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india usa trade deal: ट्रंप को खुश करने के लिए किसानों की कुर्बानी, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

india usa trade deal: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते ने राजनीति में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर सरकार इसे एक अहम रणनीतिक साझेदारी मानती है। वहीं विपक्ष इसे भारत के लिए आत्मसमर्पण की संज्ञा दे रहा है। राहुल गांधी जो हमेशा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं, इस समझौते को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि यह डील भारत को कहीं न कहीं नुकसान पहुँचाने वाली है, खासकर किसानों को।

क्या ये डील किसानों के हितों के खिलाफ है?

राहुल गांधी ने इस डील के प्रकरण में कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर इल्जाम लगाया कि भारत ने अमेरिका को अधिक दिया और बदले में उसे बहुत कम हासिल हुआ। उनका मानना है कि किसानों की कुर्बानी देकर भारत ने इस डील की कीमत चुकाई है। खासतौर से उन्होंने जीएम सोया तेल और अमेरिकी मक्के के आयात को लेकर चिंता जताई है।

उनका कहना है कि इससे भारतीय किसानों खासकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के सोया किसानों को नुकसान हो सकता है। राहुल गांधी के अनुसार, सस्ता आयात भारतीय कृषि व्यवस्था को नुकसान पहुँचाएगा और किसानों को अपनी उपज की कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ेगा।

गांधी ने तेल आयात के संदर्भ में भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। भारत जो दुनिया का एक बड़ा तेल आयातक देश है, उसके लिए क्या यह समझौता अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता करने जैसा नहीं है? राहुल गांधी का तर्क है कि अमेरिका के साथ तेल आयात के निर्णयों में भूमिका देकर भारत ने अपनी ऊर्जा नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अगर भविष्य में अमेरिका के साथ आपूर्ति के रास्ते सीमित होते हैं तो क्या इससे तेल के मूल्य में अस्थिरता बढ़ेगी?

एक और अहम पहलू जिसे राहुल गांधी ने उठाया, वो है डिजिटल संप्रभुता। उनका कहना है कि अगर भारत ने अमेरिकी कंपनियों को डिजिटल व्यापार और डाटा के क्षेत्र में अधिक रियायतें दीं, तो इसका असर भारतीय डाटा सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस तरह की रियायतें भारत की डिजिटल स्वतंत्रता को कमजोर कर सकती हैं? क्या हम अमेरिका के दबाव में आकर अपने डाटा नियंत्रण को खो सकते हैं?

जानें डील पर सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार इस समझौते को लेकर आश्वस्त है कि यह भारत के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ लेकर आएगा। सरकार का मानना है कि अमेरिका से मजबूत व्यापारिक संबंध भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त करेंगे। इससे नए निर्यात अवसर, तकनीकी विकास और ग्लोबल फूड चेन में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

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सरकार का कहना है कि इस प्रकार के व्यापार समझौतों में दोनों देशों को कुछ न कुछ फायदा होता है और ये सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, राहुल गांधी इसे एक प्रकार का आत्मसमर्पण मानते हैं, जिसे सरकार “रणनीतिक साझेदारी” के रूप में पेश कर रही है।

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