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Dhankhar Resignation: चुपचाप विदाई के पीछे क्या छिपा है सत्ता संग टकराव का सच

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Vice President of India) के अचानक इस्तीफ़े (Jagdeep Dhankhar Resignation, Vice President Resignation 2025) ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जिस गर्मजोशी और उत्साह के साथ उन्होंने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, वैसा सम्मान और औपचारिकता उनके पद छोड़ने के समय नज़र नहीं आई। न कोई आधिकारिक विदाई, न ही प्रमुख नेताओं द्वारा कोई सार्वजनिक सराहना ये संकेत देता है कि पर्दे के पीछे कुछ गंभीर असहमति और दबाव काम कर रहा था। (Political Farewell Jagdeep Dhankhar)

उपराष्ट्रपति और सरकार के बीच दूरी की कहानी

सूत्रों के अनुसार, धनखड़ और केंद्र सरकार (Central Government and Vice President Differences) के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद लंबे समय से उभर रहे थे। इन मतभेदों की शुरुआत राज्यसभा (Rajya Sabha Politics) में उनकी कार्यशैली से हुई, जहाँ उन्होंने एक सख्त और कई बार टकरावपूर्ण रवैया अपनाया (Rajya Sabha Chairman Dispute)। विपक्षी दलों का आरोप था कि वे सभापति के तौर पर पक्षपात कर रहे थे और सरकार के इशारों पर कार्य कर रहे थे (Dhankhar vs Government)। एक घटना में तृणमूल सांसद ने उनकी नकल कर विरोध जताया, जिसे राहुल गांधी ने साझा किया—यह असंतोष की सार्वजनिक अभिव्यक्ति थी।

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न्यायपालिका से भी टकराव

धनखड़ के कई बयानों में सुप्रीम कोर्ट पर सीधा हमला देखने को मिला, जहाँ उन्होंने संसद की सर्वोच्चता पर ज़ोर दिया (Dhankhar Judiciary Conflict)। इससे न्यायपालिका के भीतर यह धारणा बनने लगी कि वे सरकार की लाइन को बढ़ावा दे रहे हैं (Vice President and Supreme Court Dispute, Supreme Court Parliament Dispute)। यह संस्थागत टकराव की दिशा में जाता संकेत था, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन खतरे में पड़ सकता था।

शिकायतों और असंतोष की बढ़ती आवाज़

जब उन्हें शांत रहने की सलाह दी गई, तो उन्होंने अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ाहिर की। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी शिकायतें आरएसएस और कुछ वरिष्ठ मंत्रियों तक पहुँचाईं (Complaint to RSS)। उनका कहना था कि उन्होंने बार-बार सरकार का बचाव किया (BJP Leadership Disagreement) यहाँ तक कि संवैधानिक सीमाएँ भी लांघीं (Resignation from Constitutional Post) परंतु उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।

राजनीतिक समीकरणों में उलझाव

धनखड़ की हाल की गतिविधियाँ सत्ता पक्ष के लिए चिंता का कारण बन गईं (BJP Internal Dispute, BJP Internal Crisis)। उन्होंने विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें कांग्रेस के शीर्ष नेता (Congress and Dhankhar Talks) और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal and Dhankhar Meet) शामिल थे, से मुलाकात की। इसी दौरान उन्होंने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया राज्यसभा से शुरू करने की मंशा जताई (Justice Verma Impeachment) वही सरकार वही प्रस्ताव लोकसभा में लाने की तैयारी कर रही थी। यह स्पष्ट रूप से सत्ता पक्ष के लिए असहज स्थिति बन गई।

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आखिरी चेतावनी और इस्तीफ़े की पटकथा

सूत्रों के मुताबिक, जब सरकार को लगा कि खुले टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है (Conflict in Parliament) तो धनखड़ को एक अंतिम चेतावनी दी गई। उन्हें कहा गया कि यदि वे अपना रवैया नहीं बदलते, तो उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है (Vice President Impeachment Fears)। यह सुनते ही उनके आत्मविश्वास को झटका लगा। जिन्हें वे करीबी समझते थे, उनका समर्थन न मिलने से वे व्यथित हुए। अंततः उन्हें लगा कि इस असहज दौर से निकलने का एकमात्र सम्मानजनक मार्ग इस्तीफ़ा ही है (Dhankhar Resignation Reason, Dhankhar Political Future)। Dhankhar Resignation

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