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DHRUVA Framework: सरकार ला रही UPI जैसा ‘डिजिटल एड्रेस’ सिस्टम, फायदें जानिए

DHRUVA Framework: क्या आने वाले समय में आपका घर का पता भी आपके ईमेल आईडी की तरह एक छोटा सा कोड बन जाएगा? जी हाँ ऐसा हो सकता है! भारत सरकार का डाक विभाग (india post) एक बड़े डिजिटल बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहा है। मई 2025 में प्रस्तावित ‘ध्रुव’ (DHURV) नामक डिजिटल सिस्टम को लागू करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

हाल ही में पोस्ट ऑफिस (indian post) एक्ट 2023 में संशोधन का मसौदा (Draft) जारी किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है पता लिखने उसे बार-बार साझा करने और समझाने की मुश्किलों को हमेशा के लिए खत्म करना। यह पहल जो पहले जारी किए गए डीजीपिन (DigiPIN) सिस्टम को एक नया फ्रेमवर्क देगी देश में पते के तरीके को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है।

ध्रुव क्या है? (Know About DHRUVA Framework)

ध्रुव का पूरा नाम है: Digital Hub for Reference and Unique Virtual Address। जैसा कि नाम से पता चलता है यह एक ऐसा सिस्टम है जो हर नागरिक को एक सरल डिजिटल पता (Digital Address) देगा।

यह डिजिटल पता कुछ-कुछ आपके ईमेल या UPI आईडी जैसा ही होगा। जैसे आपका ईमेल (उदा. anil@gmail.com) आपकी पहचान को आसान बनाता है उसी तरह ध्रुव के माध्यम से आपका घर का पता एक विशिष्ट लेबल में बदल जाएगा। उदाहरण के लिए यह कुछ ऐसा दिख सकता है: आपकानाम@ध्रुव या ABC@DHURV। यह एक प्रॉक्सी एड्रेस (Proxy Address) के रूप में काम करेगा।

इस सिस्टम को आधार या यूपीआई की तरह ही ‘अद्वितीय’ (Unique) बनाया जाएगा। जैसे आपका मोबाइल नंबर आपकी विशिष्ट पहचान होता है वैसे ही यह ‘ध्रुव’ लेबल आपके पते की डिजिटल पहचान बन जाएगा।

‘डीजीपिन’ और ‘डिजिटल एड्रेस लेयर’: ध्रुव के दो मजबूत आधार

ध्रुव प्रणाली मुख्य रूप से दो लेयरों पर काम करेगी। जब आप किसी ई-कॉमर्स या टैक्सी ऐप पर अपना डिजिटल पता (उदा. ABC@DHURV) साझा करेंगे तो यह प्रॉक्सी एड्रेस इन दो परतों के माध्यम से आपके असली पते तक पहुँचेगा:

1. डीजीपिन लेयर (DigiPIN Layer)

  • डीजीपिन का पूरा नाम डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर है। यह सिस्टम पहले ही जारी किया जा चुका है।
  • क्या है यह? डीजीपिन एक जियो-कोड (Geo-code) है यानी यह किसी विशेष भौगोलिक जगह को दर्शाता है।
  • स्वरूप: यह 10 अंकों का अल्फ़ा-न्यूमेरिक (अक्षर और संख्याएँ) कोड होगा।
  • आधार: यह अक्षांश और देशांतर (Latitude and Longitude) पर आधारित होगा। इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह पूरे भारत में लगभग 12 वर्ग मीटर की ग्रिड वाली जगह को सटीक रूप से इंगित कर सकता है।

2. डिजिटल एड्रेस लेयर (Digital Address Layer)

यह परत आपके वास्तविक पते (गाँव पोस्ट जिला राज्य) और आपके डीजीपिन कोड को मिलाकर ‘ध्रुव’ पर एक प्रॉक्सी एड्रेस (उदा. ABC@DHURV) जनरेट करती है।

काम करने का तरीका

  • आप किसी सर्विस प्रोवाइडर (जैसे डिलीवरी ऐप) को अपना ध्रुव लेबल देते हैं।
  • यह ऐप आपसे आपके डीजीपिन तक पहुँचने की अनुमति (Permission) माँगेगा।
  • आपकी सहमति मिलने पर ही वह ऐप डीजीपिन के माध्यम से आपके विस्तृत और सटीक वास्तविक पते को जान पाएगा।

सबसे बड़ी बात: आपकी अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था पहली नज़र में आपका पूरा पता नहीं देख पाएगी। यह आपकी गोपनीयता को सुनिश्चित करता है।

ध्रुव इकोसिस्टम कैसे काम करेगा?

इस पूरे डिजिटल पते के सिस्टम को चलाने के लिए कई नई संस्थाओं और नियमों की आवश्यकता होगी:

  • एड्रेस सर्विस प्रोवाइडर (ASP): ये वो प्लेटफॉर्म होंगे जो आपके लिए डिजिटल एड्रेस लेबल बनाएंगे।
  • एड्रेस वैलिडेशन एजेंसी (AVA): ये एजेंसियाँ आपके पते की सत्यता (Verification) की जाँच करेंगी कि वह असली है या नहीं।

एड्रेस इंफॉर्मेशन एजेंट्स (AIA): ये सबसे महत्वपूर्ण होंगे। ये इस बात को मैनेज करेंगे कि कौन सा ऐप आपके पते को कब तक और किस उद्देश्य के लिए देख सकता है। यह आपकी सहमति (Consent) को भी प्रबंधित करेगा।

गवर्नेंस एंटिटी: पूरे सिस्टम को संचालित करने डेटा सुरक्षा नियमों को लागू करने और किन कंपनियों को अनुमति मिलेगी यह सब एक केंद्रीय नियामक संस्था (Central Regulatory Body) तय करेगी। (ठीक वैसे ही जैसे UPI को NPCI संभालता है)।

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क्यों ये बदलाव ज़रूरी

इस डिजिटल पहल से कई बड़े लाभ होने की उम्मीद है खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में:

  • सहमति-आधारित डेटा साझाकरण: आपका डेटा केवल आपकी सहमति से ही साझा होगा। आप यह तय करेंगे कि कब और कैसे आपके पते का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • स्थान परिवर्तन में आसानी: यदि आप एक शहर से दूसरे शहर जाते हैं तो आपको बस अपने सिस्टम में एक आसान अपडेट करना होगा। डीजीपिन और संबंधित सुविधाएँ खुद-ब-खुद नई लोकेशन के अनुसार अपडेट हो जाएँगी।
  • सटीक लोकेशन और बेहतर सेवा: ग्रामीण इलाकों में या जहाँ पते अस्पष्ट होते हैं वहाँ डिलीवरी और सरकारी सेवाओं (e-Governance) में बड़ा सुधार आएगा। कोई 10-अंकीय अल्फ़ा-न्यूमेरिक कोड किसी पुराने कुएँ या कटे हुए पेड़ के सहारे दिए गए पते से कहीं ज़्यादा सटीक होगा।
  • डोर-स्टेप सेवाओं का विस्तार: सटीक लोकेशन होने से बैंक स्वास्थ्य और अन्य डोर-स्टेप (Doorstep) सेवाओं को लोगों तक पहुँचाना बेहद आसान हो जाएगा।

 

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