्ट्र में फिलहाल महायुति गठबंधन की सरकार चल रही है। निकाय चुनाव में सत्ता पक्ष को मात देने के मकसद से महाविकास अघाड़ी गुट ने जबरदस्त तैयारियां की थी। प्रभावी रणनीति के तहत चुनाव मैदान में उम्मीदवारों को उतारा गया।
इसके बावजूद महाविकास की उम्मीदों पर पानी फिर गया। महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले बड़ा सियासी घटनाक्रम भी देखने को मिला था। जब ठाकरे बंधुओं ने आपसी मनमुटाव को भुलाकर एक होने का निर्णय लिया था। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को एक मंच पर देखकर उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। हालांकि ठाकरे ब्रदर्स की एकजुटता मतदाताओं को रिझाने में कामयाब नहीं हो पाई।
महाराष्ट्र की सियासत में एक समय वह था, जब शिवसेना को सबसे अधिक मजबूत माना जाता था। शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का अपना अलग रूतबा था। बालासाहब के निधन के बाद शिवसेना में ऐसी टूट पड़ी कि उद्धब ठाकरे का सियासी रूतबा भी कमजोर होता चला गया। उद्धब के मुकाबले शिंदे गुट आमजन को प्रभावित करने में ज्यादा सफल रहा है। महाराष्ट्र सरकार में एकनाथ शिंदे वर्तमान में डिप्टी सीएम हैं। इसके पहले वह सीएम की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। शिवसेना की भांति एनसीपी भी टूट के उपरांत उबर नहीं पाई है।
एनसीपी चमक क्यों हुई गायब
शरद पवार और अजित पवार की राहें जुदा होने से एनसीपी की चमक गायब हो चुकी है। अजित पवार आज अलग एनसीपी बनाकर महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं। निकाय चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र सरकार के कामकाज पर भी सफलता की मुहर लगाई है। एशिया की सबसे अमीर मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) से पहली बार ठाकरे बंधुओं का वर्चस्व खत्म होना राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर रहा है।
बीएमसी पर ठाकरे परिवार ने लंबे समय तक पकड़ बनाकर रखी थी, मगर समय के साथ सब कुछ बदल चुका है। बीएमसी में पहली बार भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आ चुकी है। यानी मुंबई की अगली मेयर भाजपा से होने की प्रबल संभावना है। निकाय चुनाव के परिणाम विपक्ष के लिए बड़ा सबक हैं। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव), मनसे व एनसीपी (शरद) को अपनी कमियों पर आत्ममंथन करने की जरूरत है।
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ये रिजल्ट (Maharashtra Municipal Elections 2026) निश्चित रूप से राहुल गांधी और शरद पवार जैसे दिग्गज नेताओं की बेचैनी बढ़ाने वाला है। इसके अलावा सीएम देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे का सियासी कद और बढ़ चुका है। माना जाता है कि जिस राज्य में जिस दल की सरकार होती है, वहां के निकायों पर भी उसी सरकार का वर्चस्व देखने को मिलता है। हालांकि महाराष्ट्र निकाय चुनाव के परिणाम इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य में भाजपा के कामकाज को अधिक पसंद किया जा रहा है। भाजपा की यह बढ़त नई दिल्ली को भी खुशी प्रदान करने वाली है।

