बंगाल में खेला होबे! क्या ममता की 15 साल की बादशाहत खत्म कर पाएगी भाजपा, जानें अंदर की रणनीति
देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। सभी राजनीतिक दलों ने जीत की रणनीति पर फोकस कर लिया है। उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज हो चुकी है।
पांचों राज्यों में सत्ता पक्ष जहां पुन: अपनी जीत सुनिश्चित करने को उतावला है, वहीं विपक्ष सत्ता की चाबी पाने को जोर-आजमाइश में जुट गया है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। पुडुचेरी केंद्र शासित राज्य है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में भाजपा अब तक जीत का स्वाद नहीं चख सकी है।
पश्चिम बंगाल में TMC का बोलबाला
मसलन इन तीनों राज्यों में सत्ता तक पहुंचने में भाजपा को कामयाबी नहीं मिल पाई है। जबकि पुडुचेरी में दूसरी बार और असम में तीसरी बार वह सत्ता में वापसी को बेताब है। पश्चिम बंगाल की सत्ता पर पिछले पंद्रह साल से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) काबिज है। टीएमसी मुखिया ममता बनर्जी के नेतृत्व में सरकार का संचालन होता रहा है। इस राज्य में टीएमसी को सत्ता से बाहर करने के लिए भाजपा सबसे अधिक प्रयासरत दिखाई पड़ रही है।
वैसे पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के मध्य की अदावत जगजाहिर है। किसी न किसी मुद्दे पर दोनों प्रमुख दल अक्सर आमने-सामने आते रहे हैं। मतदाताओं पर अच्छी पकड़ के कारण ममता बनर्जी अब तक अजेय रही हैं। भविष्य में उन्हें मतदाताओं का आशीर्वाद मिलेगा या नहीं, यह देखना दिलचस्प रहेगा। ममता यदि चुनावी जीत का सिलसिला बरकरार रखने में सफल रहीं तो उनके नाम अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा। वह देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बन जाएंगी, जिन्हें लगातार चार बार जीत मिली।
यहां तीसरी बार सत्ता में लौटने को भाजपा बेकरार
हालांकि इस बार उनके समक्ष चुनौतियां कम नहीं हैं। इसके इतर असम में तीसरी बार सत्ता में लौटने को भाजपा बेकरार है। वहां मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा हैं। जिन्हें फायर ब्रांड सीएम के तौर पर जाना जाता है। कांग्रेस छोड़कर उन्होंने भाजपा का दामन थापा था। अपने तीखे बयानों को लेकर वह अक्सर चर्चाओं में रहते हैं।
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में क्या दूसरी बार सत्ता हासिल करने में भाजपा कामयाब हो पाएगी, इस सवाल का जवाब जल्द मिल जाएगा। पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु और केरल भी भाजपा की टेंशन बढ़ाते रहे हैं। तमिलनाडु व केरल में इस बार बड़ा उलटफेर करने को भाजपा ने कमर कस ली है। इन पांचों राज्यों में भाजपा की नाव किनारे लगाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अहम भूमिका निभानी है। चूंकि मतदाताओं के बीच आज भी वह खासे लोकप्रिय हैं। मोदी के वादों पर जनता को भरोसा रहता है।
संबंधित राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर का मुद्दा चर्चाओं में है। विपक्ष एसआईआर के नाम पर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधता रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार हाल ही में पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए थे। वहां उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा था। सत्ताधारी टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की थी।
कुल मिलाकर प्रस्तावित चुनाव भाजपा और विपक्ष की सियासी ताकत का परिणाम सामने रखेंगे। चुनाव में सभी को बराबर अवसर मिलें और किसी के साथ पक्षपात न हो, यह आयोग का दायित्व है। संवैधानिक संस्था होने के नाते यह आवश्यक हो जाता है कि आयोग की मंशा पर सवाल उठाने का किसी को मौका न मिले। उम्मीद की जानी चाहिए कि पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से पूर्ण कराए जा सकेंगे।

