अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होगा, जानिए बाकी चुनावों से क्या है फर्क
देश की राजनीति में सोमवार की शाम एक बड़ा मोड़ लेकर आई। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Vice President, Jagdeep Dhankhar) ने अपने पद से इस्तीफे (Resignation) की घोषणा करके सबको चौंका दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) को भेजे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की बात कही है। Vice President election process
धनखड़ का कार्यकाल अभी अधूरा ही था ऐसे में अचानक उठाया गया यह कदम कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है खासकर इस बात को लेकर कि अब नया उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाएगा? प्रक्रिया कितनी पेचीदा है और इसके पीछे की संवैधानिक व्यवस्था क्या कहती है? आइए इस पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझते हैं।
कौन करता है उपराष्ट्रपति का चुनाव (Vice President election process)
उपराष्ट्रपति का चुनाव आम नागरिक नहीं करते बल्कि यह एक विशेष निर्वाचन मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है। इस मंडल में लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) के सभी सदस्य शामिल होते हैं चाहे वे निर्वाचित हों या मनोनीत। इस तरह तकरीबन 788 सांसद इस चुनाव में मतदान करते हैं हालांकि यह संख्या संसद में मौजूदा सदस्यों की स्थिति पर निर्भर करती है।
मतदान कैसे होता है (Voting process)
इस चुनाव में अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) अपनाई जाती है जो कि सामान्य चुनावों से अलग है। यहां सांसदों को वरीयता क्रम (Order of preference) में उम्मीदवारों को वोट देना होता है। यानी पहली पसंद दूसरी पसंद तीसरी पसंद… और इसी तरह।
मतदान गुप्त होता है (Secret ballot) और मतदाता केवल चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा दिए गए पेन से ही बैलेट पेपर (Ballot paper) पर अपनी पसंद दर्ज कर सकते हैं। यह तरीका सुनिश्चित करता है कि प्रक्रिया निष्पक्ष और गोपनीय बनी रहे।
नतीजे कैसे निकलते हैं
जब वोटों की गिनती होती है तो सबसे पहले यह देखा जाता है कि किसी उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता के आधार पर जीत के लिए आवश्यक मत कोटा (Quota) मिला है या नहीं। यह कोटा कुल वैध वोटों का हाफ प्लस वन होता है। यदि कोई प्रत्याशी इस आंकड़े तक पहुंच जाता है तो वह सीधे विजेता घोषित कर दिया जाता है।
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अगर कोई उम्मीदवार इस कोटे को नहीं छू पाता तो सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशी को बाहर किया जाता है और उसके वोटों की दूसरी प्राथमिकता को अन्य उम्मीदवारों में ट्रांसफर किया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक किसी एक उम्मीदवार को जरूरी कोटा प्राप्त नहीं हो जाता।
कौन बन सकता है उम्मीदवार (Candidate eligibility, Nomination process)
किसी भी भारतीय नागरिक को उपराष्ट्रपति चुनाव में उतरने के लिए कम से कम 20 सांसदों का समर्थन और 20 सांसदों का अनुमोदन आवश्यक होता है। इसके अलावा नामांकन के साथ 15000 रुपये की जमानत राशि (Security deposit) भी जमा करनी होती है। चुनाव अधिकारी द्वारा नामांकन की जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों को ही बैलेट में जगह मिलती है।
उपराष्ट्रपति का दायित्व क्या होता है (Vice President’s duties)
हालांकि उपराष्ट्रपति के पास सीमित कार्यकारी शक्तियां (Executive powers) होती हैं लेकिन उनका सबसे बड़ा दायित्व होता है राज्यसभा के सभापति (Rajya Sabha Chairman) के रूप में सदन का संचालन करना। इसके अलावा यदि राष्ट्रपति का पद अस्थायी रूप से रिक्त हो जाए तो उपराष्ट्रपति ही उस भूमिका को निभाते हैं और वे राष्ट्रपति के उत्तराधिकारी (Presidential successor) बनते हैं।
संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च पद है जिसके बाद उपराष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री का स्थान आता है। ऐसे में उपराष्ट्रपति की भूमिका केवल औपचारिक नहीं बल्कि संवैधानिक संतुलन (Constitutional system) के लिए बेहद अहम होती है।


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