गरीब दाने-दाने को मोहताज, नेता सरकारी बंगले के लिए लड़ रहे! बिहार की सबसे शर्मनाक लड़ाई
सरकारी आवास किसी की ‘बपौती’ नहीं है। पद छोड़ने के बाद आवास खाली करना चाहिए। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की यह टिप्पणी सियासी जंग का कारण बन चुकी है। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बयान दिया था कि वह स्वेच्छा से बंगला खाली नहीं करेंगी। यदि सरकार चाहती है तो उन्हें जबरन हटाकर आवास खाली करा सकती है। दरअसल बिहार में आजकल सरकारी ‘बंगला’ सियासत के केंद्र में है।
आमने-सामने आए दो दल
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। बिहार में भाजपा गठबंधन की सरकार है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार का संचालन हो रहा है। भाजपा तथा जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की अटूट दोस्ती लंबे समय से राजद पर भारी पड़ रही है। जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने कुछ दिन पहले स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद को छोड़ दिया था। इसके बाद यह जिम्मेदारी सम्राट चौधरी को सौंपी गई थी। राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया है। जिस पर राजद खेमा एकाएक हमलावर मुद्रा में है।
पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की धर्मपत्नी राबड़ी देवी इस समय विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व निभा रही हैं। राबड़ी ने सरकारी आवास खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते यह विवाद गहरा गया है। बंगला खाली कराने के लिए सरकार अब पुलिस बल का सहयोग ले सकती है। इस पूरे प्रकरण में लालू परिवार के लिए एक अच्छी बात यह है कि तेज प्रताप यादव भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विरोध में उतर चुके हैं। तेज प्रताप का काफी समय से अपने परिवार से मनमुटाव चल रहा है। नतीजन वह माता-पिता से अलग रह रहे हैं।
तेज प्रताप ने अपनाया आक्रामक रुख
तेज प्रताप ने हाल फिलहाल में जिस प्रकार का आक्रामक रवैया अपनाकर तीखे बयान दिए हैं, उससे यह संकेत मिलता है कि वह पारिवारिक मनमुटाव को पीछे छोड़कर नए रूप में आ गए हैं। राजद का आरोप है कि एनडीए गठबंधन के कई नेता ऐसे सरकारी आवास में रह रहे हैं, जिनके लिए वे पात्र नहीं हैं। राबड़ी देवी को राजनीतिक द्वेष के कारण निशाना बनाया जा रहा है। देश में सरकारी आवास के प्रति नेताओं और अधिकारियों का मोह किसी से छिपा नहीं है। पात्र न होने के बावजूद नेता और अधिकारी आसानी से सरकारी सुख-सुविधाओं को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते हैं।
देश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब बंगले खाली कराने को पुलिस बल का प्रयोग करना पड़ा। जिस देश में लाखों-करोड़ों नागरिक आज भी एक अदद आशियाने की आस में दिन-रात संघर्षरत हैं, वहां नेताओं और रिटायर्ड अधिकारियों द्वारा सरकारी आवास खाली करने से मना करना दुर्भाग्यपूर्ण है। बिहार में एक समय वह था जब लालू यादव परिवार का डंका बजा करता था। लालू यादव की जनता पर मजबूत पकड़ थी।
UP में घर बनाने वाले सावधान! सरकार बदलने जा रही है ये नियम, वरना लग सकता है बड़ा झटका!
हालांकि लालू राज में इस राज्य का विकास होने की बजाए विनाश ज्यादा हुआ। लालू के करीबियों ने खूब मनमानी की। राजद शासन में अपराध चरम पर रहे। हत्या, लूट, डकैती, अपहरण एवं रंगदारी की वसूली का खेल खुलेआम चलता था। सत्ता की कमान नीतीश कुमार के हाथों में आने के बाद राज्य में बदलाव देखने को मिला। लालू और नीतीश कुमार इस समय बढ़ती उम्र के कारण पूरी ऊर्जा के साथ सक्रिय राजनीति करने में अक्षम दिखाई देते हैं। खैर राबड़ी देवी को इस मुद्दे पर तमाशा करने से बचना चाहिए। स्वेच्छा से बंगला खाली कर देने से वह सम्मान की हकदार होंगी।

