लाइफस्टाइल

Trained Search Dogs: कैसे काम करते हैं ये मूक रक्षक, उत्तरकाशी में पहली तैनाती

Trained Search Dogs: उत्तराखंड के धराली गांव में मंगलवार को आई तबाही (Uttarakhand disaster) ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। भयंकर बारिश के कारण अचानक आई भीषण बाढ़ (Dharali village flood) ने इलाके में भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे कई लोग मलबे में दब गए (people trapped in debris)।

इस आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्यों (relief and rescue operations) को और प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा राहत बल (National Disaster Relief Force, NDRF) ने अपने इतिहास में पहली बार शव खोजने वाले विशेष प्रशिक्षित कुत्तों (Trained Search Dogs) को तैनात करने का फैसला किया है।

राजधानी दिल्ली से इन प्रशिक्षित कुत्तों की एक जोड़ी को तुरंत हवाई मार्ग से (Dehradun airport) उत्तराखंड भेजा जाएगा ताकि मलबे में दबे हुए मृतकों (bodies buried in debris) को खोजने में मदद मिल सके। इसके अलावा राज्य के विभिन्न हिस्सों से 35 बचावकर्मियों की तीन टीमें (disaster relief teams) भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों (disaster affected area) में एक्टिव हो चुकी हैं। दो अन्य टीमें देहरादून हवाई अड्डे पर स्टैंडबाय पर हैं, जो शवों की निकासी (body removal) के लिए इंतजार कर रही हैं।

ये भी पढ़ें- रात में ही क्यों होते हैं हवाई हमले, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप

शव खोजी कुत्ते क्या होते हैं (NDRF body search dogs, cadaver dogs)

शव-संग्रह कुत्ते या कैडेवर डॉग्स को खास ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे मलबे, मिट्टी या कीचड़ में दबे मानव अवशेषों (human remains search) की गंध पकड़ सकें। ये कुत्ते विशेष रसायनों को सूंघने में सक्षम होते हैं जो सड़े हुए मानव शरीर से निकलते हैं। इनके प्रशिक्षण में यह भी शामिल होता है कि वे मानव अवशेषों को पशु अवशेषों से अलग पहचान सकें।

आपदाओं या दुर्घटनाओं के बाद जब मलबे के नीचे किसी के फंसे होने की संभावना होती है, तो इन कुत्तों की मदद से जल्दी और सही ढंग से शवों का पता लगाया जा सकता है। यही नहीं, पुलिस और अन्य एजेंसियां इन कुत्तों का इस्तेमाल हत्या या गुमशुदा मामलों (missing people in disaster) की जांच में भी करती हैं।

बचाव दल की तैयारी जोरों पर (disaster management, natural disaster rescue, search and rescue operations)

हाल ही में एनडीआरएफ ने लगभग छह शव खोजी कुत्तों को प्रशिक्षण दिया है, जिनमें मुख्य रूप से बेल्जियन मेलिनोइस (Belgian Malinois) और लैब्राडोर (Labrador dogs) नस्ल के कुत्ते शामिल हैं। प्रशिक्षण के लिए बल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर से एक विशेष प्रकार की गंध मंगवाई है, जो सड़े हुए मानव शरीर की गंध के समान होती है। यह उन्हें विभिन्न माहौल में, चाहे जंगल हो या शहरी क्षेत्र, मलबे में दबे शवों को खोजने में मदद करती है।

ये भी पढ़ें- टॉयलेट सीट से ज्यादा गंदा है आपका मोबाइल, जानिए कैसे करें सफ़ाई

एनडीआरएफ के अधिकारियों का कहना है कि इन कुत्तों की मदद से न केवल मलबे में दबे मृतकों का पता चलेगा, बल्कि परिवारों को उनके प्रियजनों की खोज में सांत्वना भी मिलेगी। साथ ही, जीवित बचे लोगों की खोज के लिए प्रशिक्षित अन्य कुत्ते भी आपदा क्षेत्र में भेजे गए हैं। (assistance to disaster victims, disaster area dog training)

2 thoughts on “Trained Search Dogs: कैसे काम करते हैं ये मूक रक्षक, उत्तरकाशी में पहली तैनाती

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *