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यूपी में गैस की किल्लत या ब्लैक मार्केटिंग, अखिलेश यादव ने सरकार से पूछे ये 3 तीखे सवाल

Keshav Maurya vs Akhilesh Yadav: देश के कई हिस्सों में रसोई गैस को लेकर परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अब पारंपरिक तरीकों की ओर लौटने लगे हैं। कई परिवारों ने मिट्टी के चूल्हे मंगवा लिए हैं और लकड़ी या कोयले से खाना बनाने की तैयारी कर ली है। लोगों का कहना है कि अगर यह स्थिति एक-दो महीने और बनी रही तो मजबूरी में सभी को यही तरीका अपनाना पड़ेगा।

छोटे कारोबारियों और छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

इस संकट का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर दिख रहा है जो रोज कमाकर खाते हैं। ठेले पर चाट बेचने वाले, मोमोज या नूडल्स बनाने वाले और छोटे दुकानदार गैस पर निर्भर हैं। गैस की अनिश्चितता ने उनके काम को सीधे प्रभावित किया है। छात्रों और गरीब वर्ग के लिए भी यह स्थिति मुश्किल बनती जा रही है क्योंकि उनके पास वैकल्पिक साधन कम हैं।

बढ़ती परेशानी के बीच सियासत तेज

गैस की किल्लत के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तंज कसते हुए कहा कि अगर किसी को सिलेंडर नहीं मिल रहा है तो वे सूचना दें, मदद पहुंचाई जाएगी। इस पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए कहा कि जरूरत है कि सहायता पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हो। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसे काम के लिए एक अलग जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

सरकार पर उठ रहे सवाल

अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं, फिर भी दावा किया जाता है कि कोई कमी नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर आपूर्ति पर्याप्त है तो सिलेंडर का वजन कम क्यों किया गया। उनके अनुसार पहले भी जरूरी चीजों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे और अब गैस को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

महंगाई और ब्लैक मार्केटिंग की चिंता

लोगों का कहना है कि गैस ब्लैक में महंगे दामों पर बिक रही है। इससे आम आदमी की परेशानी और बढ़ गई है। कई परिवार अब सीमित संसाधनों में गुजारा करने को मजबूर हैं। खाना बनाने जैसी बुनियादी जरूरत भी अब चुनौती बनती जा रही है।

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आगे क्या होगा

गैस संकट और इस पर हो रही राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल गरमा दिया है। एक ओर जनता राहत की उम्मीद कर रही है, वहीं दूसरी ओर नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस समस्या का समाधान कैसे निकालती है और लोगों को कब तक राहत मिलती है।

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