अधूरा ज्ञान और सोशल मीडिया का गदर! क्या भारत में भी होने वाला है बांग्लादेश जैसा हाल
‘अधूरा ज्ञान हमेशा हानिकारक होता है।’ आमतौर पर सत्ता विरोधी पक्ष किसी गंभीर मसले को ठीक से समझे बगैर सियासत शुरू कर देता है। ऐसा कर वह खुद को बुद्धिमान साबित करने की भरसक कोशिश करता है।
देश में ताजा मामला ‘कॉकरोच’ शब्द पर जारी राजनीति का है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आजकल सोशल मीडिया पर गदर मचा रखा है। सीजेपी के फॉलोअर्स की संख्या आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ रही है। यह कोई सियासी पार्टी नहीं बल्कि सत्ता विरोधी खेमे की दिमागी उपज का आईडिया है। इस बीच बहती गंगा में हाथ धोने से कुछ सेलिब्रिटिज भी पीछे नहीं हैं। वह मौके को भुनाने की फिराक में जुट गए हैं। अभिनेता शेखर सुमन और प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर अपने-अपने अंदाज में तंज कसा है।
आम खाते हुए प्रकाश राज का वीडियो वायरल
शेखर सुमन ने कहा कि दुनिया के कॉकरोच को यूनाइट हो जाना चाहिए क्योंकि दुनिया खत्म हो जाएगी, पर ये खत्म नहीं होंगे। जबकि प्रकाश राज ने एक वीडियो बनाकर पोस्ट किया। इस वीडियो में वह आम का लुत्फ उठा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि कॉकरोच आम ऐसे खाते हैं। वीडियो के साथ पीएम मोदी और अभिनेता अक्षय कुमार की फोटो भी पोस्ट की गई है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई कर देश के बेरोजगार युवाओं और फर्जी डिग्री धारकों को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ बताया था, और कहा था कि ये मीडिया, सोशल मीडिया और आईटी में घुसकर सिस्टम पर हमला करते हैं। इसी के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी शुरू की गई। भाजपा को सीजेपी के पीछे विदेशी साजिश दिखाई दे रही है। सीजेपी ने नीट और सीबीएसई जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाई।
इसके अलावा सीबीएसई रिचेकिंग फीस खत्म करने की मांग की और विद्यार्थियों से बोर्ड की गलती का फैसला वसूलने को भ्रष्टाचार बताया है। यानी व्यंग के बीच पार्टी शिक्षा, बेरोजगारी और सिस्टम की जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी हवा देने लग गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि देश में पिछले कुछ साल से अभिव्यक्ति की आजादी का गलत इस्तेमाल करने का प्रचलन बढ़ा है।
महामहिम राष्ट्रपति हों या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, उन्हें भी खुलकर ट्रोल करने से सोशल मीडिया यूजर्स बाज नहीं आते हैं। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी जिस प्रकार की अशोभनीय एवं अपमानजनक टिप्पणी निरंतर करते रहते हैं, वह भी अच्छी बात नहीं है। लोकतंत्र में सरकार या जनप्रतिनिधि का विरोध करने व अपनी बात खुलकर रखने की पूरी आजादी होती है, मगर इसका मतलब यह नहीं कि जिसका जो मन करे, वह बगैर डर भय के करने लगे।
क्या भारत बन रहा बांग्लादेश?
पाकिस्तान और बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठन अक्सर अपनी बात मनवाने के लिए अदालतों के खिलाफ सड़कों पर उतरते देखे जा सकते हैं। बांग्लादेश में हिंसा के दौर में उग्र भीड़ को न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक बातें बोलते और सुप्रीम कोर्ट के भीतर और बाहर हुड़दंग मचाते देखा गया था। हालांकि भारत की स्थिति पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी बेशक न हो, मगर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो हालात पेचीदा होने में देर नहीं लगेगी। सीजेआई ने जिस संदर्भ में कॉकरोच संबंधी टिप्पणी की थी, उसे ठीक से जाने बिना बात का बतंगड़ बना देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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उधर, कॉकरोच जनता पार्टी के बहाने विपक्ष आपदा में अवसर तलाशने में जुट गया है। विपक्ष को सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का नया मुद्दा मिल चुका है।

