आपकी वो गलतियां जो शरीर में बना देती हैं कैंसर, स्टेज 2 से जूझ रहीं ये एक्ट्रेस
टेलीविजन के मशहूर धारावाहिक ‘ससुराल सिमर का’ से घर-घर में पहचान बनाने वाली मशहूर अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ इन दिनों अपनी जिंदगी की सबसे कठिन जंग लड़ रही हैं। कैमरे की चकाचौंध से दूर दीपिका ‘स्टेज 2 लिवर कैंसर’ जैसी जानलेवा बीमारी का सामना कर रही हैं।
पिछले साल उन्हें 14 घंटे लंबी एक बेहद जटिल सर्जरी से गुजरना पड़ा था, जिसके बाद अब वे इम्यूनोथेरेपी के बेहद थकाऊ और दर्दनाक दौर से गुजर रही हैं। उल्टी-मतली, शरीर का टूटना और बिस्तर से न उठ पाने की शारीरिक लाचारी के बीच उन्हें सोशल मीडिया पर बेरहम बॉडी शेमिंग का भी शिकार होना पड़ा।
‘मैं कोई सुपरवुमन नहीं हूं’—बॉडी शेमिंग पर ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब
बीमारी, हेवी स्टेरॉयड और दवाओं के साइड इफेक्ट्स की वजह से बढ़े वजन को लेकर सोशल मीडिया पर दीपिका को भद्दे कमेंट्स और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे अपने लेटेस्ट ब्लॉग में दीपिका ने इन ट्रोलर्स को आईना दिखाते हुए कहा कि उनकी जिंदगी में ऐसा दौर आया जब वजन तेजी से बढ़ा और उन्हें गंभीर बॉडी शेमिंग झेलनी पड़ी। उस नाजुक वक्त में वे वजन घटाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं थीं। दीपिका ने साफ लफ्जों में कहा कि वे कोई सुपरवुमन नहीं हैं; जिस दिन तबीयत बिगड़ती है, वे सिर्फ बिस्तर पर पड़ी रहती हैं। उन्होंने दो-टूक कहा कि उन्हें अपने बढ़े वजन से कभी कोई ऐतराज नहीं रहा, वे मोटी थीं और खुश थीं। उन्होंने दुनिया की नकारात्मकता को दरकिनार करते हुए खुद से प्यार करने की नसीहत दी।
आसान भाषा में समझिए: आखिर क्या होता है कैंसर?
मानव शरीर खरबों सूक्ष्म कोशिकाओं (सेल्स) से मिलकर बना है। सामान्य प्रक्रिया के तहत पुरानी कोशिकाएं नष्ट होती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं लेती हैं। जब शरीर के किसी हिस्से में यह प्राकृतिक जैविक नियंत्रण गड़बड़ा जाता है, तो पुरानी कोशिकाएं मरती नहीं हैं और असामान्य रूप से अनियंत्रित नई कोशिकाएं बनने लगती हैं। यही अतिरिक्त कोशिकाएं एकत्रित होकर गांठ या ट्यूमर का रूप धारण कर लेती हैं, जिसे चिकित्सीय भाषा में कैंसर कहा जाता है। दीपिका के मामले में यह खतरनाक ट्यूमर उनके लिवर में विकसित हुआ था।
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कैंसर होने के मुख्य कारण: लाइफस्टाइल से लेकर जेनेटिक्स तक
कैंसर किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई मिले-जुले कारकों से पनपता है।
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खानपान और जीवनशैली: प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड उत्पाद, केमिकल युक्त सब्जियां और मोटापा शरीर में अंदरूनी सूजन (इंफ्लेमेशन) बढ़ाते हैं, जो कैंसर का प्रमुख कारण बनता है।
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नशा और शराब: तंबाकू, सिगरेट और अत्यधिक शराब का सेवन लिवर सिरोसिस का कारण बनता है, जो आगे चलकर लिवर कैंसर में बदल जाता है।
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जेनेटिक्स और संक्रमण: परिवार के डीएनए में कैंसर की हिस्ट्री होने के अलावा हेपेटाइटिस बी और सी जैसे पुराने वायरल संक्रमण लिवर कैंसर को ट्रिगर करते हैं।
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पर्यावरण प्रदूषण: हवा में मौजूद कार्सिनोजेन्स (कैंसरकारी तत्व) और हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) रेडिएशन भी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां: सर्जरी से लेकर इम्यूनोथेरेपी तक
आज के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में स्टेज 1 और स्टेज 2 में पहचान होने पर कैंसर का सफल उपचार संभव है। मुख्य उपचार विकल्पों में सर्जरी के जरिए ट्यूमर को काटकर अलग किया जाता है, जैसा दीपिका के मामले में 14 घंटे के ऑपरेशन में किया गया। इसके अलावा कीमोथेरेपी द्वारा कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है, जिसके बाल झड़ने और कमजोरी जैसे साइड इफेक्ट्स होते हैं। रेडिएशन थेरेपी में हाई-एनर्जी एक्स-रे से ट्यूमर को सिकाई कर नष्ट किया जाता है। वहीं सबसे आधुनिक तकनीक ‘इम्यूनोथेरेपी’ है, जिसमें मरीज के खुद के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को इतना सक्रिय कर दिया जाता है कि शरीर खुद कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर खत्म करने लगता है।
दुनियाभर में कैंसर के आंकड़े: विकसित देश क्यों हैं आगे?
वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड (WCRF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, कैंसर की सर्वाधिक दर उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के विकसित देशों—जैसे डेनमार्क, अमेरिका, फ्रांस और बेल्जियम में दर्ज है। इसका मुख्य कारण वहां की वृद्ध आबादी (एजिंग पॉपुलेशन), पश्चिमी जीवनशैली (रेड मीट, स्मोकिंग, शराब) और वहां की बेहद उन्नत स्क्रीनिंग व्यवस्था है, जिससे शुरुआती केस तुरंत पकड़ में आ जाते हैं। इसके विपरीत, भारत और एशियाई देशों में प्रति लाख जनसंख्या पर मामले कम दिखने के बावजूद, स्वास्थ्य जागरूकता की कमी और देर से डायग्नोसिस होने के कारण मृत्यु दर का आंकड़ा बेहद चिंताजनक बना हुआ है।

