नेपाल से पंजाब और अब तमिलनाडु: राजनीति में ‘आउटसाइडर्स’ की एंट्री ने विश्लेषकों को क्यों किया हैरान
Political News India 2026: देश-दुनिया में मतदाताओं का मिजाज बदल रहा है। किसी बड़ी जिम्मेदारी के लिए वह रियल लाइफ के नामचीन दिग्गजों की बजाए रील लाइफ की शख्सियतों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। मसलन मनोरंजन जगत के कलाकारों की किस्मत कब पलट जाए और कब जनता उन्हें आसमान पर बैठा दे, कोई नहीं जानता।
जोसेफ विजय की जीत ने सभी को चौंकाया
सियासत में कुछ कलाकार अचानक ‘सबसे बड़े लड़इया’ बनकर उभरे हैं। इन कलाकारों की कामयाबी ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है। ताजा मामला तमिलनाडु में प्रकाश में आया है। जहां जोसेफ विजय की जीत ने हर किसी को चौंका दिया है। सिर्फ दो साल पहले राजनीति में आए विजय की पार्टी टीवीके ने विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल कर मानो करिश्मा कर दिया है।
नई-नवेली पार्टी की सफलता ने तमिलनाडु की सियासत का इतिहास बदल डाला है। बेहतर अभिनय के दम पर विजय ने दर्शकों के दिल पर ऐसा जादू चलाया कि आज वह मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुके हैं। रूस के साथ भीषण युद्ध के दौरान दुनिया भर में चर्चाओं में आए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मास्को के खिलाफ जेलेंस्की की प्रभावी रणनीति प्रशंसनीय रही। राजनीति में आने से पहले वह हास्य कलाकार रहे हैं। इसके अलावा नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह आज वैश्विक राजनीति में जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं।
नेपाल में युवा आंदोलन के दरम्यान शाह को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला था। वह पेशे से गीतकार रहे हैं। सत्ता पक्ष के खिलाफ माहौल बनाने में उनके गीतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बालेन शाह अब अमेरिका, चीन और भारत जैसे बड़े देशों संग भी आसानी से बातचीत करने को राजी नहीं हैं। उनका पूरा फोकस नेपाल की आंतरिक व्यवस्थाओं को सुधारने पर है। इसी प्रकार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सियासत में आने से पहले कॉमेडियन रहे हैं। स्टैंड अप कॉमेडी के जरिए उन्होंने करियर की शुरुआत की थी, मगर आम आदमी पार्टी (आप) संग जुड़ने के उपरांत भगवंत मान की किस्मत एकाएक पलट गई।
पिछले चार साल से वह सीएम पद के दायित्व का बखूबी ढंग से निर्वहन कर रहे हैं। खैर तमिलनाडु विस चुनाव में टीवीके के प्रदर्शन ने देश की राजधानी तक सियासी हलचल पैदा कर दी है। तमिलनाडु का सियासी इतिहास द्रविड़ आंदोलन, सामाजिक न्याय और सिनेमाई प्रभाव का अनूठा मिश्रण है।
करियर के पीक पर राजनीति में एंट्री
पिछले लगभग छह दशक से इस राज्य में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) का वर्चस्व रहा है, जिसने किसी समय कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया। यह राजनीति हिंदी-विरोधी आंदोलन, तमिल पहचान और एमजीआर-जयललिता जैसे फिल्म सितारों के करिश्मे पर आधारित रही है। इक्यावन साल के जोसेफ विजय का फिल्मी करियर फिलवक्त पीक पर है।
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ऐसे समय में उन्होंने जिस समझदारी का परिचय दिया, वह उनके लिए लाभकारी रहा है। आमतौर पर चर्चित अभिनेता उस समय राजनीति में प्रवेश करते हैं, जब वह फिल्मी करियर के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके होते हैं। तब आम जनता में उनके प्रति पहले जैसा क्रेज नहीं रहता। तमिलनाडु की जनता को विजय से ढेरों उम्मीदें हैं। जनता को उनके भीतर असली नायक नजर आता है।
जनता की उम्मीदों पर वह कितने खरे उतरते हैं, यह भविष्य में मालूम पड़ जाएगा। फिलहाल डीएमके और एआईएडीएमके जैसे पुराने दलों में मायूसी का आलम है। ये दल राज्य की जनता के मूड को भांपने में असफल रहे हैं।

