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इस देश में आवारा कुत्तों की रखवाली करती है स्पेशल पुलिस, भारत क्या सीख सकता है?

दिल्ली की सड़कों पर पिछले कुछ दिनों से एक नया आंदोलन देखने को मिल रहा है नारे, पोस्टर और सैकड़ों की तादाद में लोग जिनमें बड़ी संख्या में युवाओं और एनिमल वेलफेयर (Stray Dogs) से जुड़े कार्यकर्ताओं की मौजूदगी है। वजह- सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का हालिया फैसला, जिसमें कहा गया है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम्स (Shelter Homes) में भेजा जाए।

ये निर्णय सुनते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बहस छिड़ गई। जीव प्रेमियों का मानना है कि ये कदम इन बेजुबानों के साथ अमानवीयता है। उनका सवाल सीधा है क्या एक समस्या का समाधान किसी जीव को उसके प्राकृतिक वातावरण से दूर करके हो सकता है?

बढ़ती घटनाएं, बढ़ता डर

ये भी सच है कि भारत के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं। खासकर शहरी इलाकों में बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की खबरें चिंता का कारण बनी हैं। साथ ही रेबीज जैसे जानलेवा संक्रमण का खतरा भी बढ़ा है। (Dog problems in urban areas)

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मगर सवाल यह उठता है कि क्या इन घटनाओं की आड़ में हर आवारा कुत्ते को खतरा मान लेना न्यायसंगत है?

कुत्तों के लिए अलग पुलिस

जब हम समाधान की तलाश करते हैं, तो ध्यान दुनिया के उन देशों की ओर जाता है जिन्होंने इस चुनौती से समझदारी से निपटा है। उदाहरण के लिए, नीदरलैंड को ही ले लीजिए।

ये वो देश है जहाँ आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की संख्या लगभग शून्य है न मारकर, न डराकर बल्कि सम्मान और देखभाल के साथ। वहाँ की सरकार ने नसबंदी, टीकाकरण और जिम्मेदार पालक ढूंढने की एक ऐसी सुनियोजित प्रणाली अपनाई है कि कुत्ते न केवल सड़कों से हटे बल्कि उन्हें स्थायी आश्रय भी मिला।

यहां तक कि वहाँ एक स्पेशल पुलिस यूनिट होती (Special animal police) है जो केवल पशुओं के मामलों को देखती है। इतना ही नहीं हर पालतू कुत्ते को जन्म के सात हफ्ते के अंदर माइक्रोचिप से टैग कर दिया जाता है ताकि उसका रिकॉर्ड बने और चोरी या गुमशुदा होने की स्थिति में पहचान की जा सके।

शेल्टर होम से गोद लेने की परंपरा

नीदरलैंड में कुत्ते खरीदने की बजाय शेल्टर से गोद लेने की परंपरा (Adopting a dog from a shelter) को बढ़ावा दिया गया है। सरकार ने इस पर इतना सख्त नियंत्रण रखा है कि अवैध ब्रीडिंग या व्यापार पर भारी जुर्माने का प्रावधान है। इससे न केवल शेल्टर में रह रहे जानवरों को परिवार मिलते हैं बल्कि ब्रीडिंग के लिए जानवरों का दुरुपयोग भी रुकता है।

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