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क्यों मानसून में राफ्टिंग से बचें, जानें सही समय का महत्व

प्रकृति से जुड़ने और साहसिक गतिविधियों में लिप्त होने के शौकीन लोगों के लिए राफ्टिंग एक बेहतरीन अनुभव है। लेकिन इस साहसिक जल-क्रीड़ा का लुत्फ उठाने के लिए मौसम की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। सही मौसम में किया गया राफ्टिंग का अनुभव रोमांच से भरपूर होता है, वहीं गलत समय में यह जोखिम भरा और असुविधाजनक भी हो सकता है।

मौसम और राफ्टिंग के बीच तालमेल क्यों ज़रूरी है?

नदी की लहरों से जूझते हुए राफ्टिंग करना जितना रोमांचक लगता है, उतना ही यह मौसम पर निर्भर भी होता है। भारी वर्षा के दौरान नदियों का जलस्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे धारा तीव्र और खतरनाक हो जाती है। वहीं, अत्यधिक गर्मी या अत्यधिक ठंड भी इस अनुभव को बाधित कर सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि मौसम की स्थिति और नदी की जलधारा को समझकर ही राफ्टिंग की योजना बनाई जाए।

राफ्टिंग का आदर्श समय कौन सा है?

भारत में आमतौर पर राफ्टिंग के लिए सबसे अनुकूल समय अक्टूबर से जून के बीच का माना जाता है। इस अवधि में न तो अधिक बारिश होती है और न ही तापमान अत्यधिक ऊंचा या नीचे होता है। खासकर उत्तराखंड के ऋषिकेश जैसे इलाकों में मार्च से मई और सितंबर से नवंबर के बीच का मौसम राफ्टिंग प्रेमियों के लिए सबसे उपयुक्त रहता है। इस समय नदियां स्थिर और जलवायु सुहावनी होती है, जो अनुभव को और भी यादगार बनाती है।

मानसून में क्यों टालनी चाहिए राफ्टिंग?

जून के अंत से सितंबर तक का समय देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का होता है। इस दौरान नदियों का बहाव तेज हो जाता है और जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है। कई बार भूस्खलन और तेज बारिश के चलते रास्ते भी अवरुद्ध हो जाते हैं। ऐसे में न केवल सुरक्षा खतरे में पड़ती है बल्कि राफ्टिंग के आयोजन भी रद्द किए जा सकते हैं। इसलिए इस अवधि में राफ्टिंग से परहेज़ करना समझदारी भरा निर्णय होता है।

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