भारत ने कर दी डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा पूरी, अमेरिका हो जाएगा मालामाल
हाल के समय में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार में भारी तेजी देखी जा रही है जो न केवल दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी (India US Bilateral Trade) को मजबूत कर रहा है बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान शुरू हुई ये पहल अब और तेज़ हो गई है जिससे भारत के तेल और गैस आयात के पैटर्न में बदलाव आ रहा है।
जनवरी 2025 से जून 2025 के बीच भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल के आयात में 50% से ज्यादा की वृद्धि की है जो साफ़ बताता है कि दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में एक नई साझेदारी को आकार देना शुरू कर दिया है। ये कदम फरवरी 2025 में वाशिंगटन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुए समझौते का नतीजा माना जा रहा है जिसमें भारत ने अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों के आयात को बढ़ाकर 25 अरब डॉलर तक ले जाने का वादा किया था। साथ ही दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा है। (US tariffs)
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वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत के कच्चे तेल (crude oil import) के आयात में 114% की उछाल देखने को मिली जो बीते वर्ष की इसी अवधि से लगभग डबल है। जुलाई 2025 में इस आयात में और भी वृद्धि हुई जिससे अमेरिका का हिस्सा भारत के कुल तेल आयात में तीन फीसद से बढ़कर आठ प्रतिशत तक पहुंच गया है।
अमेरिका की ओर भारत का रुख क्यों
सिर्फ तेल ही नहीं तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के सिलसिले में भी अमेरिका की ओर भारत का रुख बढ़ा है। 2024-25 में LNG आयात लगभग दोगुना होकर 2.46 अरब डॉलर हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी LNG की कीमतें हेनरी हब बेंचमार्क पर आधारित होने के कारण यह भारतीय उपभोक्ताओं के लिए किफायती विकल्प बनती जा रही हैं। अमेरिका में LNG परियोजनाओं के विस्तार से भारतीय कंपनियां लंबे समय के अनुबंध के लिए अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं की तरफ आकर्षित हो रही हैं।
इस नई ऊर्जा साझेदारी का मतलब आम जनता के लिए भी बहुत बड़ा है। ऊर्जा की उपलब्धता और किफायती दरें घरेलू उद्योगों और रोजमर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही अमेरिका के साथ ऊर्जा संबंध बढ़ाने से भारत की वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है खासकर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत को होगा फायदा
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2030 तक भारत दुनिया में तेल की मांग बढ़ाने वाला सबसे बड़ा देश बनेगा और LNG की जरूरत भी भारी बढ़ेगी। ऐसे में अमेरिकी ऊर्जा के स्रोतों से जुड़े लंबे समय के समझौते न सिर्फ़ व्यापार बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम होंगे। इस सौदे से अमेरिका का खजाना भर जाएगा और भारत को भी फायदा होगा।

