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धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले पढ़ लें ये 5 नियम, वरना लग सकता है लाखों का चूना

दिवाली और धनतेरस का पावन पर्व आते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है और ज्वेलरी शोरूम ग्राहकों से गुलजार हैं। कोई अपनी पत्नी के लिए हार तो कोई मां के लिए अंगूठी या सोने का सिक्का खरीदने की तैयारी कर रहा है। भारतीय परंपरा में धनतेरस के दिन सोना और चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, मगर त्योहार की इस खुशी और जल्दबाजी में कहीं आपकी मेहनत की कमाई पर कोई पानी न फेर दे।

सोना खरीदना सिर्फ अपनी पसंद का गहना चुनकर पैसे चुकाने का काम नहीं है, बल्कि इसके लिए उसकी शुद्धता, वजन, हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज और पक्का बिल जैसी पांच अहम बातों की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है। जरा सी लापरवाही आपको तगड़ा नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए खरीदारी करने से पहले इन जरूरी बिंदुओं को अच्छी तरह समझ लें।

1. हॉलमार्क और HUID की जांच जरूर करें

ज्वेलरी शॉप में जाते ही गहना पसंद आने पर उसे खरीदने की जल्दबाजी बिल्कुल न दिखाएं। सबसे पहले उस पर लगे बीआईएस (BIS) हॉलमार्क की बारीकी से जांच करें। असली हॉलमार्क वाले गहने पर बीआईएस का आधिकारिक लोगो, शुद्धता का निशान और छह अंकों का एक खास HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर होना जरूरी है। यह नंबर हर गहने की पहचान से जुड़ा होता है। केवल गहने पर मुहर देखकर संतुष्ट न हों, बल्कि अपने स्मार्टफोन में BIS Care App खोलें और उसमें ‘Verify HUID’ विकल्प के जरिए उस नंबर की ऑनलाइन जांच करें। इससे आपको गहने की असलियत परखने में पूरी मदद मिलेगी।

2. कैरेट और शुद्धता का सही हिसाब समझें

खरीदारी के दौरान दुकानदार से स्पष्ट रूप से पूछें कि आप जो ज्वेलरी खरीद रहे हैं, वह कितने कैरेट की है। आमतौर पर 22 कैरेट सोने पर ‘916’ और 18 कैरेट सोने पर ‘750’ की फाइननेस मार्किंग की जाती है।

इसका सीधा मतलब है कि 22 कैरेट सोने में लगभग 91.6 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है, जबकि 18 कैरेट में 75 प्रतिशत शुद्धता होती है और बाकी हिस्सा अन्य धातुओं का मिला होता है। केवल गहने के रंग या उसकी चमक को देखकर उसकी शुद्धता का अंदाजा कभी न लगाएं। दुकानदार से कैरेट की सही जानकारी लें और यह भी सुनिश्चित करें कि जो शुद्धता आपको बताई जा रही है, वही पक्के बिल में दर्ज हो।

3. गहने का कुल वजन और पत्थरों का हिसाब परखें

मान लीजिए कि आपने इस धनतेरस पर एक बेहद खूबसूरत हार खरीदा है, जिसमें सोने के साथ-साथ नग, मोती या अन्य कीमती पत्थर भी जड़े हुए हैं। ऐसे में यह जानना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि उस गहने का कुल वजन कितना है और उसमें असली सोने का शुद्ध वजन कितना है। हमेशा दुकानदार से साफ-साफ पूछें कि जड़े हुए पत्थरों का वजन अलग से कितना है और सोने की कीमत किस वजन के आधार पर तय की जा रही है। चूंकि आप भुगतान केवल सोने के लिए कर रहे हैं, इसलिए आपको यह पता होना चाहिए कि आप वास्तव में कितने ग्राम सोना खरीद रहे हैं। वजन का हिसाब पारदर्शी होने पर अतिरिक्त भुगतान की आशंका लगभग खत्म हो जाती है।

4. मेकिंग चार्ज और जीएसटी की पहले ही करें बात

कई बार ग्राहक अपनी पसंद का गहना चुनते हैं, सोने का वजन देखते हैं और कीमत चुकाकर बाहर आ जाते हैं, मगर मेकिंग चार्ज के बारे में पूछना भूल जाते हैं। गहने को तराशने और डिजाइन करने की लागत को ही मेकिंग चार्ज कहा जाता है, जो अलग-अलग डिजाइन और ज्वेलर्स के हिसाब से भिन्न हो सकता है। इसलिए खरीदारी करने से पहले ही यह स्पष्ट कर लें कि मेकिंग चार्ज प्रति ग्राम लिया जा रहा है या फिर कुल कीमत पर प्रतिशत के हिसाब से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, जीएसटी और अन्य शुल्कों की जानकारी भी पहले ही ले लें ताकि बिल बनवाते समय आपको किसी भी प्रकार का झटका न लगे।

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5. पक्का बिल और एक्सचेंज की शर्तें लेना न भूलें

अक्सर लोग गहना पसंद करके पैसे देते हैं और बिना बिल की ठीक से जांच किए दुकान से बाहर निकल जाते हैं, जो कि एक बहुत बड़ी गलती है। आपके द्वारा लिए जाने वाले पक्के बिल में गहने का सटीक वजन, कैरेट शुद्धता, सोने की प्रति ग्राम कीमत, मेकिंग चार्ज और टैक्स का पूरा ब्यौरा साफ-साफ लिखा होना चाहिए। इसके साथ ही, भविष्य में उस गहने को वापस बेचने (Buyback) या एक्सचेंज करने के नियम और शर्तें भी दुकान से पहले ही समझ लें। याद रखिए कि बिल केवल एक रसीद नहीं है, बल्कि भविष्य में किसी भी परेशानी या जरूरत के समय आपके काम आने वाला एक बेहद जरूरी लीगल डॉक्यूमेंट है। इस धनतेरस और दिवाली पर सोना जरूर खरीदें, मगर पूरी सतर्कता के साथ, ताकि आपके त्योहार की खुशियां हमेशा दोगुनी बनी रहें।

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