Year Ender: 2025 की वो बड़ी घटनाएं जिसने मानवता को किया शर्मसार…
Yearender 2025: बीते बारह महीनों ने दुनिया के नक्शे पर अशांति की एक ऐसी लकीर खींची है जिसे मिटाना अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पूर्वी यूरोप के मैदानों से लेकर अफ्रीका के तपते रेगिस्तानों तक गोलियों की गूँज शांत नहीं हुई। मानवीय संकट गहराते जा रहे हैं और विस्थापन का आंकड़ा हर दिन एक नया रिकॉर्ड बना रहा है। शांति की तमाम कोशिशों के बाद भी 2025 का अंत एक अनिश्चित भविष्य की ओर इशारा कर रहा है।
यूक्रेन और रूस की अंतहीन जंग
साल 2022 में शुरू हुई यह लड़ाई 2025 के खत्म होने तक भी किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। हालाँकि इस साल कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज दिखी। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अमेरिका के साथ मिलकर एक नया शांति खाका पेश किया जिसे ’20 सूत्रीय योजना’ कहा गया। इसके बावजूद जमीन पर हालात नहीं बदले। सीमाओं के निर्धारण और सुरक्षा के वादों पर दोनों पक्ष अब भी अड़े हुए हैं जिसके चलते 2026 में भी इस मोर्चे पर शांति की संभावनाएं धुंधली ही नजर आती हैं।
गाजा की त्रासदी और मध्य पूर्व का उबलता संकट (major global conflicts in 2025)
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच का पुराना विवाद 2025 में अपने सबसे क्रूर दौर से गुजरा। गाजा पट्टी के हालात देखकर मानवीय संवेदनाएं सिहर उठती हैं। वहां भोजन और दवाइयों की भारी कमी के कारण आम नागरिकों का जीना दूभर हो गया है। वेस्ट बैंक और गाजा में भड़की इस आग ने न केवल स्थानीय स्तर पर तबाही मचाई बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है।
अफ्रीका के जख्म: सूडान और कांगो की दास्तान
अफ्रीका महाद्वीप इस साल दो बड़े जख्मों से जूझता रहा। सूडान में सरकारी सेना और अर्धसैनिक बल के बीच छिड़ा गृहयुद्ध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यह संघर्ष अब तक लाखों लोगों को बेघर कर चुका है। वहीं दूसरी ओर कांगो के पूर्वी हिस्से में विद्रोही गुट एम23 और सरकारी सेना के बीच लड़ाई जारी है। अमेरिका जैसे देशों की मध्यस्थता के बावजूद वहां नागरिकों की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही।
म्यांमार का अनसुलझा गृहयुद्ध
दक्षिण-पूर्व एशिया में म्यांमार की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सैन्य शासन और स्थानीय जातीय समूहों के बीच बढ़ती हिंसक झड़पों ने देश के बड़े हिस्से को अस्थिर कर दिया है। विस्थापित लोगों की बढ़ती संख्या और बुनियादी सुविधाओं का अभाव इस क्षेत्र में एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले चुका है।
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सीमाओं पर बढ़ती तल्खी और क्षेत्रीय तनाव
इन बड़े युद्धों के अलावा कुछ ऐसे भी क्षेत्र रहे जहाँ तनाव की चिंगारी बार-बार भड़कती रही। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर होने वाली झड़पों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाए। साथ ही साहेल क्षेत्र में चरमपंथी गुटों की बदमाशी ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा कर रखी है।
कुल मिलाकर 2025 ने हमें ये सिखाया कि आधुनिक हथियारों के इस दौर में शांति स्थापित करना कितना कठिन काम है।

