यूपी का अब तक का सबसे बड़ा बजट, पर अखिलेश ने क्यों कहा- ये किसानों के लिए आफत
Akhilesh On UP budget 2026: यूपी की योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का सबसे बड़ा बजट पेश किया है, जिसका आकार 9,12,696.35 करोड़ रुपये है। यह बजट बुधवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा प्रस्तुत किया गया। हालांकि, बजट के प्रस्तावों के बाद विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार पर कई सवाल उठाए हैं, विशेष रूप से किसानों और बेरोजगारी को लेकर।
जानें बजट के बाद अखिलेश क्या कहा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों को लेकर सरकार ने कोई ठोस योजना नहीं बनाई है। उन्होंने खासतौर पर व्यापारिक नजरिए से भारत-अमेरिका ट्रेड डील का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस डील में ढील दी गई है, जो उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है। आने वाले वक्त में ये बजट किसानों के लिए आफत बन सकता है।
अखिलेश ने कहा कि कई कृषि उत्पादों का आयात होगा, जैसे कि एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स और एनिमल फीड। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे में राज्य में कृषि से जुड़े विभागों का क्या होगा और किस प्रकार के संसाधन किसानों को उपलब्ध होंगे।
अखिलेश यादव ने एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर भी सरकार से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि राज्य में धान, गेहूं, आलू और गन्ने की फसलों पर एमएसपी की जो बातें की गई थीं, वह धरातल पर नहीं उतरीं। उनके मुताबिक, सरकार ने किसानों को अच्छे समर्थन का आश्वासन दिया था, लेकिन हकीकत यह है कि वे इसे लागू नहीं कर पाई।
बेरोजगारी के मसले पर भी बोले सपा प्रमुख
बेरोजगारी के मसले पर भी अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बजट में बेरोजगारी को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उनका कहना था कि सरकार के पास न तो बेरोजगारी दूर करने की कोई स्पष्ट योजना है, न ही रोडमैप। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब बड़े निवेश नहीं आ रहे हैं, तो राज्य सरकार किस तरह बेरोजगारी को समाप्त करने का दावा कर सकती है।
यूपी बजट 2026 में किसानों और युवाओं को तोहफा, ये चीजें होंगी सस्ती
अखिलेश ने तंज करते हुए कहा कि राज्य सरकार लाखों रोजगार देने का दावा कर रही है, लेकिन इन दावों के पीछे कोई वास्तविक योजना दिखाई नहीं दे रही है।
विपक्ष के नेताओं का यह कहना है कि योगी सरकार ने केवल आंकड़ों और योजनाओं के जरिये जनता को लुभाने की कोशिश की है, जबकि असल समस्याओं का हल दूर-दूर तक नहीं दिखता। सरकार का यह बजट जनता को राहत देने की बजाय उनकी वास्तविक समस्याओं से आंख मूंदने जैसा है।

