NATO ने छोड़ा साथ, जनता ने शुरू किया विद्रोह; क्या खत्म होने वाला है सुपरपावर अमेरिका का दबदबा
Trump iran news: ‘दुश्मन को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए।’ बड़े-बुजुर्गों ने यह बात बेहद सोच-समझकर कही थी। आप बेशक कितने ताकतवर हो, कितने बुद्धिमान हो और चाहें आपके दोस्तों की फेहरिस्त कितनी लंबी क्यों न हो, मगर बगैर प्रभावी रणनीति तथा समझदारी के शत्रु को परास्त करना मुमकिन नहीं होता। यह हालात आज अमेरिका के सामने बन रहे हैं। आर्थिक और सामरिक रूप से काफी पावरफुल अमेरिका को अब ईरान के खिलाफ जंग के मैदान में टिकना दिन-प्रतिदिन भारी पड़ रहा है। वह युद्ध मैदान से बहाने बनाकर भागने की फिराक में नजर आ रहा है।
कागजी शेर साबित हुआ अमेरिका
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप की असफल नीति ने समूची दुनिया में अमेरिका की लानत-मलानत करा दी है। असली शेर की बजाए वह कागजी शेर बनकर रह गया है। सोशल मीडिया पर इन दिनों अमेरिका और ईरान के भीतर के कुछ वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में सड़कों पर जनसमूह को उतरते देखा गया है। यह वीडियो दोनों देशों की जनता के मिजाज को भांपने के लिए पर्याप्त हैं। यूएस में डोनाल्ड ट्रंप के विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य नारा है कि उन्हें किंग (राजा) नहीं चाहिए।
दरअसल युद्ध की मार से अमेरिका में भी महंगाई आसमान छू रही है। दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कमी होने लगी है। जन आक्रोश के कारण डोनाल्ड ट्रंप को अपनी साख और कुर्सी दोनों पर संकट मंडराता दिखाई दे रहा है। इसके विपरीत ईरान में सेना के समर्थन में लाखों नागरिक प्रतिदिन एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। यह जनसमूह सेना का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका के साथ किसी प्रकार की वार्ता नहीं करने की अपील हो रही है। यानी ईरान की सेना और नेताओं को जहां जनता का समर्थन मिल रहा है, वहीं अमेरिका में राष्ट्रपति का विरोध निरंतर बढ़ रहा है। इसके चलते ट्रंप मुश्किल में घिर गए हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या करने के बाद यूएस को उम्मीद थी कि वहां की जनता सड़कों पर आकर बगावत कर देगी।
India Iran Deal on Hormuz: होर्मुज पर डील से भारत को कितना फायदा, जानिए
ऐसे में ईरान में सत्ता परिवर्तन की राह आसान हो सकेगी, मगर खामेनेई की मौत ने जनता को विद्रोह करने की बजाए एकजुट होने का मौका दे दिया। नतीजन अमेरिका और इजरायल की रणनीति पर पानी फिर गया है। इसके अलावा नाटो देशों ने भी अमेरिका को झटका दे डाला है। ईरान को लेकर ट्रंप के बयानों में विरोधाभास साफ झलक रहा है। वह कभी भीषण हमले की धमकी देते हैं तो कभी युद्ध समाप्त करने की टाइम लाइन बताने लगते हैं। अमेरिका की धमकियों के बावजूद ईरान ने होर्मुज स्टेट पर अपना नियंत्रण बरकरार रखा है।
समुद्र में लगाया ‘टोल टैक्स’
यही नहीं तेहरान ने इस मुख्य समुद्री मार्ग पर पहली बार टोल लगाने की व्यवस्था को मंजूरी देकर ट्रंप की परेशानी और बढ़ा दी है। ईरान युद्ध के कारण भारत की परेशानियां भी बढ़ रही हैं। पेट्रोल-डीजल, सीएनजी एवं एलपीजी की आपूर्ति में अड़चन कायम है।
व्यावसायिक सिलेंडर के दामों में दूसरी बार वृद्धि कर दी गई है। इससे महंगाई और बढ़ने की प्रबल संभावना है। रूस के बाद अमेरिका दुनिया का वह दूसरा सबसे ताकतवर मुल्क है, जो युद्ध के झमेले में फंसकर दूसरों के साथ-साथ अपनी अर्थव्यवस्था को भी पलीता लगा रहा है। युद्ध मैदान से विजेता बनकर बाहर निकलने का उसका सपना चकनाचूर हो चुका है। वह अब इस विवाद से जल्द से जल्द बाहर निकलने को छटपटा रहा है।

