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PM Modi की विदेश यात्राओं पर खर्च हुए 362 करोड़, जानिए सबसे महंगी ट्रिप कौन सी रही

PM Modi की विदेश यात्राएं अक्सर चर्चा में रहती हैं और उनका प्रभावी नेतृत्व वैश्विक स्तर पर निरंतर बढ़ता जा रहा है। हालांकि, पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च (expenditure) को लेकर विपक्ष (opposition) निरंतर सवाल उठाता रहा है। इन यात्राओं का उद्देश्य न केवल भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों (international relations) को मजबूत करना होता है, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय (Indian community) के साथ संवाद स्थापित करना भी होता है।

हाल ही में राज्यसभा (Rajya Sabha) में साझा किए गए आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि 2021 से 2025 तक पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर 362 करोड़ रुपये (Rs 362 crore) खर्च हो चुके हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि इन यात्राओं पर इतना खर्च क्यों किया जा रहा है और क्या इसका सही उपयोग हो रहा है?

2021 से 2024 तक की यात्रा खर्च का विश्लेषण

विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के आंकड़ों के मुताबिक, पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर 2021 से 2024 के बीच कुल 295 करोड़ रुपये (Rs 295 crore) खर्च हुए। यह खर्च धीरे-धीरे बढ़ा है। 2021 में यह खर्च 36 करोड़ रुपये था, 2022 में 55 करोड़, 2023 में 93 करोड़ और 2024 में 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कोविड के बाद (post-Covid), पीएम की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रियता (activism) में बढ़ोतरी हुई है और इसके साथ ही खर्च भी बढ़ा है।

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यह बढ़ता खर्च यह भी दर्शाता है कि PM Modi अपने विदेश दौरे में विभिन्न वैश्विक मुद्दों (global issues) पर भारत का पक्ष मजबूत करने के लिए निरंतर सक्रिय हैं। परंतु क्या इस खर्च का उचित उपयोग हो रहा है? ये सवाल विभिन्न राजनीतिक हलकों में उभर रहा है।

2025 की शुरुआत: पीएम की महंगी विदेश यात्राएं

2025 में पीएम मोदी की विदेश यात्राओं की बात करें तो उन्होंने अब तक 14 देशों की यात्रा की है। इनमें से प्रमुख देश थे थाईलैंड, अमेरिका, सऊदी अरब, फ्रांस और श्रीलंका। इन देशों की यात्राओं पर कुल खर्च 66.8 करोड़ रुपये (Rs 66.8 crore) आया है। सबसे महंगा दौरा फ्रांस का रहा, जहां पर खर्च 25.5 करोड़ रुपये हुआ, वही अमेरिका, सऊदी अरब, थाईलैंड और श्रीलंका के दौरे पर क्रमशः 16.5 करोड़, 15.5 करोड़, 4.9 करोड़ और 4.4 करोड़ रुपये खर्च हुए।

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इन आंकड़ों से यह भी समझ आता है कि पीएम की यात्राओं का खर्च देश की प्राथमिकताओं और राजनयिक जरूरतों (diplomatic relations) के हिसाब से तय होता है, जो अक्सर वैश्विक राजनीति (global politics) और व्यापारिक अवसरों (business opportunities) को बेहतर बनाने की दिशा में होता है।

सबसे महंगी यात्रा इस देश की

अगर हम 2021 से 2025 तक के दौरों का हिसाब करें, तो पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा (US visit) सबसे महंगी रही है। पीएम मोदी ने अब तक अमेरिका का चार बार दौरा किया है, जिसमें कुल खर्च 74.44 करोड़ रुपये (Rs 74.44 crore) आया है। इसके बाद, फ्रांस (France visit) और जापान (Japan visit) की यात्राओं पर भी भारी खर्च हुआ है। फ्रांस में तीन यात्राओं पर 41.29 करोड़ रुपये और जापान में तीन बार के दौरे पर 32.96 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

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इन खर्चों के बारे में आलोचना (criticism) और समर्थन (support) दोनों ही होते रहे हैं। जहां सरकार का तर्क है कि इन यात्राओं से भारत को वैश्विक मंचों पर मजबूती मिलती है और व्यापारिक अवसर बढ़ते हैं, वहीं विपक्ष इसे आम जनता की सुविधाओं से काटकर एक बेवजह खर्च के रूप में देखता है।

जनता पर प्रभाव

PM नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं का खर्चीला सफर कई सवालों को जन्म देता है, खासकर तब जब देश में बेरोजगारी (unemployment), महंगाई (inflation) और अन्य सामाजिक समस्याएं गंभीर हो। विपक्ष का कहना है कि यदि यह पैसा सामाजिक कल्याण योजनाओं (social welfare schemes) और विकास कार्यों (development work) में लगाया जाता, तो जनता को अधिक लाभ मिलता।

हालांकि, ये भी सच है कि विदेश यात्राएं किसी भी देश के राजनयिक संबंधों (diplomatic relations) को मजबूत करने, व्यापारिक अवसरों (business opportunities) को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रभाव (country’s influence) बढ़ाने के लिए जरूरी होती हैं। ऐसे में यह सवाल बनता है कि क्या पीएम मोदी की यात्राओं पर होने वाला खर्च वास्तव में देश के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।