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दिग्विजय सिंह की दूरदर्शी राजनीति

हम्माम वहीद

पिछले दिनों दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए बयान से देश में एक नई बहस शुरू हो गई है। जहाँ एक ओर कुछ लोग दिग्विजय सिंह के बयान को समझने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ भोले-भाले कांग्रेसी गोदी मीडिया की मनगढ़ंत व्याख्या को सच मानकर असमंजस के शिकार हो रहे हैं।

यदि विचारधारा आत्मा है, तो संगठन उसका शरीर है। इसलिए धरातल पर मज़बूत संगठन ही किसी विचारधारा को अमली जामा पहना सकता है। जब संगठन सशक्त होगा, तभी कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और लोकतंत्र की विचारधारा जनता से सीधे जुड़ेगी।

दिग्विजय सिंह सत्ता के विकेंद्रीकरण, प्रशिक्षण और ज़मीनी स्तर पर मज़बूत संगठन देखना चाहते हैं। किसी संगठन की शक्ति को समझना मजबूरी नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण है। समय आने से पहले परिस्थितियों को भाँप लेना ही राजनीतिक दूरदर्शिता है।

दिग्विजय सिंह के इसी अनुभव और राजनीतिक महारत को कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त है। “कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र, संवाद और सहभागिता के सिद्धांतों पर आधारित है।”

हम सभी समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं, परंतु विरोधियों द्वारा बुने जा रहे षड्यंत्र के जाल से बचना ही हमारी समझदारी और बुद्धिमत्ता है।

दिग्विजय सिंह जी कांग्रेस पार्टी के ऐसे राजनीतिक योद्धा हैं, जिनकी समझ और दूरदर्शिता के उनके विरोधी भी कायल हैं। मुझे एक सीनियर जर्नलिस्ट ने बताया था कि “यदि भारत की राजनीति में कांग्रेस सहित अन्य दलों में सेक्युलर विचारधारा का सबसे बड़ा पक्षधर किसी को माना जाए, तो वह अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह हैं”

मिलिंद खांडेकर को दिए गए एक इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह जी ने कहा था कि आरएसएस के लोग सांप्रदायिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं। यशवंत शिंदे नामक एक आरएसएस ऐक्टिविस्ट ने स्वयं यह स्वीकार किया कि उन्हें किस प्रकार ट्रेनिंग दी जाती है। इंद्रेश कुमार का नाम भी एफआईआर में है। दिग्विजय सिंह जी ने तू इन्वेस्टिगेशन नहीं की। उन्होंने हमेशा धार्मिक कट्टरता का खुलकर विरोध किया है।

उन्होंने बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर और अन्ना हजारे के आंदोलनों को प्लान A/B/C बताया और कहा कि ये आंदोलन संघ द्वारा प्लांटेड हैं, जो बाद में सच साबित हुआ।

2014 के चुनाव प्रचार के दौरान वे नरेंद्र मोदी को देश का सबसे बड़ा झूठा नेता करार दिया और कहा यदि झूठ का ओलंपिक हो, तो उसके विजेता नरेंद्र मोदी होंगे।

दिग्विजय सिंह जी कहते है आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता,न कोई इस्लामी आतंकवाद होता है और न ही कोई हिंदू आतंकवाद। वे कहते हैं कि वे हर प्रकार के धार्मिक कट्टरवाद के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री रहते हुए मैं ने सबूतों के आधार पर सीमी और बजरंग दल के लोगों को पकड़ा। उनके कार्यकाल में मध्य प्रदेश में दस वर्षों तक एक भी दंगा नहीं हुआ। उनका मानना है कि यदि मुख्यमंत्री चाहे, तो किसी भी प्रदेश में दंगा नहीं होने दिया जा सकता।

वे सिद्धांतों की राजनीति करते हैं और उन्होंने संघ व भाजपा से कभी समझौता नहीं किया। वे कहते है मै सनातन धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति हूं,और गांधी-नेहरू विचारधारा के पैरोकार हूं।

2018 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वापसी में उनकी नर्मदा यात्रा की बड़ी भूमिका रही। यह भी कहा जाता है कि ऐतिहासिक भारत जोड़ो यात्रा का विचार भी उन्हीं का था। 75 वर्ष की उम्र में भी वे राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चले और कार्यकर्ताओं के साथ पंडाल में सोए।

उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहते हुए हम लोगों को भी उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। वे एक कुशल संगठनकर्ता हैं, जो कार्यकर्ताओं को नाम से जानते हैं।

पिछले दिनों लखनऊ कांग्रेस मुख्यालय आए राजा जी ने हम कांग्रेसजनों को सबक के तौर पर पाँच टिप्स दिए
संपर्क, संवाद, समन्वय, सामंजस्य और समर्पण,
जिन्हें हम निरंतर दोहराते रहेंगे। वे हमारे लिए किसी कीमती हीरे से कम नहीं हैं।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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