“सब पुरानी बातें भूल जाएंगे…” राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश का खुला ऑफर, क्या पलटेगी बाजी
उत्तर प्रदेश में होने जा रहे राज्यसभा इलेक्शन ने सूबे का सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ा दिया है। कुल 10 सीटों पर होने वाले इस इलेक्शन में सबसे बड़ी जंग और सस्पेंस 10वीं सीट को लेकर है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि क्या यह अहम सीट समाजवादी पार्टी (SP) के खाते में जाएगी या फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) 2024 के इलेक्शन की तरह ही कोई नया इतिहास रचेगी। इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी विधायकों के संपर्क में होने का दावा करते हुए एक ऐसा बयान दिया है जिसने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है।
‘राज्यसभा इलेक्शन मिलन का समय है’
अखिलेश यादव ने इस राज्यसभा इलेक्शन को ‘मिलन का समय’ करार दिया है। उन्होंने विरोधी दलों के विधायकों को सीधा आमंत्रण देते हुए कहा कि यह पुरानी गलतियों को भुलाकर सिद्धांतों के साथ खड़े होने का बेहतरीन मौका है। सपा प्रमुख ने महंगाई, अर्थव्यवस्था, संविधान पर कथित खतरे और पेट्रोल में एथेनॉल मिलाए जाने जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए अपील की है कि जिन्हें भी ये फैसले गलत लगते हैं, उनके लिए अब साथ आने का वक्त आ गया है।
निशाने पर पुराने सहयोगी और बागी विधायक
सियासी जानकारों की मानें तो अखिलेश यादव का यह बयान केवल विरोधियों के लिए नहीं, बल्कि उन पुराने सहयोगियों के लिए भी है जो 2022 के विधानसभा इलेक्शन के बाद उनका साथ छोड़ गए थे। इनमें राष्ट्रीय लोक दल (RLD), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) और लगातार विरोध के सुर अपना रहीं सपा विधायक व अपना दल कमेरावादी नेता पल्लवी पटेल का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। अखिलेश ने स्पष्ट किया है कि जो साथी रास्ता भूल गए हैं और वापस लौटना चाहते हैं, उनके लिए सपा सभी पुरानी कड़वाहटें भुलाने को तैयार है।
तीसरे उम्मीदवार पर अखिलेश का ‘सरप्राइज’ दांव
साल 2024 के राज्यसभा इलेक्शन में समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा था जब उसके सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसका नतीजा यह हुआ कि सपा के तीसरे उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी अपने आठवें उम्मीदवार को जिताने में सफल रही। अब 2026 के इस इलेक्शन में भी बीजेपी आठ उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। वहीं, अखिलेश यादव ने अपने तीसरे उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा है और इसे एक ‘सरप्राइज’ बताया है।
UP की 403 सीटों का वो खौफनाक गणित, जिसने सपा-कांग्रेस गठबंधन को टूटने की कगार पर ला खड़ा किया
माना जा रहा है कि सपा अध्यक्ष पहले संख्या बल को पूरी तरह से अपने पक्ष में संतुलित करेंगे, उसके बाद ही तीसरे नाम का ऐलान किया जाएगा। दूसरी ओर, 6 अक्टूबर तक चलने वाली नामांकन प्रक्रिया के बावजूद बीजेपी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के पत्तों को पूरी तरह से नहीं खोला है। इस शह-मात के खेल में 10वीं सीट का नतीजा ही यूपी की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

