शादी के बाद मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाया तो अटक जाएंगे ये 8 बड़े काम, जानें क्यों है ये जरूरी
भारत में शादियां अक्सर बड़े ही धूमधाम और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ सात फेरे ले लेना या सामाजिक रूप से विवाह कर लेना ही कानून की नजर में काफी नहीं होता? शादी के बाद अक्सर लोग जिस एक सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज को नजरअंदाज कर देते हैं, वह है मैरिज सर्टिफिकेट (विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र)। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि शादी की खूबसूरत यादें भले ही आपकी तस्वीरों और एल्बम में सुरक्षित रहती हों, लेकिन आपके रिश्ते का सबसे मजबूत और एकमात्र आधिकारिक सरकारी प्रमाण मैरिज सर्टिफिकेट ही होता है। अगर आपकी शादी हो चुकी है और आपने अभी तक यह सर्टिफिकेट नहीं बनवाया है, तो भविष्य में आपके कई जरूरी और प्रशासनिक काम हमेशा के लिए अटक सकते हैं।
कानून की नजर में क्यों जरूरी है विवाह का पंजीकरण?
विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते को दी जाने वाली आधिकारिक और कानूनी मान्यता है। सरकारी रिकॉर्ड में आपके विवाह को प्रमाणित करने के लिए यह सबसे मुख्य दस्तावेज है। आज भी देश में एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है जो शादी के बाद मैरिज रजिस्ट्रेशन नहीं कराती। उन्हें लगता है कि समाज और परिवार के सामने हुई शादी ही पर्याप्त है। लेकिन जब जीवन में अचानक किसी कानूनी प्रक्रिया, पासपोर्ट या बैंकिंग से जुड़े कामों की बारी आती है, तब जाकर लोगों को इस जरूरी दस्तावेज की असली अहमियत समझ में आती है।
मैरिज सर्टिफिकेट न होने पर अटक सकते हैं ये 8 महत्वपूर्ण काम
यदि आपके पास शादी का कानूनी प्रमाण पत्र नहीं है, तो रोजमर्रा और भविष्य से जुड़े निम्नलिखित कार्यों में आपको बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है:
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पासपोर्ट बनवाने में: शादी के बाद यदि आप नया पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं या जीवनसाथी का नाम दर्ज कराना चाहते हैं, तो यह दस्तावेज अनिवार्य होता है।
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वीजा आवेदन (Visa Application): यदि आप शादी के बाद विदेश यात्रा पर जाना चाहते हैं या पार्टनर के साथ दूसरे देश में सेटल होना चाहते हैं, तो बिना मैरिज सर्टिफिकेट के वीजा मिलना नामुमकिन है।
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जॉइंट बैंक अकाउंट (Joint Bank Account): बैंकों में पति-पत्नी के रूप में संयुक्त खाता खुलवाने के लिए इसे प्राथमिक लीगल डाक्यूमेंट माना जाता है।
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इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी: अपनी हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों में जीवनसाथी को बतौर नॉमिनी (उम्मीदवार) जोड़ने के लिए कंपनियां इसकी मांग करती हैं।
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प्रॉपर्टी और उत्तराधिकार के दावे: भविष्य में यदि किसी वजह से संपत्ति, वसीयत या उत्तराधिकार से जुड़े अधिकारों का कानूनी दावा करना पड़े, तो इसके बिना आपका पक्ष कमजोर हो सकता है।
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दस्तावेजों में नाम और पता बदलना: शादी के बाद महिलाओं को अपने पैन कार्ड, वोटर आईडी और अन्य सरकारी पहचान पत्रों में नाम, सरनेम या पता बदलने के लिए इसकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है।
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सरकारी योजनाओं का लाभ: सरकार द्वारा विवाहित जोड़ों या परिवारों के लिए चलाई जाने वाली कई कल्याणकारी योजनाओं और पारिवारिक लाभों का फायदा उठाने के लिए यह बेहद जरूरी है।
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बैंकिंग और जमा राशि पर दावा: किसी अनहोनी की स्थिति में पार्टनर के बैंक अकाउंट में जमा राशि या निवेश पर कानूनी हक जताने के लिए यह एक मजबूत आधार साबित होता है।
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समय रहते पंजीकरण कराना ही सबसे बड़ी समझदारी
कानूनी और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि शादी को सिर्फ एक सामाजिक और धार्मिक बंधन मानने के बजाय एक कानूनी जिम्मेदारी के रूप में भी देखा जाना चाहिए। समय रहते विवाह का पंजीकरण करा लेना न सिर्फ आपकी नई पहचान को कानूनी सुरक्षा देता है, बल्कि भविष्य में आने वाली कई अदालती और प्रशासनिक पेचीदगियों से भी आपको सुरक्षित रखता है। इसलिए अगर आपकी शादी हो चुकी है, तो इस काम को आगे टालने की गलती बिल्कुल न करें और जल्द से जल्द अपने नजदीकी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना मैरिज सर्टिफिकेट जरूर बनवा लें।

