पीएम बालेन शाह की कुर्सी पर मंडराया बड़ा संकट; हिंसा के 4 दिन बाद जागी सरकार, तीन की मौत से दहला पड़ोसी देश!
शांति और अमन के लिए पहचाने जाने वाले नेपाल में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। देश के कुछ हिस्सों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि प्रशासन को अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा है और अब सेना ने सड़कों पर उतरकर मोर्चा संभाल लिया है।
इस पूरे बवाल में अब तक तीन नागरिकों की जान जा चुकी है, जिसके बाद बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कर रही है। आइए समझते हैं कि आखिर पड़ोसी मुल्क में यह नौबत क्यों आई और इसका भारत पर क्या असर पड़ रहा है।
सावन, कांवड़ यात्रा और कैसे शुरू हुआ विवाद?
सावन का पवित्र महीना चल रहा है और भारत की ही तरह नेपाल में भी कांवड़ यात्रा बड़े हर्षोल्लास के साथ निकाली जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस ताजा हिंसा की जड़ कांवड़ यात्रा के दौरान हुआ एक विवाद ही है। दो अलग-अलग समुदायों के कार्यक्रमों के बीच झंडे लहराने और लाउडस्पीकर बजाने को लेकर दूसरे समुदाय द्वारा अड़ंगा लगाया गया। बात इतनी बढ़ गई कि एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इस घटना के बाद उग्र भीड़ सड़कों पर उतर आई और जमकर बवाल काटा। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें दो अन्य लोगों की भी मौत हो गई। नतीजा यह हुआ कि मामला शांत होने की बजाय पूरे इलाके में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे।
पीएम बालेन शाह की सुस्त कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस भयानक हिंसा ने नेपाल की वर्तमान बालेन शाह सरकार की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का सीधा आरोप है कि जब स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो गई, तब जाकर सरकार नींद से जागी। दो समुदायों के बीच टकराव शुरू होने के पूरे चार दिन बाद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई।
गौरतलब है कि एक साल पहले नेपाल में ‘जैन जेड’ (Gen Z) युवाओं के भारी आंदोलन ने तत्कालीन केपी शर्मा ओली सरकार को उखाड़ फेंका था, जिसके बाद राजनीति में कम अनुभव रखने वाले बालेन शाह सत्ता में आए थे। लेकिन अब वही युवा वर्ग शाह के फैसलों और चुनौतियों से निपटने में उनकी अक्षमता से निराश नजर आ रहा है। यह घटना बालेन सरकार के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन गई है।
डेमोग्राफी में बदलाव और बिहार बॉर्डर पर भारत की बढ़ी टेंशन
नेपाल की इस हिंसा ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। दरअसल, नेपाल के जिस इलाके से इस सांप्रदायिक तनाव की शुरुआत हुई है, वह सीधे तौर पर भारत के बिहार बॉर्डर से सटा हुआ है। खुफिया रिपोर्ट्स और जानकारों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में इस सीमावर्ती क्षेत्र की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) में आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिले हैं। एहतियात के तौर पर भारत ने नेपाल से सटी अपनी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी को बेहद कड़ा कर दिया है।
खतरे में नेपाल की अर्थव्यवस्था
भारत और नेपाल के कूटनीतिक रिश्ते इस वक्त अपने सबसे बेहतरीन दौर से नहीं गुजर रहे हैं। नेपाल के पीएम बालेन शाह ने सत्ता संभालने के बाद से अब तक भारत का कोई आधिकारिक दौरा नहीं किया है, जिससे दोनों देशों के बीच असहजता बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ, नेपाल पहले से ही भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के सरकार के प्रयास अब तक खास सफल नहीं रहे हैं। ऐसे में अगर इस सांप्रदायिक हिंसा की आग को तुरंत नहीं बुझाया गया, तो इसके परिणाम पूरे देश की माली हालत और शांति के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकते हैं।

