बड़े काम का है संचार साथी ऐप, फिर भी विवाद; जानें अब तक कितने लोगों ने किया है डाउनलोड
संचार साथी ऐप का विवाद इन दिनों काफी सुर्खियों में रहा। विपक्ष के आरोपों के बाद विवाद इतना बढ़ा कि केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सफाई तक देनी पड़ गई। तो हम जानेंगे इस ऐप को और इससे जुड़ा हुआ पूरा विवाद। तो आइए सबसे पहले हम समझते हैं आखिर क्या है यह संचार साथी ऐप?
क्या है संचार साथी ऐप
ये ऐप भारत सरकार का एक डिजिटल सेफ्टी प्लेटफार्म है जिसे मोबाइल यूजर की सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाया गया है। इस ऐप से आप अपने नाम पर कितने मोबाइल नंबर हैं यह देख सकते हैं। कोई नंबर आपका नहीं है तो उसे रिपोर्ट कर सकते हैं। आपके नाम पर कोई गलत सिम एक्टिव है तो उस सिम को बंद करवा सकते हैं। ऐप से फोन को ट्रैक ब्लॉक या रिकवर किया जा सकता है।
संदिग्ध कॉल फर्जी नंबर और धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शन की शिकायत दर्ज भी करा सकते हैं इस ऐप के माध्यम से या पोर्टल के माध्यम से। तो इस तरह अपने ऐप में कई शानदार फीचर के साथ यह ऐप जनवरी 2025 से और पोर्टल के रूप में 2023 से चल रहा है। प्ले स्टोर पर इसके 1 करोड़ से ज्यादा लोग अपने फोन पर संचार साथी को 4.6 की रेटिंग के साथ इंस्टॉल भी कर चुके हैं। लेकिन यह ऐप विवादों में क्यों है? आइए अब समझ लेते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन के 28 नवंबर के एक ऐलान के बाद यह ऐप विवादों में आ गया है।
जानें ऐप को लेकर विवाद क्यों
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन ने स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया था कि देश में उपयोग के लिए निर्मित या आयातित सभी मोबाइल हैंडसेटों पर संचार साथी मोबाइल एप्लीकेशन पहले से इंस्टॉल हो और जो फोन बिक चुके हैं उनमें यह ऐप अपडेट किया जाए। इसके लिए 90 दिन का समय भी दिया गया। इस फैसले का कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया।
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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि ये कदम लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है। यह एक जासूसी ऐप है। सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है। साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए सिस्टम जरूरी है। लेकिन सरकार का ताजा आदेश लोगों की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल जैसा है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। शशि थरूर ने कहा संचार सारथी ऐप उपयोगी हो सकता है लेकिन इसे स्वैक्षिक होना चाहिए जिसे जरूरत हो खुद डाउनलोड कर सके। किसी भी चीज को लोकतंत्र में जबरन लागू करना चिंता की बात है। सरकार को मीडिया के जरिए आदेश जारी करने के बजाय जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि इस फैसले के पीछे आखिर क्या तर्क है।
बाद में संचार सारथी ऐप को लेकर चल रही गलतफहमियों को दूर करते हुए केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने कहा कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी तरह की निगरानी में इसका कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने साफ कहा कि लोग इस ऐप को अपनी इच्छा से इस्तेमाल कर सकते हैं और चाहे तो कभी भी अपने फोन से हटा भी सकते हैं। इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ऐप के अब तक के प्रभावी परिणाम को भी साझा किए। उनके मुताबिक संचार साथी को 1.4 करोड़ से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है और पोर्टल पर 21.5 करोड़ से ज्यादा विजिट हो चुकी हैं।
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नागरिकों की शिकायतों के आधार पर 1.43 करोड़ फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए हैं। इसके अलावा 26 लाख से ज्यादा खोए चोरी हुए फोन का पता लगाया गया। जिसमें 7.23 लाख फोन वापस भी मिले हैं। सिंधिया ने बताया कि ऐप की मदद से लोगों ने 40.96 लाख धोखाधड़ी वाले कनेक्शनों की पहचान कराई है और 6 लाख 20,000 धोखाधड़ी से जुड़े आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए गए हैं।
वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए बनाए गए जोखिम संकेतक FIR की वजह से अब तक ₹475 करोड़ के संभावित फ्रॉड भी रोके गए हैं। इस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना स्पष्टीकरण दिया है संचार साथी को लेकर।

