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UP में पंचायत चुनाव से पहले नगर निकायों का पुनर्गठन क्यों जरूरी?

उप्र में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (Three-tier panchayat elections) एक बार फिर प्रशासनिक उलझनों में फंसता दिखाई दे रहा है। जहां एक ओर पंचायत वार्डों के पुनर्गठन (panchayat ward reorganization) की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर नगर विकास विभाग (urban development department) ने पंचायतीराज विभाग (panchayati raj department) से ऐसी मांग कर दी है, जिससे चुनाव की समय-सीमा (election time limit) प्रभावित हो सकती है।

पंचायत चुनाव (panchayat election) से पहले निकाय सीमाएं बदलें या नहीं

प्रकरण ग्राम पंचायतों के गठन (gram panchayat formation) के बाद वार्डों के पुनर्गठन से जुड़ा है, जो कि 18 जुलाई से शुरू हो चुका है। इसके तहत 10 अगस्त को वार्डों की अंतिम सूची (ward list released) जारी की जानी है। मगर अब नगर विकास विभाग ने पंचायतीराज विभाग से आग्रह किया है कि निकायों के गठन (urban body formation) और सीमा विस्तार (boundary expansion stopped) पर लगी रोक को हटा दिया जाए।

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दरअसल, पंचायतीराज विभाग ने 21 मई को एक शासनादेश जारी कर नगरीय निकायों के सृजन और सीमा विस्तार पर रोक लगा दी थी, ताकि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया (panchayat election process) निर्विघ्न संपन्न हो सके। मगर अब नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात (Amrit Abhijat) ने इस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है।

97 नए निकाय और 107 का विस्तार लंबित

नगर विकास विभाग की दलील है कि राज्य में 97 नए नगर निकायों का गठन (urban body formation) और 107 मौजूदा निकायों की सीमा विस्तार (urban body expansion) से संबंधित प्रस्ताव उनके पास लम्बित हैं। इन प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की मांग स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार आ रही है। उनका कहना है कि अगर पंचायत चुनाव के बाद निकाय पुनर्गठन किया गया तो इससे कानूनी विवाद (legal dispute) पैदा हो सकती हैं और चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

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2026 तक की योजना पर मंडराते सवाल

विभाग की ओर से तर्क दिया गया है कि अगला पंचायत चुनाव वर्ष 2026 (panchayat elections 2026) में प्रस्तावित है, और उससे पहले नगर निकायों से जुड़े सभी लंबित मसलों को सुलझाना आवश्यक है। यदि चुनाव के बाद निकायों का पुनर्गठन किया गया तो इससे न्यायिक विवाद (legal dispute) पैदा होने की आशंका है। इसलिए, विभाग चाहता है कि 21 मई के आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए, जिससे निकाय पुनर्गठन का रास्ता साफ हो सके।

अब अगला कदम किसका

नगर विकास विभाग के पत्र पर अब पंचायतीराज विभाग ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। संयुक्त सचिव जय प्रकाश पांडेय (Jai Prakash Pandey) की ओर से निदेशक पंचायतीराज और राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) के सचिव से इस मसले पर राय मांगी गई है। साथ ही, राज्य निर्वाचन आयोग से भी औपचारिक दिशा-निर्देश मांगे गए हैं क्योंकि आयोग इस समय मतदाता सूची का पुनरीक्षण (voter list revision) कार्य कर रहा है।

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