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up panchayat chunav 2026 पर बड़ा संकट; क्या अप्रैल-मई में नहीं होंगे इलेक्शन, ये रही देरी की असली वजह

up panchayat chunav 2026: देश के सबसे बड़े सूबे में इस साल पंचायत चुनाव होने हैं। हर किसी को इंतजार इस बात का है कि कब पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा। मगर इस बीच मुमकिन है कि अप्रैल मई में संभावित माने जा रहे पंचायत इलेक्शन की तारीखें और भी टल जाए। आखिर क्या सच में उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव टलने वाले हैं? और अगर ऐसा हो रहा है तो इसके पीछे की बड़ी वजह क्या है? आइए आपको बताते हैं इस खबर में।

क्यों हो सकती है देरी

राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत इलेक्शन टलने के संकेत मिल रहे हैं। जिसकी मेन वजह अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन ना होना दिखाई दे रहा है। जिसके चलते पंचायतों में आरक्षण की प्रक्रिया भी तय नहीं हो पा रही है। इस बीच प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर अप्रैल मई में ही होंगे।

पंचायती राज महकमे ने छह सदस्य आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा है। मगर अभी तक इस पर कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में अनुसूचित जातियां 20.69% हैं। तो वहीं अनुसूचित जनजातियां 0.56 फीसदी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन वर्गों के लिए इतनी ही प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। ओबीसी जातियों का प्रतिशत जनगणना में शामिल नहीं था। रैपिड सर्वे 2015 के अनुसार राज्य की ग्रामीण आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी 53.33% थी।

सन् 2011 के चुनाव में इसी सर्वे के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया गया था। हालांकि किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की जनसंख्या 27% से अधिक होने पर भी ग्राम प्रधान के पद 27% से अधिक आरक्षित नहीं हो सकते। यदि यह प्रतिशत 27% से कम हो तो उसी अनुपात में पद आरक्षित होंगे। प्रदेश स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रतिशत 27 फीसदी रखना अनिवार्य है।

मामले में पंचायती राज मंत्री ने भी दिया है ये बयान

नगर निकाय के इलेक्शन में ओबीसी की आबादी के आंकड़ों को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बाद सरकार ने नगर निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर रिपोर्ट तैयार करवाई थी। पंचायत इलेक्शन में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी की आबादी का सर्वे करेगा और उसके बाद ही आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इन सारे तथ्यों के बीच उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर दावा करते हैं कि प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे। आयोग अभी तक नहीं बना। इस सवाल पर ओम प्रकाश राजभर कहते हैं कि इस बारे में वह शीघ्र ही चीफ मिनिस्टर योगी से मिलेंगे।

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उन्होंने कहा कि आयोग गठित होने के 2 महीने के भीतर उसकी रिपोर्ट आ जाएगी। मगर बड़ा प्रश्न ये है कि जब आयोग गठित होगा जनवरी का महीना चल रहा है। करीब मार्च तक वो रिपोर्ट आएगी और रिपोर्ट लागू होने के बाद आरक्षण की सीमाएं तय होंगी और उसके बाद होने हैं पंचायत के चुनाव। अगर ये सब कुछ तय तिथि में करना है तो उसके लिए आयोग का गठन और उसका काम शुरू होना जनवरी में ही जरूरी है जो फिलहाल अभी तक मुश्किल दिखाई दे रहा है।

अगर ऐसा हुआ तो राज्य में पंचायत चुनाव वक्त पर होंगे और अगर ऐसा नहीं हुआ तो आयोग के गठन से उसके काम शुरू होने से 60 दिनों तक का समय आप गिनते जाइए। उसके बाद आने वाली जो रिपोर्ट होगी उसके आधार पर आरक्षण की सीमा और फिर जाकर कहीं होंगे पंचायत इलेक्शन।

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