India Iran Deal on Hormuz: होर्मुज पर डील से भारत को कितना फायदा, जानिए
India Iran Deal on Hormuz: हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट चर्चा का केंद्र बन गया है। इस जलडमरूमध्य में फंसे भारत के जहाजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सरकार की जानकारी के अनुसार कम से कम 28 जहाज यहां फंसे हैं। इनमें 24 जहाज पश्चिमी हिस्से में और 4 पूर्वी हिस्से में मौजूद हैं। इन जहाजों पर कुल 778 नाविक सवार हैं। पश्चिमी हिस्से में 677 और पूर्वी हिस्से में 101 लोग फंसे हैं।
इस स्थिति का असर सीधे भारत की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है। कच्चा तेल, एलपीजी और खाद का अधिकांश हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है। अगर यहां पर आपूर्ति बाधित होती है तो आम जनता महंगाई और रोजमर्रा की चीज़ों की कमी से जूझ सकती है।
सरकार की कोशिशें और कूटनीतिक पहल
भारत के विदेश मंत्री यशवंत जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास से बातचीत की। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के जहाज होर्मुज से गुजर पाएंगे, मगर बाद में ईरान ने इसे खारिज कर दिया। ईरान ने स्पष्ट किया कि केवल चीन के जहाज ही सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजरेंगे, अन्य देशों के जहाजों पर हमले का खतरा है।
इस बीच एक भारतीय जहाज ने चुपचाप रडार बंद कर रास्ता पार कर मुंबई पोर्ट तक पहुँचकर स्थिति की गंभीरता को दिखा दिया।
होर्मुज क्यों भारत के लिए है अहम
- भारत की ऊर्जा आपूर्ति में होर्मुज की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
- भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 55% होर्मुज के रास्ते से आयात करता है।
- एलपीजी का 60% हिस्सा अन्य देशों से आता है और इनमें से 90% होर्मुज के रास्ते से है।
- खाद का लगभग 30% आयात इसी मार्ग से भारत तक पहुँचता है।
इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। अगर कच्चे तेल की आपूर्ति में रुकावट आती है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं। एलपीजी की कमी से घरेलू गैस महंगी होती है। खाद की आपूर्ति में रुकावट किसानों को प्रभावित करती है और खाद्य उत्पादन पर असर डालती है।
रणनीतिक और व्यापारिक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट न केवल ऊर्जा आपूर्ति बल्कि भारत के व्यापारिक रिश्तों के लिए भी जरूरी है। यह मार्ग मिडिल ईस्ट और पश्चिम एशिया के देशों के साथ व्यापार में समय बचाता है। सामान्य मार्गों की तुलना में यहां से यात्रा करने पर 5 से 7 दिन की बचत होती है। सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों के साथ व्यापारिक लेन-देन के लिए यह प्रमुख मार्ग है।
40 देशों से भारत कच्चा तेल आयात करता है और इन देशों के अधिकांश जहाज इसी मार्ग से आते हैं। इसलिए जब होर्मुज में तनाव होता है तो इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर सीधा पड़ता है।
जनता पर पड़ेगा सीधा असर
होर्मुज की आपूर्ति बाधा का असर सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं।
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घरेलू एलपीजी महंगा होता है। किसानों के लिए खाद की कमी उत्पादन और लागत को प्रभावित करती है। इसलिए होर्मुज संकट सिर्फ जहाज फंसे होने की खबर नहीं है, बल्कि यह भारत के रोजमर्रा के जीवन और अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है।

