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Krishna janmashtami 2025: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Krishna janmashtami 2025: जन्माष्टमी का त्यौहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। इसे कृष्ण जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार न केवल अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है बल्कि प्रेम, भक्ति और विश्वास का संदेश भी देता है। ये त्यौहार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को पड़ रही है। इस दिन (Krishna janmashtami 2025) भक्त व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में कृष्ण की पूजा करके अपना व्रत खोलते हैं। कान्हा जी का पूजन मुहूर्त 17 अगस्त की अर्धरात्रि 12 बजकर 4 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जिसके लिए 43 मिनट का वक्त मिलेगा। धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। जिनका पालन करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करें और क्या न करें।

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जन्माष्टमी व्रत में क्या करें और क्या न करें? (Janmashtami Fasting Do and Donts)

  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और मन ही मन व्रत का संकल्प लें।
  • पूरे दिन संयम और पवित्रता बनाए रखें।
  • जो लोग फलाहारी व्रत रखते हैं, वे इस दिन फल, दूध, दही, साबूदाना, गेहूँ के आटे से बने खाद्य पदार्थ आदि खा सकते हैं।
  • वहीं, जो लोग निर्जल व्रत रखते हैं, उन्हें इस दिन कोई अन्य भोजन और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • उन्हें दिन में सोने से भी बचना चाहिए।
  • व्रत के दौरान अन्न और नमक का सेवन न करें। तामसिक भोजन से भी दूर रहें।
  • श्री कृष्ण के जन्म के बाद रात 12 बजे के बाद ही व्रत खोलें।
  • सुबह और शाम श्री कृष्ण की पूजा करें।
  • इस दिन काले वस्त्र न पहनें और पूजा में काली वस्तुओं का प्रयोग न करें।
  • पारण करते समय सबसे पहले श्री कृष्ण को भोग लगाएँ और उसके बाद ही स्वयं ग्रहण करें।

जन्माष्टमी का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में जब मथुरा के राजा कंस के अत्याचार चरम पर थे और पृथ्वी पर अधर्म फैल रहा था, तब विष्णु ने अपने आठवें अवतार में श्री कृष्ण के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही श्री कृष्ण ने धर्म की रक्षा और अधर्म का अंत करने के लिए अनेक लीलाएं कीं, जिनमें कंस का वध प्रमुख था।

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