कांग्रेस और सपा का झंडा जलाने के बाद अपर्णा सिंह बिष्ट आखिर क्यों हो रही है ट्रोल, जानिए क्या है पूरा मामला
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Lucknow. उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और भाजपा नेत्री अपर्णा यादव बिष्ट के हालिया बयान और उनके द्वारा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के झंडे जलाए जाने की घटना ने सोशल मीडिया पर काफी हलचल पैदा कर दी है।
अपर्णा ने बीते शुक्रवार की देर रात को यूपी विधानसभा के सामने कांग्रेस और सपा के झंडे जलाते हुए बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि – “आज इस अंधेरी रात में मैं इन दुर्योधन और दुश्शासन रूपी राजनैतिक पार्टियों का झंडा जला कर सम्पूर्ण भारतीय नारी शक्ति की अस्मिता की ज्योति जलाने आयी हूँ।
एक नारी होकर अगर आज मैं चुप रह जाती तो मेरी अंतरात्मा मुझे कभी माफ नहीं करती। इस प्रदर्शन के माध्यम से आज मैं इन विधर्मियों को बताने आयी हूँ कि भारतीय नारी के अधिकारों का विरोध इनको इनके सम्पूर्ण नाश से चुकाना होगा।
देश की मात्र शक्ति और सारा देश इन कलयुगी दुश्शाशनों को को कभी माफ नहीं करेगा। जिस देश के बेटे कारगिल की बर्फीली चोटियों पर दुर्गा माता की जय बोल कर मौत से भी लड़ जाते हैं, वो देश इन महिला विरोधी ताकतों का सर कुचल कर रहेगा।”
अब इसके बाद कांग्रेस और सपा समर्थक इस बात को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं।
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आइए जानते है कि आखिर पूरा मामला क्या है
हाल ही में महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हुई है। मोदी सरकार बीते 12 सालों में पहली बार बिल पास कराने में नाकाम रही। महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन बिल पर लोकसभा में 21 घंटे की चर्चा के बाद शुक्रवार को वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया।
इस क़ानून में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। लेकिन सरकार के प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 में कहा गया है कि सीटों में आरक्षण डीलिमिटेशन के आधार पर लागू होगा।
अपर्णा यादव ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के रुख की तीखी आलोचना की। विरोध स्वरूप उन्होंने इन दोनों पार्टियों के झंडे जलाए।
ट्रोल होने के मुख्य कारण
सोशल मीडिया पर उन्हें मुख्य रूप से इन वजहों से ट्रोल किया जा रहा है:
पारिवारिक पृष्ठभूमि: अपर्णा यादव, मुलायम सिंह यादव की बहू हैं। लोगों का कहना है कि जिस पार्टी (सपा) ने उनके परिवार को पहचान दी, उसी के प्रतीक चिन्ह को जलाना “अकृतज्ञता” है।
राजनीतिक निष्ठा पर सवाल: विपक्षी समर्थकों और कुछ तटस्थ यूजर्स का मानना है कि यह केवल “पब्लिसिटी स्टंट” है या अपनी नई पार्टी (BJP) में अपना कद बढ़ाने की कोशिश है।
विरोध का तरीका: लोकतांत्रिक राजनीति में झंडे जलाना एक उग्र कदम माना जाता है। आलोचकों का तर्क है कि वैचारिक विरोध को शब्दों के जरिए भी रखा जा सकता था।
अपर्णा यादव का पक्ष
अपर्णा ने अपने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर इन पार्टियों का विरोध महिलाओं के अधिकारों पर हमला है। उन्होंने इसे महिला अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि जो दल महिलाओं की प्रगति में बाधा बनते हैं, उनका राजनीतिक अस्तित्व समाप्त होना तय है।
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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष मनोज यादव लिखते हैं कि भाजपा की नई नवेली नेता अपर्णा बिष्ट कांग्रेस का झंडा जला रही है महिला आरक्षण में कांग्रेस के ओबीसी एससी एसटी और माइनॉरिटी महिलाओं को आरक्षण की मांग से तिलमिला गई है अपर्णा बिष्ट ने एक बार बहुजनों के आरक्षण के खिलाफ भी बयान दिया था। अपर्णा सोच से अभी ब्राह्मणवाद से मुक्त नहीं हुई है यह जाति का प्रिविलेज लेकर महिला आरक्षण के नाम पर सदन में जाना चाहती है। हमारे झंडे को अगर तुम जलाओगे इसे हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस का यह तिरंगा इस देश के बहुजनों का झंडा है।
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा, पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े
सपा नेता लौटनराम निषाद का कहना है कि अपर्णा यादव ऐसी तुच्छ सोच और मानसिकता केवल विधायक बनने के लिए।, यह सिर्फ एक झंडा नहीं है यह आपके ससुर Mulayam Singh Yadav ‘नेता जी’ के सिर का ताज रहा है। उन्होंने अपने खून-पसीने, संघर्ष और पराक्रम से गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को अधिकार दिलाने के लिए Samajwadi Party की स्थापना की थी। जिसको तुम जैसी लालची महिला कभी नहीं समझ पाई।
जिस नेता जी (मुलायम सिंह यादव जी)ने इतना सम्मान दिलाया अपनी घर की बहु स्वीकार किया बिना किसी जातिगत भेदभाव के उनके द्वारा बनाई गई पार्टी का भी तुम सम्मान नहीं रख पाई, स्वार्थ में इतनी अंधी हो गई कि अपना ही घर जला रही हो। लेकिन एक बात याद रखना जो अपने घर का नहीं है वो किसी की नहीं है।
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स्वतंत्र विचारक एवं लेखक आर्यन रणवी अपने फेसबुक पेज पर लिखते हैं कि अपर्णा यादव समाजवादी पार्टी का झंडा जला रही है…जबकि सच यह है कि अगर ये झंडा या पार्टी ना होती तो अपर्णा को कहीं सम्मान ना मिलता।
BJP ने भी अपर्णा को अपने दल में इसीलिए शामिल किया है क्योंकि ये उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखती है। ये आम झंडा नहीं है ये आपके ससुर धरतीपुत्र श्रद्धेय नेताजी के सिर का ताज है।
जिसे नेताजी ने खून, पसीने, संघर्ष से, बड़ी लड़ाइयां-लड़ करके हासिल की थी। तब जाकर कहीं समाजवादी पार्टी की स्थापना हुई थी।
गौरतलब है कि अपर्णा यादव ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थामा था, और तब से वे लगातार सपा और विपक्षी गठबंधन पर हमलावर रही हैं।

