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अखिलेश का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: 19 लाख फर्जी वोटरों का दावा, गिनाईं BJP की ’10 चुनावी चालें’

उत्तर प्रदेश की सियासत में मतदाता सूची और निष्पक्ष चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बेहद तीखा रुख अख्तियार कर लिया है। गुरुवार को लखनऊ स्थित सपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी और भारतीय चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप जड़ा। अखिलेश ने दो टूक शब्दों में कहा कि जमीनी स्तर पर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो सिर्फ भाजपा से जुड़े लोगों को ही देश का नागरिक और मतदाता माना जा रहा हो, जबकि विपक्ष के समर्थकों के नाम साजिशन काटे जा रहे हैं।

भाजपा की ’10 चुनावी चालें’ और हार का डर

सपा सुप्रीमो ने प्रेस वार्ता के दौरान सिलसिलेवार तरीके से भाजपा की कथित ’10 चुनावी चालों’ को उजागर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ना, विरोधी दलों के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाना, पोलिंग बूथों पर बंदूक के दम पर खौफ बनाना, ईवीएम की सेटिंग, वोटों की गिनती में गड़बड़ी, हारे हुए प्रत्याशी को जबरन जीत का प्रमाणपत्र दिलाना, विपक्षी गठबंधन में दरार डालना और विधायकों-नेताओं को तोड़कर सरकार बनाना भाजपा का नियमित फॉर्मूला बन चुका है। अखिलेश के अनुसार, भाजपा जब भी जमीनी स्तर पर जनता के बीच कमजोर पड़ने लगती है, तुरंत चुनाव आयोग की आड़ में छिप जाती है।

19 लाख फर्जी वोटर और जिलों के आंकड़े

अखिलेश यादव ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने अपनी पड़ताल में राज्यभर से कुल 19 लाख फर्जी मतदाताओं को चिह्नित किया है। उन्होंने विशिष्ट विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में 15 हजार और साहिबाबाद में 13 हजार संदिग्ध नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए गए हैं। इसी तरह मुरादाबाद सीट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सपा वहां महज 722 वोटों से हारी थी, जिसके बाद वहां 8 हजार से अधिक फर्जी वोट जोड़ दिए गए। आजमगढ़ में एक ही युवक के नाम पर 10 वोट बनने और सरोजनी नगर में दशरथ नाम से 100 से अधिक फॉर्म भरे जाने जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

एसआईआर प्रक्रिया और बीएलओ की मौत का मामला

मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया पर बात करते हुए सपा मुखिया ने कहा कि इस भारी दबाव और अनियमितताओं वाली प्रक्रिया में 29 बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 87 लाख फॉर्म-6 जमा हुए, जिनमें से 84 हजार नाम जोड़े गए, लेकिन महज 67 हजार की सूची ही सार्वजनिक की गई और शेष ब्योरा दबा लिया गया। अखिलेश ने सवाल दागा कि जब सरकार के पास पूरा तकनीकी डेटा मौजूद है, तो निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वोटर आईडी को आधार से लिंक क्यों नहीं किया जा रहा है।

उपचुनाव में हेराफेरी बनाम 403 विधानसभाओं की लड़ाई

अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि उपचुनावों में प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग से भले ही ‘चार सौ बीसी’ कर ली गई हो, लेकिन आगामी 403 विधानसभा सीटों के चुनाव में ऐसा बिल्कुल नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में धरना और विरोध प्रदर्शन जनता का संवैधानिक अधिकार है, और राजनीतिक दल जहां बैठ जाएंगे, वहीं जंतर-मंतर बन जाएगा। आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से संज्ञान लिए जाने के बाद चुनाव आयोग को नैतिक आधार पर तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

17 और 24 अक्टूबर को सपा कार्यकर्ताओं का पहरा

सपा अध्यक्ष ने पार्टी पदाधिकारियों और बूथ कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा 17 और 24 अक्टूबर को चलाए जा रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान हर कार्यकर्ता को बूथ पर डटकर रहना होगा। कार्यकर्ताओं का मुख्य दायित्व यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी वैध मतदाता, विशेषकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लोगों के नाम न कटें और किसी भी फर्जी व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज न होने पाए।

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मंच पर ‘पांच भगवानों’ का अनूठा सियासी संयोग

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रोचक सियासी घटनाक्रम भी देखने को मिला। गोंडा के वरिष्ठ नेता भवानी शुक्ला अपने पांच बेटों—श्री भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। इस पर चुटकी लेते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी कार्यालय में पहली बार एक साथ इतने ‘भगवान’ पधारे हैं, जिनका नाम सनातनी परंपरा में हमेशा सम्मान से लिया जाता है। इसके अलावा मेरठ के पूर्व बसपा नेता मनमोहन सिंह सैनी, विनय पुरारी सहित कई अन्य नेताओं ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की।

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